Padyamala: Difference between revisions
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| verse_line1 = प्रणम्य श्रीपतिं सर्वान् गुरूंश्चाथ प्रवच्म्यहम् । | |||
| verse_lines = प्रणम्य श्रीपतिं सर्वान् गुरूंश्चाथ प्रवच्म्यहम् ।;यथामति हरेः पूजाविधिं वैष्णवसम्मतम् ॥ १ ॥ | |||
| verse_line2 = यथामति हरेः पूजाविधिं वैष्णवसम्मतम् ॥ १ ॥ | |||
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| verse_line1 = आदौ देवगृहे न्यस्य कलशान् सप्त पञ्च वा । | | verse_line1 = आदौ देवगृहे न्यस्य कलशान् सप्त पञ्च वा । | ||
| verse_line2 = आहरेत्तुलसीं दूर्वां पुष्पाण्यद्यतनानि च ॥ २ ॥ | | verse_lines = आदौ देवगृहे न्यस्य कलशान् सप्त पञ्च वा ।;आहरेत्तुलसीं दूर्वां पुष्पाण्यद्यतनानि च ॥ २ ॥ | ||
| verse_line2 = आहरेत्तुलसीं दूर्वां पुष्पाण्यद्यतनानि च ॥ २ ॥ | |||
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| verse_line1 = यथाकालोपपन्नानि स्वारामवनजान्यपि । | | verse_line1 = यथाकालोपपन्नानि स्वारामवनजान्यपि । | ||
| verse_line2 = अक्रीतान्यप्रदत्तानि चौर्याल्लब्धानि यानि च ॥ ३ ॥ | | verse_lines = यथाकालोपपन्नानि स्वारामवनजान्यपि ।;अक्रीतान्यप्रदत्तानि चौर्याल्लब्धानि यानि च ॥ ३ ॥ | ||
| verse_line2 = अक्रीतान्यप्रदत्तानि चौर्याल्लब्धानि यानि च ॥ ३ ॥ | |||
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| verse_line1 = शूद्राहृतानि वा भूमौ पतितानि तथैव च । | | verse_line1 = शूद्राहृतानि वा भूमौ पतितानि तथैव च । | ||
| | | verse_lines = शूद्राहृतानि वा भूमौ पतितानि तथैव च ।;एरण्डार्कजपत्रेषु चाहृतानि करे तथा ।;पटाहृतानि यानि स्युर्वर्जयेत्तानि यत्नतः ॥ ४ ॥ | ||
| verse_line2 = एरण्डार्कजपत्रेषु चाहृतानि करे तथा । | |||
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| verse_line1 = अर्घ्यपाद्यादिसम्भारान् यथाशक्ति विधाय च । | | verse_line1 = अर्घ्यपाद्यादिसम्भारान् यथाशक्ति विधाय च । | ||
| verse_line2 = प्रक्षाल्य पाणी पादौ चाप्याचम्य हरिवेश्मनः ॥ ६ ॥ | | verse_lines = अर्घ्यपाद्यादिसम्भारान् यथाशक्ति विधाय च ।;प्रक्षाल्य पाणी पादौ चाप्याचम्य हरिवेश्मनः ॥ ६ ॥ | ||
| verse_line2 = प्रक्षाल्य पाणी पादौ चाप्याचम्य हरिवेश्मनः ॥ ६ ॥ | |||
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| verse_line1 = पूर्वे नमो जयायाथ विजयायाथ दक्षिणे । | | verse_line1 = पूर्वे नमो जयायाथ विजयायाथ दक्षिणे । | ||
| verse_line2 = श्रियै बलाय प्रबलायाथ प्रत्यक् श्रियैः नमः ॥ ७ ॥ | | verse_lines = पूर्वे नमो जयायाथ विजयायाथ दक्षिणे ।;श्रियै बलाय प्रबलायाथ प्रत्यक् श्रियैः नमः ॥ ७ ॥ | ||
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| verse_line2 = कुमुदाक्षायोत्तरे च द्वारपालांश्च पूजयेत् ॥ ८ ॥ | | verse_lines = नन्दायाथ सुनन्दाय श्रियै च कुमुदाय च ।;कुमुदाक्षायोत्तरे च द्वारपालांश्च पूजयेत् ॥ ८ ॥ | ||
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| verse_line2 = अनेन वायुमन्त्रेण समुद्घाट्य कवाटकम् ॥ ९ ॥ | | verse_lines = तदनुज्ञामवाप्याथ ‘वायवायाहि दर्शत’ ।;अनेन वायुमन्त्रेण समुद्घाट्य कवाटकम् ॥ ९ ॥ | ||
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| verse_line2 = दक्षिणाङ्घ्रिं पुरस्कृत्य ‘ह्यग्निनाग्निः समिध्यते’ ॥ १० ॥ | | verse_lines = कृत्वा तालत्रयं द्वारे देहलीमस्पृशन्विशेत् ।;दक्षिणाङ्घ्रिं पुरस्कृत्य ‘ह्यग्निनाग्निः समिध्यते’ ॥ १० ॥ | ||
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| | | verse_lines = अनेन वह्निमन्त्रेण दीपानुद्दीपयेत्ततः ।;ईक्षया पुष्पक्षेपेण पार्ष्णिघातत्रयेण च ।;दिव्यन्तरिक्षभूमिष्ठान्विघ्नानुच्चाटयेत्सुधीः ॥ ११ ॥ | ||
