Vadavali: Difference between revisions
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| verse_type = shloka | | verse_type = shloka | ||
| verse_line1 = नमोऽगणितकल्याणगुणपूर्णाय विष्णवे। | | verse_line1 = नमोऽगणितकल्याणगुणपूर्णाय विष्णवे। | ||
| verse_lines = नमोऽगणितकल्याणगुणपूर्णाय विष्णवे।;सत्याशेषजगज्जन्मपूर्वकर्त्र मुरद्विषे ।। 1 ।। | |||
| verse_line2 = सत्याशेषजगज्जन्मपूर्वकर्त्र मुरद्विषे ।। 1 ।। | | verse_line2 = सत्याशेषजगज्जन्मपूर्वकर्त्र मुरद्विषे ।। 1 ।। | ||
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| Line 21: | Line 22: | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_line1 = मूलम्--ननु कथं सत्यता जगतोऽङ्गीकाराधिकारिणी। विमतं मिथ्या दृश्यत्वाज्जडत्वात् परिच्छिन्नत्वाच्छुक्तिरजतवदित्यनुमानविरोधादिति। मैवम्। मिथ्यात्वानिरुक्तेः। | | verse_line1 = मूलम्--ननु कथं सत्यता जगतोऽङ्गीकाराधिकारिणी। विमतं मिथ्या दृश्यत्वाज्जडत्वात् परिच्छिन्नत्वाच्छुक्तिरजतवदित्यनुमानविरोधादिति। मैवम्। मिथ्यात्वानिरुक्तेः। | ||
| verse_lines = मूलम्--ननु कथं सत्यता जगतोऽङ्गीकाराधिकारिणी। विमतं मिथ्या दृश्यत्वाज्जडत्वात् परिच्छिन्नत्वाच्छुक्तिरजतवदित्यनुमानविरोधादिति। मैवम्। मिथ्यात्वानिरुक्तेः। | |||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_line1 = मूलम्-तत्किमनिर्वचनीयत्वं वा असत्त्वं वा सद्विविक्तत्वं वा प्रमाणाविषयत्वं वा अप्रमाणविषयत्वं वा अविद्यातत्कार्ययोरन्यरत्वं वा स्वात्यन्ताभावसमानाधिकरणतया प्रतीयमानत्वं वा। नाद्यः। विकल्पासहत्वात्।। | | verse_line1 = मूलम्-तत्किमनिर्वचनीयत्वं वा असत्त्वं वा सद्विविक्तत्वं वा प्रमाणाविषयत्वं वा अप्रमाणविषयत्वं वा अविद्यातत्कार्ययोरन्यरत्वं वा स्वात्यन्ताभावसमानाधिकरणतया प्रतीयमानत्वं वा। नाद्यः। विकल्पासहत्वात्।। | ||
| verse_lines = मूलम्-तत्किमनिर्वचनीयत्वं वा असत्त्वं वा सद्विविक्तत्वं वा प्रमाणाविषयत्वं वा अप्रमाणविषयत्वं वा अविद्यातत्कार्ययोरन्यरत्वं वा स्वात्यन्ताभावसमानाधिकरणतया प्रतीयमानत्वं वा। नाद्यः। विकल्पासहत्वात्।। | |||
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