Dwadasha: Difference between revisions

Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
 
(7 intermediate revisions by the same user not shown)
Line 1: Line 1:
<div class="gr-doc-title">द्वादशस्तोत्रम्</div>
<div class="gr-doc-title" data-has-moola="1">द्वादशस्तोत्रम्</div>
__TOC__
__TOC__


<span id="gr-C1" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="प्रथमाध्यायः"></span>
== प्रथमाध्यायः ==
== प्रथमाध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C01_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 1
| chapter_id   = DDS_C01
| title        = प्रथमाध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।;इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
| verse_id = DDS_C01_V01
| verse_line2 = इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_line1 = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।
| verse_line2 = इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V02
| verse_id     = DDS_C01_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।
| verse_line1 = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।
| verse_line2 = हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
| verse_lines  = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।;हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
| verse_line2 = हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V03
| verse_id     = DDS_C01_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।
| verse_line1 = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।
| verse_line2 = स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
| verse_lines  = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।;स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
| verse_line2 = स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V04
| verse_id     = DDS_C01_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।
| verse_line1 = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।
| verse_line2 = वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
| verse_lines  = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।;वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
| verse_line2 = वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V05
| verse_id     = DDS_C01_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।
| verse_line1 = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।
| verse_line2 = अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
| verse_lines  = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।;अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
| verse_line2 = अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V06
| verse_id     = DDS_C01_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।
| verse_line1 = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।
| verse_line2 = पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
| verse_lines  = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।;पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
| verse_line2 = पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V07
| verse_id     = DDS_C01_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।
| verse_line2 = वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
| verse_lines  = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।;वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
| verse_line2 = वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V08
| verse_id     = DDS_C01_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।
| verse_line1 = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।
| verse_line2 = भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
| verse_lines  = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।;भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
| verse_line2 = भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V09
| verse_id     = DDS_C01_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।
| verse_line1 = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।
| verse_line2 = गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
| verse_lines  = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।;गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
| verse_line2 = गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V10
| verse_id     = DDS_C01_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।
| verse_line1 = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।
| verse_line2 = पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
| verse_lines  = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।;पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
| verse_line2 = पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V11
| verse_id     = DDS_C01_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।
| verse_line1 = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।
| verse_line2 = भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
| verse_lines  = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।;भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
| verse_line2 = भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V12
| verse_id     = DDS_C01_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।
| verse_line2 = नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥
| verse_lines  = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।;नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥
| verse_line2 = नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C01
| id = DDS_C01_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C2" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="द्वितीयोध्यायः"></span>
== द्वितीयोध्यायः ==
== द्वितीयोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C02_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 2
| chapter_id   = DDS_C02
| title        = द्वितीयोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।;अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥
| verse_id = DDS_C02_V01
| verse_line2 = अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_line1 = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।
| verse_line2 = अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V02
| verse_id     = DDS_C02_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।
| verse_line1 = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।
| verse_line2 = सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥
| verse_lines  = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।;सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥
| verse_line2 = सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V03
| verse_id     = DDS_C02_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।
| verse_line1 = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।
| verse_line2 = अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥
| verse_lines  = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।;अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥
| verse_line2 = अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V04
| verse_id     = DDS_C02_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।
| verse_line1 = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।
| verse_line2 = नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥
| verse_lines  = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।;नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥
| verse_line2 = नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V05
| verse_id     = DDS_C02_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।
| verse_line1 = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।
| verse_line2 = सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥
| verse_lines  = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।;सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥
| verse_line2 = सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V06
| verse_id     = DDS_C02_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।
| verse_line1 = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।
| verse_line2 = विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥
| verse_lines  = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।;विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥
| verse_line2 = विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V07
| verse_id     = DDS_C02_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।
| verse_line1 = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।
| verse_line2 = अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥
| verse_lines  = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।;अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥
| verse_line2 = अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V08
| verse_id     = DDS_C02_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।
| verse_line1 = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।
| verse_line2 = अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥
| verse_lines  = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।;अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥
| verse_line2 = अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V09
| verse_id     = DDS_C02_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।
| verse_line1 = इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।
| verse_line2 = अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥
| verse_lines  = इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।;अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥
| verse_line2 = अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C02
| id = DDS_C02_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C3" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="तृतीयोध्यायः"></span>
== तृतीयोध्यायः ==
== तृतीयोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C03_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 3
| chapter_id   = DDS_C03
| title        = तृतीयोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।;हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥
| verse_id = DDS_C03_V01
| verse_line2 = हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_line1 = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।
| verse_line2 = हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V02
| verse_id     = DDS_C03_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।
| verse_line1 = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।
| verse_line2 = तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥
| verse_lines  = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।;तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥
| verse_line2 = तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V03
| verse_id     = DDS_C03_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।
| verse_line1 = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।
| verse_line2 = स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥
| verse_lines  = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।;स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥
| verse_line2 = स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V04
| verse_id     = DDS_C03_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।
| verse_line1 = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।
| verse_line2 = न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥
| verse_lines  = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।;न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥
| verse_line2 = न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V05
| verse_id     = DDS_C03_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।
| verse_line1 = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।
| verse_line2 = यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥
| verse_lines  = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।;यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥
| verse_line2 = यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V06
| verse_id     = DDS_C03_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।
| verse_line1 = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।
| verse_line2 = चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥
| verse_lines  = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।;चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥
| verse_line2 = चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V07
| verse_id     = DDS_C03_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।
| verse_line1 = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।
| verse_line2 = बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥
| verse_lines  = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।;बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥
| verse_line2 = बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V08
| verse_id     = DDS_C03_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।
| verse_line1 = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।
| verse_line2 = नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥
| verse_lines  = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।;नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥
| verse_line2 = नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V09
| verse_id     = DDS_C03_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।
| verse_line2 = कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।;कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥
| verse_line2 = कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C03
| id = DDS_C03_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C4" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="चतुर्थोध्यायः"></span>
== चतुर्थोध्यायः ==
== चतुर्थोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C04_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 4
| chapter_id   = DDS_C04
| title        = चतुर्थोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।;अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥
| verse_id = DDS_C04_V01
| verse_line2 = अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_line1 = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
| verse_line2 = अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V02
| verse_id     = DDS_C04_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।
| verse_line1 = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।
| verse_line2 = स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥
| verse_lines  = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।;स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥
| verse_line2 = स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V03
| verse_id     = DDS_C04_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
| verse_line1 = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
| verse_line2 = सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥
| verse_lines  = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।;सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥
| verse_line2 = सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V04
| verse_id     = DDS_C04_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।
| verse_line1 = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।
| verse_line2 = विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥
| verse_lines  = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।;विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥
| verse_line2 = विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V05
| verse_id     = DDS_C04_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।
| verse_line1 = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।
| verse_line2 = बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥
| verse_lines  = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।;बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥
| verse_line2 = बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V06
| verse_id     = DDS_C04_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।
| verse_line1 = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।
| verse_line2 = सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥
| verse_lines  = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।;सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥
| verse_line2 = सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V07
| verse_id     = DDS_C04_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।
| verse_line1 = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।
| verse_line2 = क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥
| verse_lines  = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।;क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥
| verse_line2 = क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V08
| verse_id     = DDS_C04_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।
| verse_line1 = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।
| verse_line2 = सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥
| verse_lines  = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।;सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥
| verse_line2 = सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C04
| id = DDS_C04_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C5" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="पञ्चमोध्यायः"></span>
== पञ्चमोध्यायः ==
== पञ्चमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C05_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 5
| chapter_id   = DDS_C05
| title        = पञ्चमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।;धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
| verse_id = DDS_C05_V01
| verse_line2 = धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_line1 = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।
| verse_line2 = धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V02
| verse_id     = DDS_C05_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।
| verse_line1 = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।
| verse_line2 = केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
| verse_lines  = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।;केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
