Yatipranavavakalpa: Difference between revisions

Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3)
 
Line 8: Line 8:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = समिच्चर्वाज्यकान्हुत्वा सम्यक्पुरुषसूक्ततः ।
| verse_line1  = समिच्चर्वाज्यकान्हुत्वा सम्यक्पुरुषसूक्ततः ।
| verse_lines  = समिच्चर्वाज्यकान्हुत्वा सम्यक्पुरुषसूक्ततः ।;सर्वेषामभयं दत्वा विरक्तः प्रव्रजेद्धरिम्॥ १॥
| verse_line2  = सर्वेषामभयं दत्वा विरक्तः प्रव्रजेद्धरिम्॥ १॥
| verse_line2  = सर्वेषामभयं दत्वा विरक्तः प्रव्रजेद्धरिम्॥ १॥
}}
}}
Line 17: Line 18:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = श्रुत्वा भागवतं शुद्धमाचार्यं शरणं व्रजेत् ।
| verse_line1  = श्रुत्वा भागवतं शुद्धमाचार्यं शरणं व्रजेत् ।
| verse_lines  = श्रुत्वा भागवतं शुद्धमाचार्यं शरणं व्रजेत् ।;अधीहि भगवो ब्रह्मेत्यस्मै ब्रूयाद्गुरुः परम्॥ २॥
| verse_line2  = अधीहि भगवो ब्रह्मेत्यस्मै ब्रूयाद्गुरुः परम्॥ २॥
| verse_line2  = अधीहि भगवो ब्रह्मेत्यस्मै ब्रूयाद्गुरुः परम्॥ २॥
}}
}}
Line 26: Line 28:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = उच्चारयेत्त्रिशस्तारं दक्षिणे श्रवणे तथा ।
| verse_line1  = उच्चारयेत्त्रिशस्तारं दक्षिणे श्रवणे तथा ।
| verse_lines  = उच्चारयेत्त्रिशस्तारं दक्षिणे श्रवणे तथा ।;ऋषिच्छन्दोदैवतानि ब्रूयात्तस्य क्रमात्सुधीः॥ ३॥
| verse_line2  = ऋषिच्छन्दोदैवतानि ब्रूयात्तस्य क्रमात्सुधीः॥ ३॥
| verse_line2  = ऋषिच्छन्दोदैवतानि ब्रूयात्तस्य क्रमात्सुधीः॥ ३॥
}}
}}
Line 35: Line 38:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = अन्तर्यामीति गायत्री परमात्मेत्यनुक्रमात् ।
| verse_line1  = अन्तर्यामीति गायत्री परमात्मेत्यनुक्रमात् ।
| verse_lines  = अन्तर्यामीति गायत्री परमात्मेत्यनुक्रमात् ।;विश्वश्च तैजसः प्राज्ञस्तुर्यश्चाक्षरदेवताः॥ ४॥
| verse_line2  = विश्वश्च तैजसः प्राज्ञस्तुर्यश्चाक्षरदेवताः॥ ४॥
| verse_line2  = विश्वश्च तैजसः प्राज्ञस्तुर्यश्चाक्षरदेवताः॥ ४॥
}}
}}
Line 44: Line 48:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = कृष्णो रामो नृसिंहश्च वराहो विष्णुरेव च ।
| verse_line1  = कृष्णो रामो नृसिंहश्च वराहो विष्णुरेव च ।
| verse_lines  = कृष्णो रामो नृसिंहश्च वराहो विष्णुरेव च ।;परञ्ज्योतिः परम्ब्रह्म वासुदेव इति क्रमात्॥ ५॥
| verse_line2  = परञ्ज्योतिः परम्ब्रह्म वासुदेव इति क्रमात्॥ ५॥
| verse_line2  = परञ्ज्योतिः परम्ब्रह्म वासुदेव इति क्रमात्॥ ५॥
}}
}}
Line 53: Line 58:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = अकारादेस्तथा शान्तातिशान्तान्तस्य देवताः ।
