Anubhashya: Difference between revisions
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= ब्रह्मसूत्राणुभाष्यम् = | <div class="gr-doc-title" data-has-moola="1">ब्रह्मसूत्राणुभाष्यम्</div> | ||
__TOC__ | |||
<span id="gr-C1" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="प्रथमोध्यायः"></span> | |||
== प्रथमोध्यायः == | |||
<div class="introduction" id="BSAB_C01_I01" data-block-id="BSAB_C01_I01" data-verse="BSAB_C01"> | |||
<div class="introduction-line">नारायणं गुणैः सर्वैरुदीर्णं दोषवर्जितम्।</div> | |||
<div class="introduction-line">ज्ञेयं गम्यं गुरूंश्चापि नत्वा सूत्रार्थ उच्यते ॥1॥</div> | |||
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| verse_line1 = विष्णुरेव विजिज्ञास्यः सर्वकर्ताऽगमोदितः। | |||
| verse_lines = विष्णुरेव विजिज्ञास्यः सर्वकर्ताऽगमोदितः।;समन्वयादीक्षतेश्च पूर्णानन्दोऽन्तरः खवत्॥ १॥ | |||
| verse_line2 = समन्वयादीक्षतेश्च पूर्णानन्दोऽन्तरः खवत्॥ १॥ | |||
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| verse_line1 = प्रणेता ज्योतिरित्याद्यैः प्रसिद्धैरन्यवस्तुषु। | |||
| verse_lines = प्रणेता ज्योतिरित्याद्यैः प्रसिद्धैरन्यवस्तुषु।;उच्यते विष्णुरेवैकः सर्वैः सर्वगुणत्वतः॥ २॥ | |||
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| verse_lines = सर्वगोऽत्ता नियन्ता च दृश्यत्वाद्युज्झितः सदा।;विश्वजीवान्तरत्वाद्यैर्लिङ्गैः सर्वैर्युतः स हि॥ ३॥ | |||
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| verse_lines = सर्वाश्रयः पूर्णगुणः सोऽक्षरः सन् हृदब्जगः।;सूर्यादिभासकः प्राणप्रेरको दैवतैरपि॥ ४॥ | |||
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| verse_lines = ज्ञेयो न वेदैः शूद्रादैः कम्पकोऽन्यश्च जीवतः।;पतित्वादिगुणैर्युक्तः तदन्यत्र च वाचकैः॥ ५॥ | |||
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| verse_lines = मुख्यतः सर्वशब्दैश्च वाच्य एको जनार्दनः।;अव्यक्तः कर्मवाच्यैश्च वाच्य एकोऽमितात्मकः॥ ६॥ | |||
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| verse_line1 = अवान्तरं कारणं च प्रकृतिः शून्यमेव च। | |||
| verse_lines = अवान्तरं कारणं च प्रकृतिः शून्यमेव च।;इत्याद्यन्यत्र नियतैरपि मुख्यतयोदितः।;शब्दैरतोऽनन्तगुणो यच्छब्दा योगवृत्तयः॥ ७॥ | |||
| verse_line2 = इत्याद्यन्यत्र नियतैरपि मुख्यतयोदितः। | |||
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<div class="gr-author-note">॥ इति प्रथमोऽध्यायः॥</div> | |||
<span id="gr-C2" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="द्वितीयोऽध्यायः॥"></span> | |||
== द्वितीयोऽध्यायः॥ == | |||
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| verse_line1 = श्रौतस्मृतिविरुद्धत्वात् स्मृतयो न गुणान् हरेः। | |||
| verse_lines = श्रौतस्मृतिविरुद्धत्वात् स्मृतयो न गुणान् हरेः।;निषेद्धुं शक्नुयुर्वेदा नित्यत्वान्मानमुत्तमम्॥ १॥ | |||
| verse_line2 = निषेद्धुं शक्नुयुर्वेदा नित्यत्वान्मानमुत्तमम्॥ १॥ | |||
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| verse_lines = देवतावचनादापो वदन्तीत्यादिकं वचः ।;नायुक्तवाद्यसन्नैव कारणं दृश्यते क्वचित् ॥ २॥ | |||
