Kathalakshanam: Difference between revisions

Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
 
(4 intermediate revisions by the same user not shown)
Line 7: Line 7:
</div>
</div>


{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = KL_C01_V01
| document_id  = KL
| document_id  = KL
| chapter_num  = 1
| chapter_id   = KL_C01
| title        = कथालक्षणम्
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = नरसिंहमखिलाज्ञानतिमिराशिशिरद्युतिम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = नरसिंहमखिलाज्ञानतिमिराशिशिरद्युतिम् ।;सम्प्रणम्य प्रवक्ष्यामि कथालक्षणमञ्जसा ॥1॥
| verse_id = KL_C01_V01
| verse_line2 = सम्प्रणम्य प्रवक्ष्यामि कथालक्षणमञ्जसा ॥1॥
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_line1 = नरसिंहमखिलाज्ञानतिमिराशिशिरद्युतिम् ।
| verse_line2 = सम्प्रणम्य प्रवक्ष्यामि कथालक्षणमञ्जसा ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V02
| verse_id     = KL_C01_V02
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा ।
| verse_line1 = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा ।
| verse_line2 = तत्त्वनिर्णयमुद्दिश्य केवलं गुरुशिष्ययोः ॥2॥
| verse_lines  = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा ।;तत्त्वनिर्णयमुद्दिश्य केवलं गुरुशिष्ययोः ॥2॥
| verse_line2 = तत्त्वनिर्णयमुद्दिश्य केवलं गुरुशिष्ययोः ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V03
| verse_id     = KL_C01_V03
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = कथाऽन्येषामपि सतां वादो वा समितेः शुभा ।
| verse_line1 = कथाऽन्येषामपि सतां वादो वा समितेः शुभा ।
| verse_line2 = ख्यात्याद्यर्थं स्पर्धया वा सतां जल्प इतीर्यते ॥3॥
| verse_lines  = कथाऽन्येषामपि सतां वादो वा समितेः शुभा ।;ख्यात्याद्यर्थं स्पर्धया वा सतां जल्प इतीर्यते ॥3॥
| verse_line2 = ख्यात्याद्यर्थं स्पर्धया वा सतां जल्प इतीर्यते ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V04
| verse_id     = KL_C01_V04
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् ।
| verse_line1 = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् ।
| verse_line2 = स्वयं वा प्राश्निकैर्वादे चिन्तयेत् तत्त्वनिर्णयम् ॥4॥
| verse_lines  = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् ।;स्वयं वा प्राश्निकैर्वादे चिन्तयेत् तत्त्वनिर्णयम् ॥4॥
| verse_line2 = स्वयं वा प्राश्निकैर्वादे चिन्तयेत् तत्त्वनिर्णयम् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V05
| verse_id     = KL_C01_V05
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः ।
| verse_line1 = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः ।
| verse_line2 = प्राश्निका इति सम्प्रोक्ता विषमा एक एव वा ॥5॥
| verse_lines  = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः ।;प्राश्निका इति सम्प्रोक्ता विषमा एक एव वा ॥5॥
| verse_line2 = प्राश्निका इति सम्प्रोक्ता विषमा एक एव वा ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V06
| verse_id     = KL_C01_V06
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।
| verse_line1 = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।
| verse_line2 = एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥
| verse_lines  = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।;एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥
| verse_line2 = एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V07
| verse_id     = KL_C01_V07
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।
| verse_line1 = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।
| verse_line2 = विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥
| verse_lines  = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।;विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥
| verse_line2 = विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V08
| verse_id     = KL_C01_V08
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।
| verse_line1 = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।
| verse_line2 = नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।
| verse_lines  = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।;नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।;अन्यार्थ एवागमस्य वक्तव्यः प्रतिवादिना ॥8॥
| verse_line3 = अन्यार्थ एवागमस्य वक्तव्यः प्रतिवादिना ॥8॥
| verse_line2  = नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V09
| verse_id     = KL_C01_V09
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = ऋग्यजुःसामाथर्वाश्च भारतं पञ्चरात्रकम् ।
| verse_line1 = ऋग्यजुःसामाथर्वाश्च भारतं पञ्चरात्रकम् ।
| verse_line2 = मूलरामायणं चैव सम्प्रोच्यन्ते सदागमाः ॥9॥
| verse_lines  = ऋग्यजुःसामाथर्वाश्च भारतं पञ्चरात्रकम् ।;मूलरामायणं चैव सम्प्रोच्यन्ते सदागमाः ॥9॥
| verse_line2 = मूलरामायणं चैव सम्प्रोच्यन्ते सदागमाः ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V10
| verse_id     = KL_C01_V10
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अनुकूला य एतेषां ते च प्रोक्तास्सदागमाः ।
| verse_line1 = अनुकूला य एतेषां ते च प्रोक्तास्सदागमाः ।
| verse_line2 = अन्ये दुरागमा नाम तैर्न साध्यं हि साध्यते ॥10॥
| verse_lines  = अनुकूला य एतेषां ते च प्रोक्तास्सदागमाः ।;अन्ये दुरागमा नाम तैर्न साध्यं हि साध्यते ॥10॥
| verse_line2 = अन्ये दुरागमा नाम तैर्न साध्यं हि साध्यते ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V11
| verse_id     = KL_C01_V11
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्वपक्ष आगमश्चैव वक्तव्यः प्रतिवादिना ।
| verse_line1 = स्वपक्ष आगमश्चैव वक्तव्यः प्रतिवादिना ।
| verse_line2 = तस्याप्यन्यार्थता साध्या वादिना स्वार्थसिद्धये ॥11॥
| verse_lines  = स्वपक्ष आगमश्चैव वक्तव्यः प्रतिवादिना ।;तस्याप्यन्यार्थता साध्या वादिना स्वार्थसिद्धये ॥11॥
| verse_line2 = तस्याप्यन्यार्थता साध्या वादिना स्वार्थसिद्धये ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V12
| verse_id     = KL_C01_V12
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अन्यार्थता निराकार्या स्वागमस्य विनिश्चयम् ।
| verse_line1 = अन्यार्थता निराकार्या स्वागमस्य विनिश्चयम् ।
| verse_line2 = उपपत्त्यवकाशोऽत्र ह्यागमार्थविनिर्णये ॥12॥
| verse_lines  = अन्यार्थता निराकार्या स्वागमस्य विनिश्चयम् ।;उपपत्त्यवकाशोऽत्र ह्यागमार्थविनिर्णये ॥12॥
| verse_line2 = उपपत्त्यवकाशोऽत्र ह्यागमार्थविनिर्णये ॥12॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V13
| verse_id     = KL_C01_V13
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वाद्यागमार्थे निर्णीत आगमार्थः परस्य तु ।
| verse_line1 = वाद्यागमार्थे निर्णीत आगमार्थः परस्य तु ।
| verse_line2 = निर्णेयः सहितैः पश्चात्ततो निश्शेषनिर्णयः ॥13॥
