Jump to content

Dwadasha: Difference between revisions

From Anandamakaranda
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
 
(6 intermediate revisions by the same user not shown)
Line 2: Line 2:
__TOC__
__TOC__


<span id="gr-C1" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="प्रथमाध्यायः"></span>
== प्रथमाध्यायः ==
== प्रथमाध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C01_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 1
| chapter_id   = DDS_C01
| title        = प्रथमाध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।;इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
| verse_id = DDS_C01_V01
| verse_line2 = इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_line1 = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।
| verse_line2 = इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V02
| verse_id     = DDS_C01_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।
| verse_line1 = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।
| verse_line2 = हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
| verse_lines  = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।;हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
| verse_line2 = हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V03
| verse_id     = DDS_C01_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।
| verse_line1 = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।
| verse_line2 = स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
| verse_lines  = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।;स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
| verse_line2 = स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V04
| verse_id     = DDS_C01_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।
| verse_line1 = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।
| verse_line2 = वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
| verse_lines  = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।;वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
| verse_line2 = वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V05
| verse_id     = DDS_C01_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।
| verse_line1 = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।
| verse_line2 = अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
| verse_lines  = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।;अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
| verse_line2 = अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V06
| verse_id     = DDS_C01_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।
| verse_line1 = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।
| verse_line2 = पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
| verse_lines  = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।;पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
| verse_line2 = पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V07
| verse_id     = DDS_C01_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।
| verse_line2 = वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
| verse_lines  = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।;वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
| verse_line2 = वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V08
| verse_id     = DDS_C01_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।
| verse_line1 = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।
| verse_line2 = भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
| verse_lines  = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।;भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
| verse_line2 = भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V09
| verse_id     = DDS_C01_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।
| verse_line1 = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।
| verse_line2 = गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
| verse_lines  = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।;गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
| verse_line2 = गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V10
| verse_id     = DDS_C01_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।
| verse_line1 = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।
| verse_line2 = पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
| verse_lines  = स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।;पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
| verse_line2 = पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V11
| verse_id     = DDS_C01_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।
| verse_line1 = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।
| verse_line2 = भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
| verse_lines  = ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।;भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
| verse_line2 = भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C01_V12
| verse_id     = DDS_C01_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C01
| chapter_id   = DDS_C01
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।
| verse_line1 = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।
| verse_line2 = नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥
| verse_lines  = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।;नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥
| verse_line2 = नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C01
| id = DDS_C01_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C2" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="द्वितीयोध्यायः"></span>
== द्वितीयोध्यायः ==
== द्वितीयोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C02_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 2
| chapter_id   = DDS_C02
| title        = द्वितीयोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।;अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥
| verse_id = DDS_C02_V01
| verse_line2 = अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_line1 = सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।
| verse_line2 = अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V02
| verse_id     = DDS_C02_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।
| verse_line1 = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।
| verse_line2 = सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥
| verse_lines  = रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।;सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥
| verse_line2 = सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V03
| verse_id     = DDS_C02_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।
| verse_line1 = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।
| verse_line2 = अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥
| verse_lines  = चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।;अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥
| verse_line2 = अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V04
| verse_id     = DDS_C02_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।
| verse_line1 = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।
| verse_line2 = नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥
| verse_lines  = अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।;नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥
| verse_line2 = नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V05
| verse_id     = DDS_C02_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।
| verse_line1 = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।
| verse_line2 = सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥
| verse_lines  = वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।;सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥
| verse_line2 = सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V06
| verse_id     = DDS_C02_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।
| verse_line1 = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।
| verse_line2 = विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥
| verse_lines  = अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।;विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥
| verse_line2 = विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V07
| verse_id     = DDS_C02_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।
| verse_line1 = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।
| verse_line2 = अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥
| verse_lines  = आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।;अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥
| verse_line2 = अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V08
| verse_id     = DDS_C02_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।
| verse_line1 = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।
| verse_line2 = अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥
| verse_lines  = अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।;अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥
| verse_line2 = अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C02_V09
| verse_id     = DDS_C02_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C02
| chapter_id   = DDS_C02
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।
| verse_line1 = इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।
| verse_line2 = अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥
| verse_lines  = इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।;अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥
| verse_line2 = अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C02
| id = DDS_C02_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C3" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="तृतीयोध्यायः"></span>
== तृतीयोध्यायः ==
== तृतीयोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C03_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 3
| chapter_id   = DDS_C03
| title        = तृतीयोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।;हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥
| verse_id = DDS_C03_V01
| verse_line2 = हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_line1 = कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।
| verse_line2 = हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V02
| verse_id     = DDS_C03_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।
| verse_line1 = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।
| verse_line2 = तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥
| verse_lines  = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।;तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥
| verse_line2 = तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V03
| verse_id     = DDS_C03_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।
| verse_line1 = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।
| verse_line2 = स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥
| verse_lines  = यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।;स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥
| verse_line2 = स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V04
| verse_id     = DDS_C03_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।
| verse_line1 = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।
| verse_line2 = न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥
| verse_lines  = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।;न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥
| verse_line2 = न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V05
| verse_id     = DDS_C03_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।
| verse_line1 = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।
| verse_line2 = यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥
| verse_lines  = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।;यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥
| verse_line2 = यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V06
| verse_id     = DDS_C03_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।
| verse_line1 = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।
| verse_line2 = चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥
| verse_lines  = न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।;चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥
| verse_line2 = चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V07
| verse_id     = DDS_C03_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।
| verse_line1 = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।
| verse_line2 = बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥
| verse_lines  = व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।;बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥
| verse_line2 = बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V08
| verse_id     = DDS_C03_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।
| verse_line1 = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।
| verse_line2 = नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥
| verse_lines  = चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।;नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥
| verse_line2 = नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C03_V09
| verse_id     = DDS_C03_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C03
| chapter_id   = DDS_C03
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।
| verse_line2 = कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।;कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥
| verse_line2 = कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C03
| id = DDS_C03_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C4" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="चतुर्थोध्यायः"></span>
== चतुर्थोध्यायः ==
== चतुर्थोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C04_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 4
| chapter_id   = DDS_C04
| title        = चतुर्थोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।;अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥
| verse_id = DDS_C04_V01
| verse_line2 = अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_line1 = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
| verse_line2 = अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V02
| verse_id     = DDS_C04_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।
| verse_line1 = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।
| verse_line2 = स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥
| verse_lines  = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।;स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥
| verse_line2 = स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V03
| verse_id     = DDS_C04_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
| verse_line1 = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
| verse_line2 = सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥
| verse_lines  = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।;सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥
| verse_line2 = सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V04
| verse_id     = DDS_C04_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।
| verse_line1 = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।
| verse_line2 = विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥
| verse_lines  = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।;विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥
| verse_line2 = विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V05
| verse_id     = DDS_C04_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।
| verse_line1 = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।
| verse_line2 = बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥
| verse_lines  = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।;बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥
| verse_line2 = बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V06
| verse_id     = DDS_C04_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।
| verse_line1 = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।
| verse_line2 = सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥
| verse_lines  = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।;सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥
| verse_line2 = सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V07
| verse_id     = DDS_C04_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।
| verse_line1 = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।
| verse_line2 = क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥
| verse_lines  = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।;क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥
| verse_line2 = क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C04_V08
| verse_id     = DDS_C04_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C04
| chapter_id   = DDS_C04
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।
| verse_line1 = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।
| verse_line2 = सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥
| verse_lines  = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।;सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥
| verse_line2 = सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C04
| id = DDS_C04_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C5" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="पञ्चमोध्यायः"></span>
== पञ्चमोध्यायः ==
== पञ्चमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C05_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 5
| chapter_id   = DDS_C05
| title        = पञ्चमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।;धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
| verse_id = DDS_C05_V01
| verse_line2 = धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_line1 = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।
| verse_line2 = धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V02
| verse_id     = DDS_C05_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।
| verse_line1 = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।
| verse_line2 = केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
| verse_lines  = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।;केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
| verse_line2 = केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V03
| verse_id     = DDS_C05_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।
| verse_line1 = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।
| verse_line2 = माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
| verse_lines  = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।;माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
| verse_line2 = माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V04
| verse_id     = DDS_C05_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।
| verse_line1 = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।
| verse_line2 = विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
| verse_lines  = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।;विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
| verse_line2 = विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V05
| verse_id     = DDS_C05_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।
| verse_line1 = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।
| verse_line2 = त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
| verse_lines  = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।;त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
| verse_line2 = त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V06
| verse_id     = DDS_C05_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।
| verse_line1 = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।
| verse_line2 = श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
| verse_lines  = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।;श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
| verse_line2 = श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V07
| verse_id     = DDS_C05_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।
| verse_line1 = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।
| verse_line2 = पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
| verse_lines  = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।;पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।;दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥
| verse_line3 = दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥
| verse_line2  = पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C05_V08
| verse_id     = DDS_C05_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C05
| chapter_id   = DDS_C05
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।
| verse_line2 = परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।;परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
| verse_line2 = परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C05
| id = DDS_C05_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C6" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="षष्ठोध्यायः"></span>
== षष्ठोध्यायः ==
== षष्ठोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C06_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 6
| chapter_id   = DDS_C06
| title        = षष्ठोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।;कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥
| verse_id = DDS_C06_V01
| verse_line2 = कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_line1 = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।
| verse_line2 = कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V02
| verse_id     = DDS_C06_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।
| verse_line1 = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।
| verse_line2 = देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥
| verse_lines  = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।;देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥
| verse_line2 = देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V03