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| verse_lines = असज्जीवप्रधानादिशब्दा ब्रह्मैव नापरम्।;वदन्ति कारणत्वेन क्वापि पूर्णगुणो हरिः॥ ३॥ | |||
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| verse_lines = स्वातन्त्र्यात् सर्वकर्तृत्वान्नायुक्तं तद्वदेच्छ्रुतिः।;भ्रान्तिमूलतया सर्वसमयानामयुक्तितः॥४॥ | |||
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| verse_lines = न तद्विरोधाद्वचनं वैदिकं शङ्क्यतां व्रजेत्।;आकाशादिसमस्तं च तज्जं तेनैव लीयते॥ ५ ॥ | |||
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| verse_lines = सोऽनुत्पत्तिलयः कर्ता जीवः तद्वशगः सदा।;तदाभासो हरिः सर्वरूपेष्वपि समः सदा॥ .६॥ | |||
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| verse_lines = मुख्यप्राणश्चेन्द्रियाणि देहश्चैव तदुद्भवः।;मुख्यप्राणवशे सर्वं स विष्णोर्वशगः सदा॥ ७॥ | |||
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| verse_lines = सर्वदोषोज्झितः तस्माद् भगवान् पुरुषोत्तमः।;उक्ता गुणाश्चाविरुद्धास्तस्य वेदेषु सर्वशः॥ ८॥ | |||
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<div class="gr-author-note">॥ इति द्वितीयोऽध्यायः॥</div> | |||
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== तृतीयोऽध्यायः॥ == | |||
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| verse_lines = शुभेन कर्मणा स्वर्गं निरयं च विकर्मणा।;मिथ्याज्ञानेन च तमो ज्ञानेनैव परं पदम्॥ १॥ | |||
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| verse_lines = याति तस्माद्विरक्तः सन् ज्ञानमेव समाश्रयेत्।;सर्वावस्थाप्रेरकश्च सर्वरूपेष्वभेदवान्॥ २॥ | |||
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| verse_lines = सर्वदेशेषु कालेषु स एकः परमेश्वरः।;तद्भक्तितारतम्येन तारतम्यं विमुक्तिगम्॥ ३॥ | |||
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| verse_lines = सच्चिदानन्द आत्मेति मानुषैस्तु सुरेश्वरैः।;यथाक्रमं बहुगुणैर्ब्रह्मणा त्वखिलैर्गुणैः॥ ४॥ | |||
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| verse_lines = उपास्यः सर्वदेवैश्च सर्वैरपि यथा बलम्।;ज्ञेयो विष्णुर्विशेषस्तु ज्ञाने स्यादुत्तरोत्तरम्॥ ५॥ | |||
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| verse_lines = सर्वेऽपि पुरुषार्थास्युः ज्ञानादेव न संशयः।;न लिप्यते ज्ञानावांश्च सर्वदोषैरपि क्वचित्॥ ६॥ | |||
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| verse_lines = गुणदोषैः सुखस्यापि वृद्धिह्रासौ विमुक्तिगौ।;नृणां सुराणां मुक्तौ तु सुखं क्लृप्तं यथाक्रमम्॥ ७॥ | |||
| verse_line2 = नृणां सुराणां मुक्तौ तु सुखं क्लृप्तं यथाक्रमम्॥ ७॥ | |||
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<div class="gr-author-note">॥ इति तृतीयोऽध्यायः॥</div> | |||
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== चतुर्थोऽध्यायः॥ == | |||
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<div class="gr-author-note">॥ इति चतुर्थोऽध्यायः॥</div> | |||
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं ब्रह्मसूत्राणुभाष्यं सम्पूर्णम्</div> | |||
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