Dwadasha: Difference between revisions
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== प्रथमाध्यायः == | |||
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| verse_lines = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।;इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥ | |||
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| verse_lines = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।;हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥ | |||
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| verse_lines = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।;स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥ | |||
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| verse_lines = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।;अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥ | |||
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| verse_lines = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।;पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥ | |||
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| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् । | | verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् । | ||
| verse_lines = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।;वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥ | |||
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| verse_lines = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।;भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥ | |||
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| verse_lines = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।;गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥ | |||
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| verse_lines = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।;पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥ | |||
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| verse_lines = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।;भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥ | |||
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| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः । | | verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः । | ||
| verse_lines = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।;नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥ | |||
| verse_line2 = नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥ | | verse_line2 = नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥ | ||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः ।</div> | |||
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== द्वितीयोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_lines = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।;अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥ | |||
| verse_line2 = अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥ | | verse_line2 = अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥ | ||
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| verse_lines = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।;सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥ | |||
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| verse_lines = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।;अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥ | |||
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| verse_lines = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।;नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥ | |||
| verse_line2 = नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥ | | verse_line2 = नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥ | ||
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| verse_lines = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।;सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥ | |||
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| verse_lines = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।;विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥ | |||
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| verse_lines = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।;अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥ | |||
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| verse_lines = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।;अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥ | |||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः ।</div> | |||
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== तृतीयोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_lines = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।;हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥ | |||
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| verse_lines = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।;तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥ | |||
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| verse_lines = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।;स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥ | |||
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| verse_lines = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।;न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥ | |||
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| verse_lines = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।;यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥ | |||
| verse_line2 = यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥ | | verse_line2 = यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥ | ||
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| verse_lines = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।;चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥ | |||
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| verse_line1 = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् । | | verse_line1 = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् । | ||
| verse_lines = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।;बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥ | |||
| verse_line2 = बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥ | | verse_line2 = बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥ | ||
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| verse_line1 = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा । | | verse_line1 = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा । | ||
| verse_lines = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।;नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥ | |||
| verse_line2 = नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥ | | verse_line2 = नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥ | ||
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| verse_line1 = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा । | | verse_line1 = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा । | ||
| verse_lines = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।;कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥ | |||
| verse_line2 = कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥ | | verse_line2 = कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥ | ||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः ।</div> | |||
<span id="gr-C4" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="चतुर्थोध्यायः"></span> | |||
== चतुर्थोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_lines = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।;अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥ | |||
| verse_line2 = अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥ | | verse_line2 = अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥ | ||
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| verse_lines = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।;स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥ | |||
| verse_line2 = स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥ | | verse_line2 = स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥ | ||
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| verse_lines = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।;सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥ | |||
| verse_line2 = सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥ | | verse_line2 = सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥ | ||
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| verse_lines = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।;विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥ | |||
| verse_line2 = विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥ | | verse_line2 = विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥ | ||
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| verse_lines = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।;बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥ | |||
| verse_line2 = बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥ | | verse_line2 = बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥ | ||
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| verse_lines = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।;सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥ | |||
| verse_line2 = सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥ | | verse_line2 = सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥ | ||
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| verse_lines = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।;क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥ | |||
| verse_line2 = क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥ | | verse_line2 = क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥ | ||
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| verse_line1 = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः । | | verse_line1 = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः । | ||
| verse_lines = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।;सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥ | |||
| verse_line2 = सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥ | | verse_line2 = सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥ | ||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः ।</div> | |||
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== पञ्चमोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_lines = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।;धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥ | |||
| verse_line2 = धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥ | | verse_line2 = धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥ | ||
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| verse_lines = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।;केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥ | |||
| verse_line2 = केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥ | | verse_line2 = केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥ | ||
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| verse_lines = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।;माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥ | |||
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| verse_lines = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।;विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥ | |||
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| verse_lines = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।;त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥ | |||
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| verse_lines = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।;श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥ | |||
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| verse_lines = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।;पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।;दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥ | |||
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| verse_lines = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।;परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥ | |||
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| verse_line1 = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे । | | verse_line1 = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे । | ||
| verse_lines = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।;नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥ | |||
| verse_line2 = नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥ | | verse_line2 = नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥ | ||
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| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा । | | verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा । | ||
| verse_lines = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।;पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥ | |||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः ।</div> | |||
<span id="gr-C7" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="सप्तमोध्यायः"></span> | |||
== सप्तमोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_lines = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।;यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥ | |||
| verse_line2 = यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥ | | verse_line2 = यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥ | ||
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| verse_lines = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥ | |||
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥ | | verse_line2 = आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥ | ||
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| verse_lines = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥ | |||
| verse_line2 = आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥ | | verse_line2 = आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥ | ||
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| verse_lines = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥ | |||
| verse_line2 = आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥ | | verse_line2 = आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥ | ||
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| verse_lines = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥ | |||
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| verse_lines = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥ | |||
| verse_line2 = आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥ | | verse_line2 = आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥ | ||
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| verse_lines = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥ | |||
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| verse_lines = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥ | |||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः ।</div> | |||
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== अष्टमोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_lines = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।;इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥ | |||
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| verse_lines = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।;दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥ | |||
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| verse_lines = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।;भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥ | |||
| verse_line2 = भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् । | | verse_line2 = भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् । | ||
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| verse_lines = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।;अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥ | |||
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| verse_lines = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।;सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥ | |||
| verse_line2 = सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः । | | verse_line2 = सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः । | ||
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| verse_lines = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।;नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥ | |||
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| verse_lines = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।;उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥ | |||
| verse_line2 = उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् । | | verse_line2 = उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् । | ||
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| verse_lines = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।;उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥ | |||
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| verse_lines = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।;पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥ | |||
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| verse_lines = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।;शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥ | |||
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| verse_lines = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।;मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥ | |||
| verse_line2 = मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा । | | verse_line2 = मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा । | ||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः ।</div> | |||
<span id="gr-C9" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="नवमोध्यायः"></span> | |||
== नवमोध्यायः == | |||
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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| verse_line1 = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय । | | verse_line1 = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय । | ||
| verse_lines = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ | |||
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ | | verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ | ||
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| verse_line1 = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् । | | verse_line1 = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् । | ||
| verse_lines = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥ | |||
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| verse_line1 = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् । | | verse_line1 = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् । | ||
| verse_lines = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ | |||
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ | | verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ | ||
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| verse_line1 = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् । | | verse_line1 = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् । | ||
| verse_lines = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ | |||
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ | | verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ | ||
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| verse_lines = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥ | |||
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| verse_lines = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥ | |||
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| verse_lines = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥ | |||
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| verse_lines = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥ | |||
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| verse_lines = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥ | |||
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| verse_lines = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥ | |||
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== दशमोध्यायः == | |||
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| verse_lines = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥ | |||
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| verse_lines = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥ | |||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः ।</div> | |||
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इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः ।</div> | |||
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इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः । | {{VerseBlock | ||
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