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| verse_text = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् | | verse_text = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।¦इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥ | ||
| verse_lines = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।¦इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥ | | verse_lines = वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।¦इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥ | ||
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| verse_text = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् | | verse_text = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।¦हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥ | ||
| verse_lines = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।¦हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥ | | verse_lines = नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।¦हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥ | ||
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| verse_text = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः | | verse_text = जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।¦स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥ | ||
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| verse_text = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् | | verse_text = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।¦वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥ | ||
| verse_lines = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।¦वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥ | | verse_lines = उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।¦वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥ | ||
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| verse_text = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः | | verse_text = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।¦अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥ | ||
| verse_lines = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।¦अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥ | | verse_lines = स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।¦अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥ | ||
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| verse_text = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः | | verse_text = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।¦पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥ | ||
| verse_lines = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।¦पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥ | | verse_lines = शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।¦पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥ | ||
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| verse_text = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् | | verse_text = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।¦वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥ | ||
| verse_lines = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।¦वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥ | | verse_lines = सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।¦वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥ | ||
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| verse_text = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् | | verse_text = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।¦भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥ | ||
| verse_lines = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।¦भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥ | | verse_lines = स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।¦भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥ | ||
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| verse_text = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः | | verse_text = पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।¦गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥ | ||
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| verse_lines = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।¦नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥ | | verse_lines = सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।¦नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥ | ||
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| verse_text = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः | | verse_text = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।¦तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥ | ||
| verse_lines = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।¦तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥ | | verse_lines = न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।¦तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥ | ||
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| verse_text = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् | | verse_text = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।¦न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥ | ||
| verse_lines = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।¦न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥ | | verse_lines = श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।¦न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥ | ||
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| verse_text = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् | | verse_text = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।¦यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥ | ||
| verse_lines = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।¦यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥ | | verse_lines = यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।¦यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥ | ||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा | | verse_text = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।¦कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥ | ||
| verse_lines = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।¦कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥ | | verse_lines = आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।¦कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥ | ||
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| Line 246: | Line 247: | ||
| verse_id = DDS_C04_V01 | | verse_id = DDS_C04_V01 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः | | verse_text = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।¦अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥ | ||
| verse_lines = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।¦अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥ | | verse_lines = निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।¦अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥ | ||
}} | }} | ||
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| verse_id = DDS_C04_V02 | | verse_id = DDS_C04_V02 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः | | verse_text = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।¦स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥ | ||
| verse_lines = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।¦स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥ | | verse_lines = यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।¦स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥ | ||
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| verse_text = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः | | verse_text = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।¦सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥ | ||
| verse_lines = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।¦सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥ | | verse_lines = बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।¦सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥ | ||
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| verse_text = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् | | verse_text = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।¦विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥ | ||
| verse_lines = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।¦विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥ | | verse_lines = स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।¦विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥ | ||
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| verse_text = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् | | verse_text = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।¦बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥ | ||
| verse_lines = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।¦बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥ | | verse_lines = विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।¦बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥ | ||
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| verse_text = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् | | verse_text = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।¦सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥ | ||
| verse_lines = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।¦सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥ | | verse_lines = स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।¦सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥ | ||
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| verse_text = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च | | verse_text = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।¦क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥ | ||
| verse_lines = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।¦क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥ | | verse_lines = परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।¦क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥ | ||
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| verse_text = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः | | verse_text = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।¦सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥ | ||
| verse_lines = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।¦सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥ | | verse_lines = इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।¦सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥ | ||
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| verse_text = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त | | verse_text = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।¦धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥ | ||
| verse_lines = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।¦धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥ | | verse_lines = वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।¦धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥ | ||
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| verse_text = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा | | verse_text = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।¦केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥ | ||
| verse_lines = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।¦केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥ | | verse_lines = अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।¦केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥ | ||
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| verse_text = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य | | verse_text = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।¦माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥ | ||
| verse_lines = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।¦माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥ | | verse_lines = नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।¦माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥ | ||
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| verse_text = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद | | verse_text = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।¦विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥ | ||
| verse_lines = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।¦विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥ | | verse_lines = गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।¦विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥ | ||
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| verse_text = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद | | verse_text = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।¦त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥ | ||