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| verse_line2 = भूतानुच्चाट्य नाराचमुद्रया बन्धयेद्दिशम् ॥ १२ ॥ | | verse_lines = ‘अपसर्पन्तु ये भूता’ इति मन्त्रं पठन्नपि ।;भूतानुच्चाट्य नाराचमुद्रया बन्धयेद्दिशम् ॥ १२ ॥ | ||
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| verse_line2 = निवार्य मानुषं गन्धमेभिर्मन्त्रैस्तु पूजकः ॥ १३ ॥ | | verse_lines = अपैवेत्यादि येभ्यश्च एवापित्र ऋचौ पठेत् ।;निवार्य मानुषं गन्धमेभिर्मन्त्रैस्तु पूजकः ॥ १३ ॥ | ||
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| verse_line2 = कुरु घण्टारवं तत्र देवताह्वानलाञ्छनम्’ ॥ १५ ॥ | | verse_lines = ‘आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु रक्षसाम् ।;कुरु घण्टारवं तत्र देवताह्वानलाञ्छनम्’ ॥ १५ ॥ | ||
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| | | verse_lines = ततो जवनिकां त्यक्त्वा निर्माल्यं विसृजेत्ततः ।;स्नानपात्रं तथा पीठं यथास्थानं निधाय च ।;सौवर्णं मण्टपं ध्यायेद्धेमरत्नोपमण्डितम् ॥ १८ ॥ | ||
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| verse_line1 = अध्यासितासने स्वस्थोऽपक्रामन्त्विति पूर्वकान् । | | verse_line1 = अध्यासितासने स्वस्थोऽपक्रामन्त्विति पूर्वकान् । | ||
| verse_line2 = मन्त्रानुदीर्य भूतानि मुद्रया छोटिकाख्यया ॥ १९ ॥ | | verse_lines = अध्यासितासने स्वस्थोऽपक्रामन्त्विति पूर्वकान् ।;मन्त्रानुदीर्य भूतानि मुद्रया छोटिकाख्यया ॥ १९ ॥ | ||
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| verse_line2 = आसने मण्डले चेन्दोः कूर्मस्कन्धेऽहमास्थितः ॥ २० ॥ | | verse_lines = उत्साद्यासनमन्त्रेण पृथिवीं प्रार्थयेत्ततः ।;आसने मण्डले चेन्दोः कूर्मस्कन्धेऽहमास्थितः ॥ २० ॥ | ||
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| | | verse_lines = कल्पयित्वेत्थमासीनो व्याहरेत् भूर्भुवःस्वरोम् ।;इत्यासनमुपस्पृश्य मण्डूकाय नमस्ततः ।;कूर्मायाथ वराहाय शेषयाथ नमस्ततः ॥ २१ ॥ | ||
| verse_line2 = इत्यासनमुपस्पृश्य मण्डूकाय नमस्ततः । | |||
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| | | verse_lines = नमः कालाग्निरुद्राय वज्राय च नमो नमः ।;सानुस्वारं चादिवर्णं प्रणवादिमुदीर्य च ।;नमोऽन्तमिति चैतेषु षट्कं चैव जपेद्बुधः ॥ २२ ॥ | ||
| verse_line2 = सानुस्वारं चादिवर्णं प्रणवादिमुदीर्य च । | |||
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| verse_line1 = वाय्वग्निवरुणानां च बीजानि यरवाः क्रमात् । | | verse_line1 = वाय्वग्निवरुणानां च बीजानि यरवाः क्रमात् । | ||
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| verse_line2 = ततः सर्वान् गुरुन्नत्वा हृत्पद्माधिष्ठितं प्रभुम् ॥ ३० ॥ | | verse_lines = एभिः कार्यं क्रमात्षोढा करसन्धिषु शोधनम् ।;ततः सर्वान् गुरुन्नत्वा हृत्पद्माधिष्ठितं प्रभुम् ॥ ३० ॥ | ||
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| verse_line2 = श्रीमध्वगुरुणा प्रोक्तं पीठावरणपूजनम् ॥ ५६ ॥ | | verse_lines = पूज्यश्च भगवान्नित्यमित्यध्याये यथाक्रमम् ।;श्रीमध्वगुरुणा प्रोक्तं पीठावरणपूजनम् ॥ ५६ ॥ | ||
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| verse_line2 = धरां तु पश्चिमे पार्श्वे ततः पूर्वादिदिक्षु च ॥ ८३ ॥ | | verse_lines = अथावरणपूजायां लक्ष्मीं वामे हरेर्यजेत् ।;धरां तु पश्चिमे पार्श्वे ततः पूर्वादिदिक्षु च ॥ ८३ ॥ | ||
| verse_line2 = धरां तु पश्चिमे पार्श्वे ततः पूर्वादिदिक्षु च ॥ ८३ ॥ | |||
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<div class="gr-author-note">॥ इति श्रीमज्जयतीर्थश्रीचरणविरचिता पद्यमाला समाप्ता॥</div> | |||
॥ इति श्रीमज्जयतीर्थश्रीचरणविरचिता पद्यमाला समाप्ता॥ | |||
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