| verse_line2 = केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V03
| verse_id     = DDS_C05_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।
| verse_line1 = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।
| verse_line2 = माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
| verse_lines  = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।;माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
| verse_line2 = माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V04
| verse_id     = DDS_C05_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।
| verse_line1 = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।
| verse_line2 = विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
| verse_lines  = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।;विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
| verse_line2 = विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V05
| verse_id     = DDS_C05_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।
| verse_line1 = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।
| verse_line2 = त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
| verse_lines  = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।;त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
| verse_line2 = त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V06
| verse_id     = DDS_C05_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।
| verse_line1 = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।
| verse_line2 = श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
| verse_lines  = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।;श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
| verse_line2 = श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V07
| verse_id     = DDS_C05_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।
| verse_line1 = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।
| verse_line2 = पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
| verse_lines  = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।;पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।;दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥
| verse_line3 = दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥
| verse_line2  = पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V08
| verse_id     = DDS_C05_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।
| verse_line2 = परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।;परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
| verse_line2 = परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C05
| id = DDS_C05_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C6" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="षष्ठोध्यायः"></span>
== षष्ठोध्यायः ==
== षष्ठोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C06_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 6
| chapter_id   = DDS_C06
| title        = षष्ठोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।;कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥
| verse_id = DDS_C06_V01
| verse_line2 = कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_line1 = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।
| verse_line2 = कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V02
| verse_id     = DDS_C06_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।
| verse_line1 = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।
| verse_line2 = देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥
| verse_lines  = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।;देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥
| verse_line2 = देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V03
| verse_id     = DDS_C06_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।
| verse_line1 = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।
| verse_line2 = राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥
| verse_lines  = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।;राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥
| verse_line2 = राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V04
| verse_id     = DDS_C06_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।
| verse_line1 = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।
| verse_line2 = देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥
| verse_lines  = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।;देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥
| verse_line2 = देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V05
| verse_id     = DDS_C06_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।
| verse_line1 = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।
| verse_line2 = कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥
| verse_lines  = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।;कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥
| verse_line2 = कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V06
| verse_id     = DDS_C06_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।
| verse_line1 = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।
| verse_line2 = इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥
| verse_lines  = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।;इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥
| verse_line2 = इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V07
| verse_id     = DDS_C06_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।
| verse_line1 = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।
| verse_line2 = दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥
| verse_lines  = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।;दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥
| verse_line2 = दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V08
| verse_id     = DDS_C06_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।
| verse_line1 = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।
| verse_line2 = नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥
| verse_lines  = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।;नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥
| verse_line2 = नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V09
| verse_id     = DDS_C06_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।
| verse_line2 = पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।;पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥
| verse_line2 = पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C06
| id = DDS_C06_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C7" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="सप्तमोध्यायः"></span>
== सप्तमोध्यायः ==
== सप्तमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C07_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 7
| chapter_id   = DDS_C07
| title        = सप्तमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।;यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥
| verse_id = DDS_C07_V01
| verse_line2 = यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_line1 = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।
| verse_line2 = यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V02
| verse_id     = DDS_C07_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥
| verse_lines  = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V03
| verse_id     = DDS_C07_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥
| verse_lines  = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥
| verse_line2 = आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V04
| verse_id     = DDS_C07_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥
| verse_lines  = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥
| verse_line2 = आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V05
| verse_id     = DDS_C07_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥
| verse_lines  = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V06
| verse_id     = DDS_C07_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥
| verse_lines  = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥
| verse_line2 = आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V07
| verse_id     = DDS_C07_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥
| verse_lines  = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥
| verse_line2 = आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V08
| verse_id     = DDS_C07_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥
| verse_lines  = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥
| verse_line2 = आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V09
| verse_id     = DDS_C07_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।
| verse_line2 = भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।;भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥
| verse_line2 = भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C07