| verse_lines = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।¦त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥ | | verse_lines = मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।¦त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥ | ||
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| verse_text = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो | | verse_text = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।¦श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥ | ||
| verse_lines = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।¦श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥ | | verse_lines = वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।¦श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥ | ||
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| verse_text = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश | | verse_text = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।¦पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।¦दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥ | ||
| verse_lines = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।¦पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।¦दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥ | | verse_lines = हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।¦पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।¦दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥ | ||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः | | verse_text = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।¦परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥ | ||
| verse_lines = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।¦परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥ | | verse_lines = आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।¦परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥ | ||
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| verse_text = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य | | verse_text = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।¦कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥ | ||
| verse_lines = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।¦कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥ | | verse_lines = मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।¦कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥ | ||
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| verse_text = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग | | verse_text = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।¦देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥ | ||
| verse_lines = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।¦देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥ | | verse_lines = सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।¦देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥ | ||
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| verse_text = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप | | verse_text = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।¦राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥ | ||
| verse_lines = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।¦राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥ | | verse_lines = वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।¦राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥ | ||
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| verse_text = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त | | verse_text = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।¦देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥ | ||
| verse_lines = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।¦देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥ | | verse_lines = राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।¦देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥ | ||
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| verse_text = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र | | verse_text = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।¦कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥ | ||
| verse_lines = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।¦कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥ | | verse_lines = देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।¦कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥ | ||
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| verse_text = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ | | verse_text = इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।¦इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥ | ||
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| verse_text = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण | | verse_text = चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।¦दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥ | ||
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| verse_text = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः | | verse_text = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।¦यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥ | ||
| verse_lines = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।¦यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥ | | verse_lines = विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।¦यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥ | ||
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| verse_text = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥ | ||
| verse_lines = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥ | | verse_lines = ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥ | ||
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| verse_text = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥ | ||
| verse_lines = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥ | | verse_lines = धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 470: | Line 471: | ||
| verse_id = DDS_C07_V04 | | verse_id = DDS_C07_V04 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥ | ||
| verse_lines = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥ | | verse_lines = षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 478: | Line 479: | ||
| verse_id = DDS_C07_V05 | | verse_id = DDS_C07_V05 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥ | ||
| verse_lines = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥ | | verse_lines = शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 486: | Line 487: | ||
| verse_id = DDS_C07_V06 | | verse_id = DDS_C07_V06 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥ | ||
| verse_lines = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥ | | verse_lines = शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥ | ||
}} | }} | ||
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| verse_id = DDS_C07_V07 | | verse_id = DDS_C07_V07 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥ | ||
| verse_lines = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥ | | verse_lines = तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥ | ||
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| Line 502: | Line 503: | ||
| verse_id = DDS_C07_V08 | | verse_id = DDS_C07_V08 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् | | verse_text = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥ | ||
| verse_lines = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥ | | verse_lines = नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।¦आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥ | ||
}} | }} | ||
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| verse_id = DDS_C07_V09 | | verse_id = DDS_C07_V09 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् | | verse_text = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।¦भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥ | ||
| verse_lines = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।¦भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥ | | verse_lines = आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।¦भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥ | ||
}} | }} | ||
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| verse_id = DDS_C08_V01 | | verse_id = DDS_C08_V01 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् | | verse_text = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।¦इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥ | ||
| verse_lines = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।¦इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥ | | verse_lines = वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।¦इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥ | ||
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| verse_id = DDS_C08_V02 | | verse_id = DDS_C08_V02 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् | | verse_text = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।¦दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥ | ||
| verse_lines = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।¦दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥ | | verse_lines = सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।¦दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 534: | Line 535: | ||
| verse_id = DDS_C08_V03 | | verse_id = DDS_C08_V03 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् | | verse_text = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।¦भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥ | ||
| verse_lines = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।¦भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥ | | verse_lines = उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।¦भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 542: | Line 543: | ||
| verse_id = DDS_C08_V04 | | verse_id = DDS_C08_V04 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् | | verse_text = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।¦अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥ | ||
| verse_lines = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।¦अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥ | | verse_lines = विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।¦अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 550: | Line 551: | ||
| verse_id = DDS_C08_V05 | | verse_id = DDS_C08_V05 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः | | verse_text = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।¦सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥ | ||
| verse_lines = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।¦सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥ | | verse_lines = अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।¦सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥ | ||
}} | }} | ||
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| verse_id = DDS_C08_V06 | | verse_id = DDS_C08_V06 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् | | verse_text = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।¦नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥ | ||
| verse_lines = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।¦नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥ | | verse_lines = पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।¦नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 566: | Line 567: | ||
| verse_id = DDS_C08_V07 | | verse_id = DDS_C08_V07 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि | | verse_text = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।¦उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥ | ||
| verse_lines = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।¦उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥ | | verse_lines = अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।¦उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 574: | Line 575: | ||
| verse_id = DDS_C08_V08 | | verse_id = DDS_C08_V08 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः | | verse_text = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।¦उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥ | ||
| verse_lines = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।¦उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥ | | verse_lines = अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।¦उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 582: | Line 583: | ||
| verse_id = DDS_C08_V09 | | verse_id = DDS_C08_V09 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् | | verse_text = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।¦पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥ | ||