| verse_line1  = अकारादेस्तथा शान्तातिशान्तान्तस्य देवताः ।
| verse_lines  = अकारादेस्तथा शान्तातिशान्तान्तस्य देवताः ।;एवमुक्त्वा तु तद्ध्यानं ब्रूयाच्छिष्याय सद्गुरुः॥ ६॥
| verse_line2  = एवमुक्त्वा तु तद्ध्यानं ब्रूयाच्छिष्याय सद्गुरुः॥ ६॥
| verse_line2  = एवमुक्त्वा तु तद्ध्यानं ब्रूयाच्छिष्याय सद्गुरुः॥ ६॥
}}
}}
Line 62: Line 68:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = अष्टपत्रे तु हृत्पद्मे मध्ये सूर्येन्दुवह्निगम् ।
| verse_line1  = अष्टपत्रे तु हृत्पद्मे मध्ये सूर्येन्दुवह्निगम् ।
| verse_lines  = अष्टपत्रे तु हृत्पद्मे मध्ये सूर्येन्दुवह्निगम् ।;पीठं तत्पद्ममध्यस्थं नारायणमनामयम्॥ ७॥
| verse_line2  = पीठं तत्पद्ममध्यस्थं नारायणमनामयम्॥ ७॥
| verse_line2  = पीठं तत्पद्ममध्यस्थं नारायणमनामयम्॥ ७॥
}}
}}
Line 71: Line 78:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = उद्यदादित्यसङ्काशं तेजसानुपमं सदा ।
| verse_line1  = उद्यदादित्यसङ्काशं तेजसानुपमं सदा ।
| verse_lines  = उद्यदादित्यसङ्काशं तेजसानुपमं सदा ।;सहस्रेणापि सूर्याणां सञ्ज्ञानानन्दरूपिणम्॥ ८॥
| verse_line2  = सहस्रेणापि सूर्याणां सञ्ज्ञानानन्दरूपिणम्॥ ८॥
| verse_line2  = सहस्रेणापि सूर्याणां सञ्ज्ञानानन्दरूपिणम्॥ ८॥
}}
}}
Line 80: Line 88:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = अतिरक्ततलं भास्वन्नखव्रातविभूषितम् वृत्तजङ्घं वृत्तजानुं हस्तिहस्तोरुमीश्वरम्॥ ९॥
| verse_line1  = अतिरक्ततलं भास्वन्नखव्रातविभूषितम् वृत्तजङ्घं वृत्तजानुं हस्तिहस्तोरुमीश्वरम्॥ ९॥
| verse_lines  = अतिरक्ततलं भास्वन्नखव्रातविभूषितम् वृत्तजङ्घं वृत्तजानुं हस्तिहस्तोरुमीश्वरम्॥ ९॥
}}
}}


Line 88: Line 97:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = महाकटितटाबद्धकाञ्चीपीताम्बरोज्ज्वलम् ।
| verse_line1  = महाकटितटाबद्धकाञ्चीपीताम्बरोज्ज्वलम् ।
| verse_lines  = महाकटितटाबद्धकाञ्चीपीताम्बरोज्ज्वलम् ।;सुनिम्ननाभिं त्रिवलिं सुवृत्तोदरबन्धनम्॥ १०॥
| verse_line2  = सुनिम्ननाभिं त्रिवलिं सुवृत्तोदरबन्धनम्॥ १०॥
| verse_line2  = सुनिम्ननाभिं त्रिवलिं सुवृत्तोदरबन्धनम्॥ १०॥
}}
}}
Line 97: Line 107:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = विशालवक्षसं भ्राजत्कौस्तुभामुक्तकन्धरम् ।
| verse_line1  = विशालवक्षसं भ्राजत्कौस्तुभामुक्तकन्धरम् ।
| verse_lines  = विशालवक्षसं भ्राजत्कौस्तुभामुक्तकन्धरम् ।;वनमालाधरं हारवैजयन्त्यादिभिर्युतम्॥ ११॥
| verse_line2  = वनमालाधरं हारवैजयन्त्यादिभिर्युतम्॥ ११॥
| verse_line2  = वनमालाधरं हारवैजयन्त्यादिभिर्युतम्॥ ११॥
}}
}}
Line 106: Line 117:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = पृथुदीर्घचतुर्बाहुं शङ्खचक्रगदाम्बुजैः ।