| id = DDS_C07_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C8" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="अष्टमोध्यायः"></span>
== अष्टमोध्यायः ==
== अष्टमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C08_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 8
| chapter_id   = DDS_C08
| title        = अष्टमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।;इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥
| verse_id = DDS_C08_V01
| verse_line2  = इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_line1 = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।
| verse_line2 = इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V02
| verse_id     = DDS_C08_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।
| verse_line1 = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।
| verse_line2 = दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।
| verse_lines  = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।;दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥
| verse_line2  = दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V03
| verse_id     = DDS_C08_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।
| verse_line1 = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।
| verse_line2 = भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।
| verse_lines  = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।;भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥
| verse_line2  = भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V04
| verse_id     = DDS_C08_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।
| verse_line1 = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।
| verse_line2 = अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।
| verse_lines  = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।;अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥
| verse_line2  = अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V05
| verse_id     = DDS_C08_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।
| verse_line1 = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।
| verse_line2 = सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।
| verse_lines  = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।;सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥
| verse_line2  = सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V06
| verse_id     = DDS_C08_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।
| verse_line1 = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।
| verse_line2 = नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।
| verse_lines  = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।;नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥
| verse_line2  = नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V07
| verse_id     = DDS_C08_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।
| verse_line1 = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।
| verse_line2 = उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।
| verse_lines  = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।;उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥
| verse_line2  = उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V08
| verse_id     = DDS_C08_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।
| verse_line1 = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।
| verse_line2 = उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।
| verse_lines  = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।;उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥
| verse_line2  = उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V09
| verse_id     = DDS_C08_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।
| verse_line1 = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।
| verse_line2 = पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।
| verse_lines  = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।;पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥
| verse_line2  = पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V10
| verse_id     = DDS_C08_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।
| verse_line1 = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।
| verse_line2 = शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।
| verse_lines  = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।;शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥
| verse_line2  = शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V11
| verse_id     = DDS_C08_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।
| verse_line1 = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।
| verse_line2 = अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।
| verse_lines  = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।;अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥
| verse_line2  = अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V12
| verse_id     = DDS_C08_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।
| verse_line1 = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।
| verse_line2 = मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।
| verse_lines  = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।;मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥
| verse_line2  = मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C08
| id = DDS_C08_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C9" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="नवमोध्यायः"></span>
== नवमोध्यायः ==
== नवमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C09_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 9
| chapter_id   = DDS_C09
| title        = नवमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥
| verse_id = DDS_C09_V01
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_line1 = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V02
| verse_id     = DDS_C09_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥
| verse_lines  = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V03
| verse_id     = DDS_C09_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥
| verse_lines  = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V04
| verse_id     = DDS_C09_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥
| verse_lines  = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V05
| verse_id     = DDS_C09_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥
| verse_lines  = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V06
| verse_id     = DDS_C09_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥
| verse_lines  = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V07
| verse_id     = DDS_C09_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥
| verse_lines  = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V08
| verse_id     = DDS_C09_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥
| verse_lines  = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V09
| verse_id     = DDS_C09_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥
| verse_lines  = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V10
| verse_id     = DDS_C09_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥
| verse_lines  = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V11
| verse_id     = DDS_C09_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥
| verse_lines  = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V12
| verse_id     = DDS_C09_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥
| verse_lines  = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V13
| verse_id     = DDS_C09_V13
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥
| verse_lines  = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V14
| verse_id     = DDS_C09_V14
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥
| verse_lines  = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V15
| verse_id     = DDS_C09_V15
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥
| verse_lines  = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V16
| verse_id     = DDS_C09_V16
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।
| verse_line1 = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥
| verse_lines  = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे नवमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C09
| id = DDS_C09_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे नवमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C10" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="दशमोध्यायः"></span>
== दशमोध्यायः ==
== दशमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C10_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 10
| chapter_id   = DDS_C10
| title        = दशमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥
| verse_id = DDS_C10_V01
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_line1 = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V02
| verse_id     = DDS_C10_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।
| verse_line1 = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥
| verse_lines  = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V03