| verse_id     = DDS_C06_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।
| verse_line1 = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।
| verse_line2 = राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥
| verse_lines  = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।;राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥
| verse_line2 = राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V04
| verse_id     = DDS_C06_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।
| verse_line1 = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।
| verse_line2 = देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥
| verse_lines  = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।;देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥
| verse_line2 = देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V05
| verse_id     = DDS_C06_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।
| verse_line1 = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।
| verse_line2 = कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥
| verse_lines  = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।;कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥
| verse_line2 = कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V06
| verse_id     = DDS_C06_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।
| verse_line1 = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।
| verse_line2 = इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥
| verse_lines  = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।;इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥
| verse_line2 = इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V07
| verse_id     = DDS_C06_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।
| verse_line1 = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।
| verse_line2 = दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥
| verse_lines  = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।;दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥
| verse_line2 = दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V08
| verse_id     = DDS_C06_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।
| verse_line1 = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।
| verse_line2 = नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥
| verse_lines  = दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।;नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥
| verse_line2 = नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C06_V09
| verse_id     = DDS_C06_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C06
| chapter_id   = DDS_C06
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।
| verse_line2 = पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।;पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥
| verse_line2 = पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C06
| id = DDS_C06_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C7" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="सप्तमोध्यायः"></span>
== सप्तमोध्यायः ==
== सप्तमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C07_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 7
| chapter_id   = DDS_C07
| title        = सप्तमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।;यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥
| verse_id = DDS_C07_V01
| verse_line2 = यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_line1 = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।
| verse_line2 = यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V02
| verse_id     = DDS_C07_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥
| verse_lines  = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V03
| verse_id     = DDS_C07_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥
| verse_lines  = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥
| verse_line2 = आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V04
| verse_id     = DDS_C07_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥
| verse_lines  = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥
| verse_line2 = आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V05
| verse_id     = DDS_C07_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥
| verse_lines  = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥
| verse_line2 = आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V06
| verse_id     = DDS_C07_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥
| verse_lines  = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥
| verse_line2 = आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V07
| verse_id     = DDS_C07_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥
| verse_lines  = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥
| verse_line2 = आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V08
| verse_id     = DDS_C07_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line1 = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।
| verse_line2 = आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥
| verse_lines  = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।;आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥
| verse_line2 = आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C07_V09
| verse_id     = DDS_C07_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C07
| chapter_id   = DDS_C07
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।
| verse_line2 = भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।;भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥
| verse_line2 = भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C07
| id = DDS_C07_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C8" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="अष्टमोध्यायः"></span>
== अष्टमोध्यायः ==
== अष्टमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C08_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 8
| chapter_id   = DDS_C08
| title        = अष्टमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।;इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥
| verse_id = DDS_C08_V01
| verse_line2  = इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_line1 = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।
| verse_line2 = इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V02
| verse_id     = DDS_C08_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।
| verse_line1 = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।
| verse_line2 = दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।
| verse_lines  = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।;दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥
| verse_line2  = दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V03
| verse_id     = DDS_C08_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।
| verse_line1 = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।
| verse_line2 = भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।
| verse_lines  = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।;भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥
| verse_line2  = भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V04
| verse_id     = DDS_C08_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।
| verse_line1 = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।
| verse_line2 = अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।
| verse_lines  = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।;अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥
| verse_line2  = अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V05
| verse_id     = DDS_C08_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।
| verse_line1 = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।
| verse_line2 = सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।
| verse_lines  = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।;सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥
| verse_line2  = सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V06
| verse_id     = DDS_C08_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।
| verse_line1 = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।
| verse_line2 = नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।
| verse_lines  = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।;नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥
| verse_line2  = नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V07
| verse_id     = DDS_C08_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।
| verse_line1 = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।
| verse_line2 = उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।
| verse_lines  = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।;उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥
| verse_line2  = उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V08
| verse_id     = DDS_C08_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।
| verse_line1 = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।
| verse_line2 = उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।
| verse_lines  = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।;उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥
| verse_line2  = उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V09
| verse_id     = DDS_C08_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।
| verse_line1 = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।
| verse_line2 = पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।
| verse_lines  = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।;पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥
| verse_line2  = पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V10
| verse_id     = DDS_C08_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।
| verse_line1 = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।
| verse_line2 = शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।
| verse_lines  = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।;शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥
| verse_line2  = शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V11
| verse_id     = DDS_C08_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।
| verse_line1 = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।
| verse_line2 = अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।
| verse_lines  = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।;अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥
| verse_line2  = अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C08_V12
| verse_id     = DDS_C08_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C08
| chapter_id   = DDS_C08
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।
| verse_line1 = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।
| verse_line2 = मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।
| verse_lines  = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।;मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।;प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥
| verse_line3 = प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥
| verse_line2  = मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C08
| id = DDS_C08_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C9" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="नवमोध्यायः"></span>
== नवमोध्यायः ==
== नवमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C09_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 9
| chapter_id   = DDS_C09
| title        = नवमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥
| verse_id = DDS_C09_V01
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_line1 = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V02
| verse_id     = DDS_C09_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥
| verse_lines  = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V03
| verse_id     = DDS_C09_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥
| verse_lines  = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V04
| verse_id     = DDS_C09_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥
| verse_lines  = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V05
| verse_id     = DDS_C09_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥
| verse_lines  = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V06
| verse_id     = DDS_C09_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥
| verse_lines  = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V07
| verse_id     = DDS_C09_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥
| verse_lines  = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V08
| verse_id     = DDS_C09_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥
| verse_lines  = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V09
| verse_id     = DDS_C09_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥
| verse_lines  = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V10
| verse_id     = DDS_C09_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥
| verse_lines  = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V11
| verse_id     = DDS_C09_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥
| verse_lines  = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V12
| verse_id     = DDS_C09_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥
| verse_lines  = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V13
| verse_id     = DDS_C09_V13
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥
| verse_lines  = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V14
| verse_id     = DDS_C09_V14
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥
| verse_lines  = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V15
| verse_id     = DDS_C09_V15
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।
| verse_line1 = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥
| verse_lines  = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C09_V16
| verse_id     = DDS_C09_V16
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C09
| chapter_id   = DDS_C09
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।
| verse_line1 = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥
| verse_lines  = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।;शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥
| verse_line2 = शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे नवमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C09
| id = DDS_C09_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे नवमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C10" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="दशमोध्यायः"></span>
== दशमोध्यायः ==
== दशमोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C10_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 10
| chapter_id   = DDS_C10
| title        = दशमोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥
| verse_id = DDS_C10_V01
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_line1 = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V02
| verse_id     = DDS_C10_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।
| verse_line1 = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥
| verse_lines  = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V03
| verse_id     = DDS_C10_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।
| verse_line1 = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥
| verse_lines  = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V04
| verse_id     = DDS_C10_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।
| verse_line1 = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥
| verse_lines  = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V05
| verse_id     = DDS_C10_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।
| verse_line1 = त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥
| verse_lines  = त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V06
| verse_id     = DDS_C10_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।
| verse_line1 = शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥
| verse_lines  = शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V07
| verse_id     = DDS_C10_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।
| verse_line1 = मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥
| verse_lines  = मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V08
| verse_id     = DDS_C10_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।
| verse_line1 = तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥
| verse_lines  = तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V09
| verse_id     = DDS_C10_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।
| verse_line1 = सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥
| verse_lines  = सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V10
| verse_id     = DDS_C10_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।
| verse_line1 = खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥
| verse_lines  = खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V11
| verse_id     = DDS_C10_V11
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।
| verse_line1 = इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥
| verse_lines  = इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V12
| verse_id     = DDS_C10_V12
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।
| verse_line1 = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥
| verse_lines  = असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V13
| verse_id     = DDS_C10_V13
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।
| verse_line1 = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥
| verse_lines  = शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V14
| verse_id     = DDS_C10_V14
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।
| verse_line1 = जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥
| verse_lines  = जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V15
| verse_id     = DDS_C10_V15
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।
| verse_line1 = जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥
| verse_lines  = जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V16
| verse_id     = DDS_C10_V16
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।
| verse_line1 = दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥
| verse_lines  = दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V17
| verse_id     = DDS_C10_V17
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।
| verse_line1 = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥
| verse_lines  = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V18
| verse_id     = DDS_C10_V18
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।
| verse_line1 = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥
| verse_lines  = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।;करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥
| verse_line2 = करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C10_V19
| verse_id     = DDS_C10_V19
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C10
| chapter_id   = DDS_C10
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।
| verse_line1 = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।
| verse_line2 = कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥
| verse_lines  = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।;कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥
| verse_line2 = कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C10
| id = DDS_C10_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C11" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="एकादशोध्यायः"></span>
== एकादशोध्यायः ==
== एकादशोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C11_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 11
| chapter_id   = DDS_C11
| title        = एकादशोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥
| verse_id = DDS_C11_V01
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_line1 = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V02
| verse_id     = DDS_C11_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।
| verse_line1 = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥
| verse_lines  = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V03
| verse_id     = DDS_C11_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।
| verse_line1 = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥
| verse_lines  = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V04
| verse_id     = DDS_C11_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।
| verse_line1 = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥
| verse_lines  = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V05
| verse_id     = DDS_C11_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।
| verse_line1 = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥
| verse_lines  = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V06
| verse_id     = DDS_C11_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।
| verse_line1 = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥
| verse_lines  = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V07
| verse_id     = DDS_C11_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।
| verse_line1 = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥
| verse_lines  = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V08
| verse_id     = DDS_C11_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।
| verse_line1 = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥
| verse_lines  = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।;आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥
| verse_line2 = आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C11_V09
| verse_id     = DDS_C11_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C11
| chapter_id   = DDS_C11
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।
| verse_line1 = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।
| verse_line2 = कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥
| verse_lines  = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।;कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥
| verse_line2 = कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥
}}
}}