| verse_line1  = पृथुदीर्घचतुर्बाहुं शङ्खचक्रगदाम्बुजैः ।
| verse_lines  = पृथुदीर्घचतुर्बाहुं शङ्खचक्रगदाम्बुजैः ।;युक्तमुन्निद्रपद्माक्षं स्फुरन्मकरकुण्डलम्॥ १२॥
| verse_line2  = युक्तमुन्निद्रपद्माक्षं स्फुरन्मकरकुण्डलम्॥ १२॥
| verse_line2  = युक्तमुन्निद्रपद्माक्षं स्फुरन्मकरकुण्डलम्॥ १२॥
}}
}}
Line 115: Line 127:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = पूर्णचन्द्रायुतोद्रिक्तकान्तिमन्मुखपङ्कजम् ।
| verse_line1  = पूर्णचन्द्रायुतोद्रिक्तकान्तिमन्मुखपङ्कजम् ।
| verse_lines  = पूर्णचन्द्रायुतोद्रिक्तकान्तिमन्मुखपङ्कजम् ।;सुभ्रुवं सुललाटान्तं किरीटाबद्धमूर्धजम्॥ १३॥
| verse_line2  = सुभ्रुवं सुललाटान्तं किरीटाबद्धमूर्धजम्॥ १३॥
| verse_line2  = सुभ्रुवं सुललाटान्तं किरीटाबद्धमूर्धजम्॥ १३॥
}}
}}
Line 124: Line 137:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = निःशेषदुःखदमनं नित्यानन्दशुचिस्मितम् ।
| verse_line1  = निःशेषदुःखदमनं नित्यानन्दशुचिस्मितम् ।
| verse_lines  = निःशेषदुःखदमनं नित्यानन्दशुचिस्मितम् ।;विश्वादींश्चैव कृष्णादीनेवं भूतान्सनातनान्॥ १४॥
| verse_line2  = विश्वादींश्चैव कृष्णादीनेवं भूतान्सनातनान्॥ १४॥
| verse_line2  = विश्वादींश्चैव कृष्णादीनेवं भूतान्सनातनान्॥ १४॥
}}
}}
Line 133: Line 147:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = अभिन्नानेव सततं तस्माद्विष्णोः परात्मनः ।
| verse_line1  = अभिन्नानेव सततं तस्माद्विष्णोः परात्मनः ।
| verse_lines  = अभिन्नानेव सततं तस्माद्विष्णोः परात्मनः ।;वराभयोद्यतकरान्नित्यानन्दैकरूपिणः॥ १५॥
| verse_line2  = वराभयोद्यतकरान्नित्यानन्दैकरूपिणः॥ १५॥
| verse_line2  = वराभयोद्यतकरान्नित्यानन्दैकरूपिणः॥ १५॥
}}
}}
Line 142: Line 157:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = एवमुक्त्वा गुरुर्ध्यानं शपथं कारयेत्ततः ।
| verse_line1  = एवमुक्त्वा गुरुर्ध्यानं शपथं कारयेत्ततः ।
| verse_lines  = एवमुक्त्वा गुरुर्ध्यानं शपथं कारयेत्ततः ।;न विष्णुं वैष्णवांश्चैव विसृजेयमिति त्रिशः॥ १६॥
| verse_line2  = न विष्णुं वैष्णवांश्चैव विसृजेयमिति त्रिशः॥ १६॥
| verse_line2  = न विष्णुं वैष्णवांश्चैव विसृजेयमिति त्रिशः॥ १६॥
}}
}}
Line 151: Line 167:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = न चान्यदेवतासाम्यं तदैक्यमथवा हरेः ।
| verse_line1  = न चान्यदेवतासाम्यं तदैक्यमथवा हरेः ।
| verse_lines  = न चान्यदेवतासाम्यं तदैक्यमथवा हरेः ।;चिन्तयेयं मृतो वापि न चाप्येकत्ववादिभिः॥ १७॥
| verse_line2  = चिन्तयेयं मृतो वापि न चाप्येकत्ववादिभिः॥ १७॥
| verse_line2  = चिन्तयेयं मृतो वापि न चाप्येकत्ववादिभिः॥ १७॥