| verse_lines = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।¦पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥ | | verse_lines = धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।¦पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥ | ||
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| Line 590: | Line 591: | ||
| verse_id = DDS_C08_V10 | | verse_id = DDS_C08_V10 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् | | verse_text = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।¦शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥ | ||
| verse_lines = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।¦शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥ | | verse_lines = सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।¦शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 598: | Line 599: | ||
| verse_id = DDS_C08_V11 | | verse_id = DDS_C08_V11 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः | | verse_text = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।¦अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥ | ||
| verse_lines = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।¦अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥ | | verse_lines = अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।¦अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 606: | Line 607: | ||
| verse_id = DDS_C08_V12 | | verse_id = DDS_C08_V12 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् | | verse_text = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।¦मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥ | ||
| verse_lines = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।¦मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥ | | verse_lines = नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।¦मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।¦प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 614: | Line 615: | ||
| verse_id = DDS_C09_V01 | | verse_id = DDS_C09_V01 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय | | verse_text = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ | ||
| verse_lines = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ | | verse_lines = अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 622: | Line 623: | ||
| verse_id = DDS_C09_V02 | | verse_id = DDS_C09_V02 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् | | verse_text = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥ | ||
| verse_lines = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥ | | verse_lines = विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 630: | Line 631: | ||
| verse_id = DDS_C09_V03 | | verse_id = DDS_C09_V03 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् | | verse_text = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ | ||
| verse_lines = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ | | verse_lines = अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥ | ||
}} | }} | ||
| Line 638: | Line 639: | ||
| verse_id = DDS_C09_V04 | | verse_id = DDS_C09_V04 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् | | verse_text = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ | ||
| verse_lines = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ | | verse_lines = अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥ | ||
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| verse_id = DDS_C09_V05 | | verse_id = DDS_C09_V05 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् | | verse_text = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥ | ||
| verse_lines = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥ | | verse_lines = प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥ | ||
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| verse_text = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् | | verse_text = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥ | ||
| verse_lines = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥ | | verse_lines = सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥ | ||
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| verse_text = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् | | verse_text = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥ | ||
| verse_lines = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥ | | verse_lines = सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥ | ||
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| verse_text = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् | | verse_text = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥ | ||
| verse_lines = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥ | | verse_lines = अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥ | ||
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| verse_text = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् | | verse_text = बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥ | ||
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| verse_text = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् | | verse_text = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥ | ||
| verse_lines = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥ | | verse_lines = अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥ | ||
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| verse_text = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् | | verse_text = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥ | ||
| verse_lines = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥ | | verse_lines = खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥ | ||
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| verse_text = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् | | verse_text = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥ | ||
| verse_lines = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥ | | verse_lines = सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥ | ||
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| verse_text = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् | | verse_text = दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥ | ||
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| verse_text = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् | | verse_text = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥ | ||
| verse_lines = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥ | | verse_lines = कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥ | ||
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| verse_text = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् | | verse_text = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥ | ||
| verse_lines = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥ | | verse_lines = अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥ | ||
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| verse_text = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् | | verse_text = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥ | ||
| verse_lines = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥ | | verse_lines = इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।¦शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥ | ||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे | | verse_text = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥ | ||
| verse_lines = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥ | | verse_lines = अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥ | ||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् | | verse_text = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥ | ||
| verse_lines = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥ | | verse_lines = सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥ | ||
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| verse_text = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो | | verse_text = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥ | ||
| verse_lines = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥ | | verse_lines = सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥ | ||
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| verse_text = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो | | verse_text = त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥ | ||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो | | verse_text = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥ | ||
| verse_lines = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥ | | verse_lines = परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥ | ||
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| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे | | verse_text = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥ | ||
| verse_lines = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥ | | verse_lines = निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।¦करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥ | ||
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| Line 886: | Line 887: | ||
| verse_id = DDS_C10_V19 | | verse_id = DDS_C10_V19 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् | | verse_text = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।¦कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥ | ||
| verse_lines = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।¦कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥ | | verse_lines = परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।¦कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥ | ||
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| verse_id = DDS_C11_V01 | | verse_id = DDS_C11_V01 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः | | verse_text = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥ | ||
| verse_lines = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥ | | verse_lines = उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥ | ||
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| verse_id = DDS_C11_V02 | | verse_id = DDS_C11_V02 | ||
| verse_type = mantra | | verse_type = mantra | ||
| verse_text = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् | | verse_text = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥ | ||
| verse_lines = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥ | | verse_lines = सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥ | ||
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| verse_text = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः | | verse_text = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥ | ||
| verse_lines = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥ | | verse_lines = सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥ | ||
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| verse_text = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः | | verse_text = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥ | ||
| verse_lines = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥ | | verse_lines = उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥ | ||
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| verse_text = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् | | verse_text = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥ | ||
| verse_lines = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥ | | verse_lines = इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥ | ||
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| verse_text = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् | | verse_text = दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥ | ||
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| verse_lines = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥ | | verse_lines = दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥ | ||
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| verse_text = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः | | verse_text = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥ | ||
| verse_lines = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥ | | verse_lines = पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।¦आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥ | ||
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| verse_text = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः | | verse_text = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।¦कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥ | ||
| verse_lines = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।¦कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥ | | verse_lines = आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।¦कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥ | ||
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