| verse_id     = DDS_C10_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।
| verse_line1 = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥
| verse_lines  = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V04
| verse_id     = DDS_C10_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।
| verse_line1 = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥
| verse_lines  = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V05
| verse_id     = DDS_C10_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।
| verse_line1 = त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥
| verse_lines  = त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V06
| verse_id     = DDS_C10_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।
| verse_line1 = शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥
| verse_lines  = शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V07
| verse_id     = DDS_C10_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।
| verse_line1 = मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥
| verse_lines  = मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V08
| verse_id     = DDS_C10_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।
| verse_line1 = तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥
| verse_lines  = तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V09
| verse_id     = DDS_C10_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।
| verse_line1 = सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥
| verse_lines  = सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V10
| verse_id     = DDS_C10_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।
| verse_line1 = खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥
| verse_lines  = खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V11
| verse_id     = DDS_C10_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।
| verse_line1 = इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥
| verse_lines  = इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V12
| verse_id     = DDS_C10_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।
| verse_line1 = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥
| verse_lines  = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V13
| verse_id     = DDS_C10_V13
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।
| verse_line1 = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥
| verse_lines  = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V14
| verse_id     = DDS_C10_V14
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।
| verse_line1 = जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥
| verse_lines  = जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V15
| verse_id     = DDS_C10_V15
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।
| verse_line1 = जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥
| verse_lines  = जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V16
| verse_id     = DDS_C10_V16
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।
| verse_line1 = दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥
| verse_lines  = दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V17
| verse_id     = DDS_C10_V17
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।
| verse_line1 = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥
| verse_lines  = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V18
| verse_id     = DDS_C10_V18
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।
| verse_line1 = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥
| verse_lines  = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V19
| verse_id     = DDS_C10_V19
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।
| verse_line1 = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।
| verse_line2 = कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥
| verse_lines  = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।;कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥
| verse_line2 = कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C10
| id = DDS_C10_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C11" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="एकादशोध्यायः"></span>
== एकादशोध्यायः ==
== एकादशोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C11_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 11
| chapter_id   = DDS_C11
| title        = एकादशोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥
| verse_id = DDS_C11_V01
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_line1 = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V02
| verse_id     = DDS_C11_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।
| verse_line1 = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥
| verse_lines  = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V03
| verse_id     = DDS_C11_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।
| verse_line1 = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥
| verse_lines  = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V04
| verse_id     = DDS_C11_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।
| verse_line1 = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥
| verse_lines  = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V05
| verse_id     = DDS_C11_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।
| verse_line1 = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥
| verse_lines  = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V06
| verse_id     = DDS_C11_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।
| verse_line1 = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥
| verse_lines  = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V07
| verse_id     = DDS_C11_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।
| verse_line1 = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥
| verse_lines  = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V08
| verse_id     = DDS_C11_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।
| verse_line1 = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥
| verse_lines  = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V09
| verse_id     = DDS_C11_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।
| verse_line2 = कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।;कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥
| verse_line2 = कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C11
| id = DDS_C11_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C12" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="द्वादशोध्यायः"></span>
== द्वादशोध्यायः ==
== द्वादशोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C12_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 12
| chapter_id   = DDS_C12
| title        = द्वादशोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥
| verse_id = DDS_C12_V01
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_line1 = आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V02
| verse_id     = DDS_C12_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।
| verse_line1 = सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥
| verse_lines  = सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V03
| verse_id     = DDS_C12_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।
| verse_line1 = चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥
| verse_lines  = चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V04
| verse_id     = DDS_C12_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line1 = चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥
| verse_lines  = चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V05
| verse_id     = DDS_C12_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥
| verse_lines  = मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V06
| verse_id     = DDS_C12_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line1 = वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥
| verse_lines  = वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V07
| verse_id     = DDS_C12_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥
| verse_lines  = मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V08
| verse_id     = DDS_C12_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।
| verse_line1 = मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥
| verse_lines  = मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V09
| verse_id     = DDS_C12_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।
| verse_line1 = इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥
| verse_lines  = इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V10
| verse_id     = DDS_C12_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।
| verse_line1 = आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥
| verse_lines  = आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥
}}
| verse_line2  = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥
 
{{VerseBlock
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
}}
}}