}}
}}
Line 160: Line 177:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = समत्ववादिभिर्वाहं सङ्गच्छेयं कदाचन ।
| verse_line1  = समत्ववादिभिर्वाहं सङ्गच्छेयं कदाचन ।
| verse_lines  = समत्ववादिभिर्वाहं सङ्गच्छेयं कदाचन ।;तन्निन्दकैश्च तद्भक्तनिन्दकैर्वा महामुने॥ १८॥
| verse_line2  = तन्निन्दकैश्च तद्भक्तनिन्दकैर्वा महामुने॥ १८॥
| verse_line2  = तन्निन्दकैश्च तद्भक्तनिन्दकैर्वा महामुने॥ १८॥
}}
}}
Line 169: Line 187:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = एवं कृते तु शपथे मस्तके हस्तपङ्कजम् ।
| verse_line1  = एवं कृते तु शपथे मस्तके हस्तपङ्कजम् ।
| verse_lines  = एवं कृते तु शपथे मस्तके हस्तपङ्कजम् ।;निधायोत्तीर्य संसारात्सुखी भव हरेः प्रियः॥ १९॥
| verse_line2  = निधायोत्तीर्य संसारात्सुखी भव हरेः प्रियः॥ १९॥
| verse_line2  = निधायोत्तीर्य संसारात्सुखी भव हरेः प्रियः॥ १९॥
}}
}}
Line 178: Line 197:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = सर्वदुःखादिभिर्मुक्तो नित्यानन्दैकरूपकः ।
| verse_line1  = सर्वदुःखादिभिर्मुक्तो नित्यानन्दैकरूपकः ।
| verse_lines  = सर्वदुःखादिभिर्मुक्तो नित्यानन्दैकरूपकः ।;सम्प्राप्य विष्णुसामीप्यं तत्रापि हरिभक्तिमान्॥ २०॥
| verse_line2  = सम्प्राप्य विष्णुसामीप्यं तत्रापि हरिभक्तिमान्॥ २०॥
| verse_line2  = सम्प्राप्य विष्णुसामीप्यं तत्रापि हरिभक्तिमान्॥ २०॥
}}
}}
Line 187: Line 207:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = भक्तिमांश्चान्यदेवेषु तारतम्यं च संस्मरन् ।
| verse_line1  = भक्तिमांश्चान्यदेवेषु तारतम्यं च संस्मरन् ।
| verse_lines  = भक्तिमांश्चान्यदेवेषु तारतम्यं च संस्मरन् ।;सर्वोत्कर्षं स्मरन्विष्णोर्भूयाश्चैव सदा सुखी॥ २१॥
| verse_line2  = सर्वोत्कर्षं स्मरन्विष्णोर्भूयाश्चैव सदा सुखी॥ २१॥
| verse_line2  = सर्वोत्कर्षं स्मरन्विष्णोर्भूयाश्चैव सदा सुखी॥ २१॥
}}
}}
Line 196: Line 217:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = न मुक्तौ विष्णुनैक्यं वा मुक्तानां साम्यमेव वा ।
| verse_line1  = न मुक्तौ विष्णुनैक्यं वा मुक्तानां साम्यमेव वा ।
| verse_lines  = न मुक्तौ विष्णुनैक्यं वा मुक्तानां साम्यमेव वा ।;स्मरेथा इति चोक्त्वाथ समयाननुशिक्षयेत्॥ २२॥
| verse_line2  = स्मरेथा इति चोक्त्वाथ समयाननुशिक्षयेत्॥ २२॥
| verse_line2  = स्मरेथा इति चोक्त्वाथ समयाननुशिक्षयेत्॥ २२॥
}}
}}
Line 205: Line 227:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = नित्यशश्च हरेः पूजा जपध्यानसमर्पणम् ।
| verse_line1  = नित्यशश्च हरेः पूजा जपध्यानसमर्पणम् ।
