Bhagavatatatparyanirnaya/C1/S12: Difference between revisions
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| title = द्वादशोऽध्यायः | | title = द्वादशोऽध्यायः | ||
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| verse_id = BTN_C01_S12_V05 | | verse_id = BTN_C01_S12_V05 | ||
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| verse_line1 = प्रत्युज्जग्मुः प्रहर्षेण प्राणांस्तन्व इवाऽगतान् । | | verse_line1 = प्रत्युज्जग्मुः प्रहर्षेण प्राणांस्तन्व इवाऽगतान् । | ||
| verse_line2 = अभिसङ्गम्य विधिवत्परिष्वङ्गाभिवन्दनैः ॥ ५ ॥ | | verse_line2 = अभिसङ्गम्य विधिवत्परिष्वङ्गाभिवन्दनैः ॥ ५ ॥ | ||
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| Line 31: | Line 30: | ||
| verse_line1 = इत्युक्तो धर्मराजेन सर्वं तत्समवर्णयत् । | | verse_line1 = इत्युक्तो धर्मराजेन सर्वं तत्समवर्णयत् । | ||
| verse_line2 = यथानुभूतं भ्रमता विना यदुकुलक्षयम् ॥ १२ ॥ | | verse_line2 = यथानुभूतं भ्रमता विना यदुकुलक्षयम् ॥ १२ ॥ | ||
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| Line 49: | Line 49: | ||
| verse_line1 = अबिभ्रदर्यमा दण्डं यथाघमघकारिषु । | | verse_line1 = अबिभ्रदर्यमा दण्डं यथाघमघकारिषु । | ||
| verse_line2 = यावद्बभार शूद्रत्वं शापाद्वर्षशतं यमः ॥ १५ ॥ | | verse_line2 = यावद्बभार शूद्रत्वं शापाद्वर्षशतं यमः ॥ १५ ॥ | ||
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| Line 67: | Line 68: | ||
| verse_line1 = प्रतिक्रिया न यस्येह कुतश्चित् कर्हिचित् प्रभो । | | verse_line1 = प्रतिक्रिया न यस्येह कुतश्चित् कर्हिचित् प्रभो । | ||
| verse_line2 = स एष भगवान् कालः सर्वेषां नः समागतः ॥ २० ॥ | | verse_line2 = स एष भगवान् कालः सर्वेषां नः समागतः ॥ २० ॥ | ||
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| Line 85: | Line 87: | ||
| verse_line1 = अथोदीचीं दिशं यातु स्वैरज्ञातगतिर्भवान् । | | verse_line1 = अथोदीचीं दिशं यातु स्वैरज्ञातगतिर्भवान् । | ||
| verse_line2 = इतोऽर्वाक्प्रायशः कालः पुंसां गुणविकर्षणः ॥ २८ ॥ | | verse_line2 = इतोऽर्वाक्प्रायशः कालः पुंसां गुणविकर्षणः ॥ २८ ॥ | ||
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| Line 103: | Line 106: | ||
| verse_line1 = अजातशत्रुः कृतमैत्रो हुताग्निर्विप्रान्नत्वा तिलगोवस्त्ररुग्मैः । | | verse_line1 = अजातशत्रुः कृतमैत्रो हुताग्निर्विप्रान्नत्वा तिलगोवस्त्ररुग्मैः । | ||
| verse_line2 = गृहान्प्रविष्टो गुरुवन्दनाय न चापश्यत्पितरौ सौबलीं च ॥३१॥ | | verse_line2 = गृहान्प्रविष्टो गुरुवन्दनाय न चापश्यत्पितरौ सौबलीं च ॥३१॥ | ||
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| verse_line2 = गावद्गणे क्व नस्तातो वृद्धो हीनश्च नेत्रयोः । | | verse_line2 = गावद्गणे क्व नस्तातो वृद्धो हीनश्च नेत्रयोः । | ||
| verse_line3 = अम्बा वा हतपुत्राऽऽर्ता पितृव्यः क्व गतः सुहृत् ॥ ३२ ॥ | | verse_line3 = अम्बा वा हतपुत्राऽऽर्ता पितृव्यः क्व गतः सुहृत् ॥ ३२ ॥ | ||
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| Line 140: | Line 145: | ||
| verse_line1 = पितर्युपरते पाण्डौ सर्वान्नः सुहृदः शिशून् । | | verse_line1 = पितर्युपरते पाण्डौ सर्वान्नः सुहृदः शिशून् । | ||
| verse_line2 = अरक्षतां व्यसनतः पितृव्यौ क्व गतावितः ॥ ३४ ॥ | | verse_line2 = अरक्षतां व्यसनतः पितृव्यौ क्व गतावितः ॥ ३४ ॥ | ||
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| Line 159: | Line 165: | ||