| verse_lines  = वाद्यागमार्थे निर्णीत आगमार्थः परस्य तु ।;निर्णेयः सहितैः पश्चात्ततो निश्शेषनिर्णयः ॥13॥
| verse_line2 = निर्णेयः सहितैः पश्चात्ततो निश्शेषनिर्णयः ॥13॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V14
| verse_id     = KL_C01_V14
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = प्रत्यक्षसिद्धेष्वर्थेषु प्रश्ने मामक्षजं वदेत् ।
| verse_line1 = प्रत्यक्षसिद्धेष्वर्थेषु प्रश्ने मामक्षजं वदेत् ।
| verse_line2 = ज्ञानं वा ज्ञानसिद्धेषु नानुमां प्रथमं वदेत् ॥14॥
| verse_lines  = प्रत्यक्षसिद्धेष्वर्थेषु प्रश्ने मामक्षजं वदेत् ।;ज्ञानं वा ज्ञानसिद्धेषु नानुमां प्रथमं वदेत् ॥14॥
| verse_line2 = ज्ञानं वा ज्ञानसिद्धेषु नानुमां प्रथमं वदेत् ॥14॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V15
| verse_id     = KL_C01_V15
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परतुष्टिकरं वाक्यं वदेतां यदि वादिनी ।
| verse_line1 = परतुष्टिकरं वाक्यं वदेतां यदि वादिनी ।
| verse_line2 = स एवात्रागमो ज्ञेयः परतुष्टिर्हि तत्फलम् ॥15॥
| verse_lines  = परतुष्टिकरं वाक्यं वदेतां यदि वादिनी ।;स एवात्रागमो ज्ञेयः परतुष्टिर्हि तत्फलम् ॥15॥
| verse_line2 = स एवात्रागमो ज्ञेयः परतुष्टिर्हि तत्फलम् ॥15॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V16
| verse_id     = KL_C01_V16
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = एवं निर्णयपर्यन्तं वादे सुबहवोऽपि हि ।
| verse_line1 = एवं निर्णयपर्यन्तं वादे सुबहवोऽपि हि ।
| verse_line2 = घटेयुश्चिरकालं च जल्पे यावत्परो जितः ॥16॥
| verse_lines  = एवं निर्णयपर्यन्तं वादे सुबहवोऽपि हि ।;घटेयुश्चिरकालं च जल्पे यावत्परो जितः ॥16॥
| verse_line2 = घटेयुश्चिरकालं च जल्पे यावत्परो जितः ॥16॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V17
| verse_id     = KL_C01_V17
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = तत्त्वनिर्णयवैलोम्यं वादे साक्षात्पराजयः ।
| verse_line1 = तत्त्वनिर्णयवैलोम्यं वादे साक्षात्पराजयः ।
| verse_line2 = संवादे श्लाघ्यतैव स्याद् गुरुत्वमितरस्य च ॥17॥
| verse_lines  = तत्त्वनिर्णयवैलोम्यं वादे साक्षात्पराजयः ।;संवादे श्लाघ्यतैव स्याद् गुरुत्वमितरस्य च ॥17॥
| verse_line2 = संवादे श्लाघ्यतैव स्याद् गुरुत्वमितरस्य च ॥17॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V18
| verse_id     = KL_C01_V18
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = तत्त्वनिर्णयवैलोम्ये निन्द्यो दण्ड्योऽथवा भवेत् ।
| verse_line1 = तत्त्वनिर्णयवैलोम्ये निन्द्यो दण्ड्योऽथवा भवेत् ।
| verse_line2 = विरोधासङ्गतिन्यूनतूष्णीम्भावादिकैर्जितः ॥18॥
| verse_lines  = तत्त्वनिर्णयवैलोम्ये निन्द्यो दण्ड्योऽथवा भवेत् ।;विरोधासङ्गतिन्यूनतूष्णीम्भावादिकैर्जितः ॥18॥
| verse_line2 = विरोधासङ्गतिन्यूनतूष्णीम्भावादिकैर्जितः ॥18॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V19
| verse_id     = KL_C01_V19
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = भवेज्जल्पे वितण्डायां न्यायो जल्पवदीरितः ।
| verse_line1 = भवेज्जल्पे वितण्डायां न्यायो जल्पवदीरितः ।
| verse_line2 = संवादे दण्ड्यतां न स्याद् वितण्डाजल्पयोरपि ॥19॥
| verse_lines  = भवेज्जल्पे वितण्डायां न्यायो जल्पवदीरितः ।;संवादे दण्ड्यतां न स्याद् वितण्डाजल्पयोरपि ॥19॥
| verse_line2 = संवादे दण्ड्यतां न स्याद् वितण्डाजल्पयोरपि ॥19॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V20
| verse_id     = KL_C01_V20
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पराजितत्वमात्रं स्यान्निन्द्यो दण्ड्योऽपि वाऽन्यथा ।
