Kathalakshanam: Difference between revisions

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<div class="gr-doc-title" data-has-moola="1">कथालक्षणम्</div>
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* [[Kathalakshanam/Vyakhya/Kathalakshana-tika|कथालक्षणटीका]] — पद्मनाभतीर्थीया
* [[Kathalakshanam/Vyakhya/Kathalakshanapanchika|कथालक्षणपञ्चिका]] — श्रीजयतीर्थः
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| verse_lines  = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।;एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥
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| verse_lines  = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।;विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥
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| verse_lines  = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।;नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।;अन्यार्थ एवागमस्य वक्तव्यः प्रतिवादिना ॥8॥
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| verse_lines  = ऋग्यजुःसामाथर्वाश्च भारतं पञ्चरात्रकम् ;मूलरामायणं चैव सम्प्रोच्यन्ते सदागमाः ॥9॥
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| verse_lines  = अनुकूला य एतेषां ते च प्रोक्तास्सदागमाः ।;अन्ये दुरागमा नाम तैर्न साध्यं हि साध्यते ॥10॥
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| verse_lines  = स्वपक्ष आगमश्चैव वक्तव्यः प्रतिवादिना ।;तस्याप्यन्यार्थता साध्या वादिना स्वार्थसिद्धये ॥11॥
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| verse_lines  = अन्यार्थता निराकार्या स्वागमस्य विनिश्चयम् ।;उपपत्त्यवकाशोऽत्र ह्यागमार्थविनिर्णये ॥12॥
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| verse_lines  = वाद्यागमार्थे निर्णीत आगमार्थः परस्य तु ।;निर्णेयः सहितैः पश्चात्ततो निश्शेषनिर्णयः ॥13॥
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| verse_lines  = प्रत्यक्षसिद्धेष्वर्थेषु प्रश्ने मामक्षजं वदेत् ।;ज्ञानं वा ज्ञानसिद्धेषु नानुमां प्रथमं वदेत् ॥14॥
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| verse_lines  = परतुष्टिकरं वाक्यं वदेतां यदि वादिनी ।;स एवात्रागमो ज्ञेयः परतुष्टिर्हि तत्फलम् ॥15॥
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| verse_lines  = एवं निर्णयपर्यन्तं वादे सुबहवोऽपि हि ।;घटेयुश्चिरकालं च जल्पे यावत्परो जितः ॥16॥
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| verse_lines  = तत्त्वनिर्णयवैलोम्यं वादे साक्षात्पराजयः ।;संवादे श्लाघ्यतैव स्याद् गुरुत्वमितरस्य च ॥17॥
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| verse_lines  = तत्त्वनिर्णयवैलोम्ये निन्द्यो दण्ड्योऽथवा भवेत् ।;विरोधासङ्गतिन्यूनतूष्णीम्भावादिकैर्जितः ॥18॥
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<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं कथालक्षणम् ॥</div>
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