| verse_line2 = अहं च व्यंसितो राजन् पित्रोर्वः कुलनन्दन । | | verse_line2 = अहं च व्यंसितो राजन् पित्रोर्वः कुलनन्दन । | ||
| verse_line3 = न वेद साध्व्या गान्धार्या मुषितोऽस्मि महात्मभिः ॥ ३७ ॥ | | verse_line3 = न वेद साध्व्या गान्धार्या मुषितोऽस्मि महात्मभिः ॥ ३७ ॥ | ||
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| Line 179: | Line 186: | ||
| verse_line3 = अम्बा वा हतपुत्राऽऽर्ता क्व गता च तपस्विनी । | | verse_line3 = अम्बा वा हतपुत्राऽऽर्ता क्व गता च तपस्विनी । | ||
| verse_line4 = कर्णधार इवापारे सीदतां पारदर्शनः ॥ ४० ॥ | | verse_line4 = कर्णधार इवापारे सीदतां पारदर्शनः ॥ ४० ॥ | ||
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| Line 197: | Line 205: | ||
| verse_line1 = यन्मन्यसे ध्रुवं लोकमध्रुवं चाथवोभयम् । | | verse_line1 = यन्मन्यसे ध्रुवं लोकमध्रुवं चाथवोभयम् । | ||
| verse_line2 = सर्वथा हि न शोच्यास्ते स्नेहादन्यत्र मोहजात् ॥ ४४ ॥ | | verse_line2 = सर्वथा हि न शोच्यास्ते स्नेहादन्यत्र मोहजात् ॥ ४४ ॥ | ||
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| Line 215: | Line 224: | ||
| verse_line1 = धृतराष्ट्रः सह भ्रात्रा गान्धार्या च स्वभार्यया । | | verse_line1 = धृतराष्ट्रः सह भ्रात्रा गान्धार्या च स्वभार्यया । | ||
| verse_line2 = दक्षिणेन हिमवता ऋषीणामाश्रमं गतः ॥ ५१ ॥ | | verse_line2 = दक्षिणेन हिमवता ऋषीणामाश्रमं गतः ॥ ५१ ॥ | ||
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| Line 233: | Line 243: | ||
| verse_line1 = स्नात्वा त्रिषवणं तस्मिन् हुत्वा चाग्नीन् यथाविधि । | | verse_line1 = स्नात्वा त्रिषवणं तस्मिन् हुत्वा चाग्नीन् यथाविधि । | ||
| verse_line2 = अब्भक्ष उपशान्तात्मा स आस्तेऽ)विगतेक्षणः ॥ ५३ ॥ | | verse_line2 = अब्भक्ष उपशान्तात्मा स आस्तेऽ)विगतेक्षणः ॥ ५३ ॥ | ||
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| Line 251: | Line 262: | ||
| verse_line1 = विज्ञानात्मनि संयोज्य क्षेत्रज्ञे प्रविलाप्य तम् । | | verse_line1 = विज्ञानात्मनि संयोज्य क्षेत्रज्ञे प्रविलाप्य तम् । | ||
| verse_line2 = ब्रह्मण्यात्मानमाधारे घटाम्बरमिवाम्बरे ॥ ५५ ॥ | | verse_line2 = ब्रह्मण्यात्मानमाधारे घटाम्बरमिवाम्बरे ॥ ५५ ॥ | ||
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| Line 269: | Line 281: | ||
| verse_line1 = ध्वस्तमायागुणोद्रेको निरुद्धकरणाशयः । | | verse_line1 = ध्वस्तमायागुणोद्रेको निरुद्धकरणाशयः । | ||
| verse_line2 = निवर्तिताखिलाहार आस्ते स्थाणुरिवाधुना॥ ५६ ॥ | | verse_line2 = निवर्तिताखिलाहार आस्ते स्थाणुरिवाधुना॥ ५६ ॥ | ||
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| Line 287: | Line 300: | ||
| verse_line1 = स वा अद्यतनाद् राजा परतः पञ्चमेऽहनि । | | verse_line1 = स वा अद्यतनाद् राजा परतः पञ्चमेऽहनि । | ||
| verse_line2 = कलेवरं हास्यति ह तच्च भस्मीभविष्यति ॥ ५७ ॥ | | verse_line2 = कलेवरं हास्यति ह तच्च भस्मीभविष्यति ॥ ५७ ॥ | ||
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| Line 305: | Line 319: | ||
| verse_line1 = विदुरस्तु तदाश्चर्यं निशाम्य कुरुनन्दन । | | verse_line1 = विदुरस्तु तदाश्चर्यं निशाम्य कुरुनन्दन । | ||
| verse_line2 = हर्षशोकयुतस्तस्माद् गन्ता तीर्थनिषेवकः ॥ ५९ ॥ | | verse_line2 = हर्षशोकयुतस्तस्माद् गन्ता तीर्थनिषेवकः ॥ ५९ ॥ | ||
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