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अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् । (1) ·
अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् । (1) ·
अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् । (1) ·
अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय । (1) ·
अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् । (1) ·
अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् । (1) ·
अविज्ञातं विजानतां विज्ञातमविजानताम् ॥ ३ ॥ (1) ·
आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ ४ ॥ (2) ·
इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् । (1) ·
कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् । (1) ·
खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् । (1) ·
दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् । (1) ·
नाहमन्ये सुवेदेति नो न वेदेति वेद च । (2) ·
प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् । (1) ·
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते । (2) ·
बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् । (1) ·
यस्यामतं तस्य मतं मतं यस्य न वेद सः । (1) ·
यो नस्तद् वेद तद् वेद नो न वेदेति वेद च ॥ २ ॥ (2) ·
विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् । (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥ (1) ·
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥ (1) ·
सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् । (1) ·
सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् । (1) ·
सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् । (1)
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