| verse_lines  = नित्यशश्च हरेः पूजा जपध्यानसमर्पणम् ।;कर्तव्यं तु त्वया वत्स जपश्च त्रिसहस्रकः॥ २३॥
| verse_line2  = कर्तव्यं तु त्वया वत्स जपश्च त्रिसहस्रकः॥ २३॥
| verse_line2  = कर्तव्यं तु त्वया वत्स जपश्च त्रिसहस्रकः॥ २३॥
}}
}}
Line 214: Line 237:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = मध्यमः प्रणवस्योक्तो योवरः स सहस्रकः ।
| verse_line1  = मध्यमः प्रणवस्योक्तो योवरः स सहस्रकः ।
| verse_lines  = मध्यमः प्रणवस्योक्तो योवरः स सहस्रकः ।;त्रिसहस्रात्परो यस्तु स उत्तमजपः ---स्मृतः॥ २४॥
| verse_line2  = त्रिसहस्रात्परो यस्तु स उत्तमजपः ---स्मृतः॥ २४॥
| verse_line2  = त्रिसहस्रात्परो यस्तु स उत्तमजपः ---स्मृतः॥ २४॥
}}
}}
Line 223: Line 247:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = आत्मानं प्रतिबिम्बत्वे ध्यायन् बिम्बं जनार्दनम् ।
| verse_line1  = आत्मानं प्रतिबिम्बत्वे ध्यायन् बिम्बं जनार्दनम् ।
| verse_lines  = आत्मानं प्रतिबिम्बत्वे ध्यायन् बिम्बं जनार्दनम् ।;ध्यायस्व सततं वत्स सपर्यां नित्यशः कुरु॥ २५॥
| verse_line2  = ध्यायस्व सततं वत्स सपर्यां नित्यशः कुरु॥ २५॥
| verse_line2  = ध्यायस्व सततं वत्स सपर्यां नित्यशः कुरु॥ २५॥
}}
}}
Line 232: Line 257:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = मानसैर्वाथ पुष्पैर्वा प्रणवेन समाहितः ।
| verse_line1  = मानसैर्वाथ पुष्पैर्वा प्रणवेन समाहितः ।
| verse_lines  = मानसैर्वाथ पुष्पैर्वा प्रणवेन समाहितः ।;अन्यांश्च वैष्णवान्मन्त्राञ्जपेथा भक्तिपूर्वकम्॥ २६॥
| verse_line2  = अन्यांश्च वैष्णवान्मन्त्राञ्जपेथा भक्तिपूर्वकम्॥ २६॥
| verse_line2  = अन्यांश्च वैष्णवान्मन्त्राञ्जपेथा भक्तिपूर्वकम्॥ २६॥
}}
}}
Line 241: Line 267:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = शृृणुष्व वैष्णवं शास्त्रं सदा वेदार्थतत्परः ।
| verse_line1  = शृृणुष्व वैष्णवं शास्त्रं सदा वेदार्थतत्परः ।
| verse_lines  = शृृणुष्व वैष्णवं शास्त्रं सदा वेदार्थतत्परः ।;वेदान्मन्त्रानुपनिषत्सहितान्सर्वदा शृृणु॥ २७॥
| verse_line2  = वेदान्मन्त्रानुपनिषत्सहितान्सर्वदा शृृणु॥ २७॥
| verse_line2  = वेदान्मन्त्रानुपनिषत्सहितान्सर्वदा शृृणु॥ २७॥
}}
}}
Line 250: Line 277:
| verse_type  = shloka
| verse_type  = shloka
| verse_line1  = इतिहासपुराणं च पञ्चरात्रं तथैव च ।
| verse_line1  = इतिहासपुराणं च पञ्चरात्रं तथैव च ।
| verse_lines  = इतिहासपुराणं च पञ्चरात्रं तथैव च ।;तदर्थान् ब्रह्मसूत्रैश्च सम्यङ्निर्णीय तत्त्वतः ।;विष्णोः सर्वोत्तमत्त्वं च सर्वदा प्रतिपादय॥ २८॥
| verse_line2  = तदर्थान् ब्रह्मसूत्रैश्च सम्यङ्निर्णीय तत्त्वतः ।
| verse_line2  = तदर्थान् ब्रह्मसूत्रैश्च सम्यङ्निर्णीय तत्त्वतः ।
}}
}}