{{Bhashyam
<div class="gr-author-note">इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः ।</div>
| verse_id = DDS_C11
| id = DDS_C11_author_note
| text =
 
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः ।
| extra_class = gr-author-note
}}


<span id="gr-C12" class="gr-toc-anchor" data-level="1" data-title="द्वादशोध्यायः"></span>
== द्वादशोध्यायः ==
== द्वादशोध्यायः ==
{{Adhyaya
{{VerseBlock
| verse_id    = DDS_C12_V01
| document_id  = DDS
| document_id  = DDS
| chapter_num  = 12
| chapter_id   = DDS_C12
| title        = द्वादशोध्यायः
| verse_type   = shloka
}}
| verse_line1 = आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।
{{VerseBlock
| verse_lines  = आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥
| verse_id = DDS_C12_V01
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_line1 = आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V02
| verse_id     = DDS_C12_V02
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।
| verse_line1 = सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥
| verse_lines  = सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V03
| verse_id     = DDS_C12_V03
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।
| verse_line1 = चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥
| verse_lines  = चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V04
| verse_id     = DDS_C12_V04
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line1 = चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥
| verse_lines  = चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V05
| verse_id     = DDS_C12_V05
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥
| verse_lines  = मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V06
| verse_id     = DDS_C12_V06
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line1 = वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥
| verse_lines  = वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V07
| verse_id     = DDS_C12_V07
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।
| verse_line1 = मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥
| verse_lines  = मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V08
| verse_id     = DDS_C12_V08
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।
| verse_line1 = मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥
| verse_lines  = मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V09
| verse_id     = DDS_C12_V09
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।
| verse_line1 = इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥
| verse_lines  = इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥
}}
}}


