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Verses > document id: DDS & chapter id : BGB_C03 or DDS_C09

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अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् । (1) · अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् । (1) · अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् । (1) · अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय । (1) · अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् । (1) · अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् । (1) · इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् । (1) · कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् । (1) · खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् । (1) · दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् । (1) · प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् । (1) · बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् । (1) · विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् । (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥ (1) · शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥ (1) · सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् । (1) · सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् । (1) · सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् । (1)
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