| verse_line1 = पराजितत्वमात्रं स्यान्निन्द्यो दण्ड्योऽपि वाऽन्यथा ।
| verse_line2 = अनुवादादिराहित्यं नैव जल्पेऽपि दूषणम् ॥20॥
| verse_lines  = पराजितत्वमात्रं स्यान्निन्द्यो दण्ड्योऽपि वाऽन्यथा ।;अनुवादादिराहित्यं नैव जल्पेऽपि दूषणम् ॥20॥
| verse_line2 = अनुवादादिराहित्यं नैव जल्पेऽपि दूषणम् ॥20॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V21
| verse_id     = KL_C01_V21
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विद्याहीनत्वलिङ्गेऽपि वादिनोः स्यात् पराजयः ।
| verse_line1 = विद्याहीनत्वलिङ्गेऽपि वादिनोः स्यात् पराजयः ।
| verse_line2 = तदभावान्नैव षट्कादन्यो निग्रह इष्यते ॥21॥
| verse_lines  = विद्याहीनत्वलिङ्गेऽपि वादिनोः स्यात् पराजयः ।;तदभावान्नैव षट्कादन्यो निग्रह इष्यते ॥21॥
| verse_line2 = तदभावान्नैव षट्कादन्यो निग्रह इष्यते ॥21॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V22
| verse_id     = KL_C01_V22
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अन्तर्भावादिहान्येषां निग्रहाणामिति स्म ह ।
| verse_line1 = अन्तर्भावादिहान्येषां निग्रहाणामिति स्म ह ।
| verse_line2 = विद्यापरीक्षापूर्वैव वृत्तिर्जल्पवितण्डयोः ॥22॥
| verse_lines  = अन्तर्भावादिहान्येषां निग्रहाणामिति स्म ह ।;विद्यापरीक्षापूर्वैव वृत्तिर्जल्पवितण्डयोः ॥22॥
| verse_line2 = विद्यापरीक्षापूर्वैव वृत्तिर्जल्पवितण्डयोः ॥22॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V23
| verse_id     = KL_C01_V23
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्खलितात्वादिमात्रेण न तत्रापि पराजयः ।
| verse_line1 = स्खलितात्वादिमात्रेण न तत्रापि पराजयः ।
| verse_line2 = वादजल्पवितण्डानामिति शुद्धं स्वलक्षणम् ॥23॥
| verse_lines  = स्खलितात्वादिमात्रेण न तत्रापि पराजयः ।;वादजल्पवितण्डानामिति शुद्धं स्वलक्षणम् ॥23॥
| verse_line2 = वादजल्पवितण्डानामिति शुद्धं स्वलक्षणम् ॥23॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V24
| verse_id     = KL_C01_V24
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिना ब्रह्मतर्कानुसारतः ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिना ब्रह्मतर्कानुसारतः ।
| verse_line2 = कथालक्षणमित्युक्तं प्रीत्यर्थं शार्ङ्गधन्वनः ॥24॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनिना ब्रह्मतर्कानुसारतः ।;कथालक्षणमित्युक्तं प्रीत्यर्थं शार्ङ्गधन्वनः ॥24॥
| verse_line2 = कथालक्षणमित्युक्तं प्रीत्यर्थं शार्ङ्गधन्वनः ॥24॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = KL_C01_V25
| verse_id     = KL_C01_V25
| document_id = KL
| document_id = KL
| chapter_id = KL_C01
| chapter_id   = KL_C01
| verse_type = shloka
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सदोदितामितज्ञानपूरवारितहृत्तमाः ।
| verse_line1 = सदोदितामितज्ञानपूरवारितहृत्तमाः ।
| verse_line2 = नरसिंहः प्रियतमः प्रीयतां पुरुषोत्तमः ॥25॥
| verse_lines  = सदोदितामितज्ञानपूरवारितहृत्तमाः ।;नरसिंहः प्रियतमः प्रीयतां पुरुषोत्तमः ॥25॥
| verse_line2 = नरसिंहः प्रियतमः प्रीयतां पुरुषोत्तमः ॥25॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं कथालक्षणम् ॥</div>
| verse_id = KL_C01
| id = KL_C01_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं कथालक्षणम् ॥
| extra_class = gr-author-note
}}




[[Category:Sanskrit Documents]]
[[Category:Sanskrit Documents]]
[[Category:Kathalakshanam]]
[[Category:Kathalakshanam]]