{{VerseBlock
{{VerseBlock
| verse_id = DDS_C12_V10
| verse_id     = DDS_C12_V10
| document_id = DDS
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
| chapter_id   = DDS_C12
| verse_type = mantra
| verse_type   = shloka
| verse_line1 = आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।
| verse_line1 = आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।
| verse_line2 = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥
| verse_lines  = आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।;आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥
}}
| verse_line2  = आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥
 
{{VerseBlock
| document_id = DDS
| chapter_id = DDS_C12
}}
}}



Latest revision as of 10:45, 4 June 2026

द्वादशस्तोत्रम्

प्रथमाध्यायः

वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥


नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥


जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥


उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥


स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥


शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥


सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥


स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥


पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥


स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥


ध्यायेदजस्रमीशस्य पद्मजादिप्रतीक्षितम् ।भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥


सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे प्रथमोध्यायः ।

द्वितीयोध्यायः

सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥


रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥


चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥


अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥


वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥


अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥


आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥


अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥


इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे द्वितीयोध्यायः ।

तृतीयोध्यायः

कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥


न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥


यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥


श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥


यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥


न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥


व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥


चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥


आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे तृतीयोध्यायः ।

चतुर्थोध्यायः

निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥


यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥


बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥


स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥


विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥


स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥


परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥


इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे चतुर्थोध्यायः ।

पञ्चमोध्यायः

वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥


अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥


नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥


गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥


मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥


वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥


हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।


आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे पञ्चमोध्यायः ।

षष्ठोध्यायः

मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥


सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥


वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥


राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥


देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥


इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥


चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥


दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥


आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे षष्ठोध्यायः ।

सप्तमोध्यायः

विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥


ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥


धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥


षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥


शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥


शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥


तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥


नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥


आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे सप्तमोध्यायः ।

अष्टमोध्यायः

वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।


सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।


उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।


विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।


अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।


पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।


अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।


अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।


धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।


सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।


अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।


नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे अष्टमोध्यायः ।

नवमोध्यायः

अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥


विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥


अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥


अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥


प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥


सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥


सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥


अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥


बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥


अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥


खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥


सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥


दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥


कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥


अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥


इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे नवमोध्यायः ।

दशमोध्यायः

अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥


सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥


सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥


त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥


त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥


शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥


मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥


तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥


सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥


खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥


इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥


असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥


शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥


जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥


जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥


दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥


परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥


निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥


परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे दशमोध्यायः ।

एकादशोध्यायः

उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥


सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥


सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥


उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥


इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥


दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥


दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥


पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥


आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥


इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचिते द्वादशस्तोत्रे एकादशोध्यायः ।

द्वादशोध्यायः

आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥


सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥


चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥


चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥


मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥


वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥


मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥


मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥


इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥


आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