Bhagavatatatparyanirnaya/C2/S9: Difference between revisions
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| title = दशमोऽध्यायः | | title = दशमोऽध्यायः | ||
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| verse_id = BTN_C02_S09_V03 | | verse_id = BTN_C02_S09_V03 | ||
| Line 13: | Line 11: | ||
| verse_line1 = भूतमात्रेन्द्रियधियां जन्म सर्ग उदाहृतः । | | verse_line1 = भूतमात्रेन्द्रियधियां जन्म सर्ग उदाहृतः । | ||
| verse_line2 = ब्रह्मणो गुणवैषम्याद्विसर्गः पौरुषः स्मृतः ॥ ३ ॥ | | verse_line2 = ब्रह्मणो गुणवैषम्याद्विसर्गः पौरुषः स्मृतः ॥ ३ ॥ | ||
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| Line 31: | Line 30: | ||
| verse_line1 = निरोधोऽस्यानुशयनमात्मनः सह शक्तिभिः । | | verse_line1 = निरोधोऽस्यानुशयनमात्मनः सह शक्तिभिः । | ||
| verse_line2 = मुक्तिर्हित्वान्यथारूपं स्वरूपेण व्यवस्थितिः ॥ ६ ॥ | | verse_line2 = मुक्तिर्हित्वान्यथारूपं स्वरूपेण व्यवस्थितिः ॥ ६ ॥ | ||
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| Line 49: | Line 49: | ||
| verse_line1 = आभासश्च निरोधश्च यतस्तत्त्रयमीयते । | | verse_line1 = आभासश्च निरोधश्च यतस्तत्त्रयमीयते । | ||
| verse_line2 = स आश्रयः परं ब्रह्म परमात्मेति शब्द्यते ॥ ७ ॥ | | verse_line2 = स आश्रयः परं ब्रह्म परमात्मेति शब्द्यते ॥ ७ ॥ | ||
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| Line 67: | Line 68: | ||
| verse_line1 = आध्यात्मिको यः पुरुषः सोऽसावेवाधिदैविकः । | | verse_line1 = आध्यात्मिको यः पुरुषः सोऽसावेवाधिदैविकः । | ||
| verse_line2 = यस्तत्रोभयविच्छेदः स स्मृतो ह्याधिभौतिकः ॥ ८ ॥ | | verse_line2 = यस्तत्रोभयविच्छेदः स स्मृतो ह्याधिभौतिकः ॥ ८ ॥ | ||
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| Line 85: | Line 87: | ||
| verse_line1 = एतदेकतमाभावे यदा नोपलभामहे । | | verse_line1 = एतदेकतमाभावे यदा नोपलभामहे । | ||
| verse_line2 = त्रितयं तत्र यो वेद स आत्मा स्वाश्रयाश्रयः ॥ ९ ॥ | | verse_line2 = त्रितयं तत्र यो वेद स आत्मा स्वाश्रयाश्रयः ॥ ९ ॥ | ||
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| Line 112: | Line 115: | ||
| verse_line1 = तास्ववात्सीत् स्वसृष्टासु सहस्रपरिवत्सरान् । | | verse_line1 = तास्ववात्सीत् स्वसृष्टासु सहस्रपरिवत्सरान् । | ||
| verse_line2 = तेन नारायणो नाम यदापः पुरुषोद्भवाः ॥ ११ ॥ | | verse_line2 = तेन नारायणो नाम यदापः पुरुषोद्भवाः ॥ ११ ॥ | ||
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| Line 130: | Line 134: | ||
| verse_line1 = एको नानात्वमन्विच्छन्योगतल्पात्समुत्थितः । | | verse_line1 = एको नानात्वमन्विच्छन्योगतल्पात्समुत्थितः । | ||
| verse_line2 = वीर्यं हिरण्मयं देवो मायया व्यसृजत्त्रिधा ॥ १३ ॥ | | verse_line2 = वीर्यं हिरण्मयं देवो मायया व्यसृजत्त्रिधा ॥ १३ ॥ | ||
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| Line 148: | Line 153: | ||
| verse_line1 = उत्सिसृक्षोर्धातुमलं निरभिद्यत वै गुदम् । | | verse_line1 = उत्सिसृक्षोर्धातुमलं निरभिद्यत वै गुदम् । | ||
| verse_line2 = ततः पायुस्ततो मित्र उत्सर्ग उभयाश्रयः ॥ २७ ॥ | | verse_line2 = ततः पायुस्ततो मित्र उत्सर्ग उभयाश्रयः ॥ २७ ॥ | ||
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| Line 166: | Line 172: | ||
| verse_line1 = एतद्भगवतो रूपं स्थूलं ते व्याहृतं मया । | | verse_line1 = एतद्भगवतो रूपं स्थूलं ते व्याहृतं मया । | ||
| verse_line2 = मह्यादिभिश्चावरणैरष्टभिर्बहिरावृतम् ॥ ३३ ॥ | | verse_line2 = मह्यादिभिश्चावरणैरष्टभिर्बहिरावृतम् ॥ ३३ ॥ | ||
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| Line 184: | Line 191: | ||
| verse_line1 = अतःपरं सूक्ष्मतममव्यक्तं निर्विशेषणम् । | | verse_line1 = अतःपरं सूक्ष्मतममव्यक्तं निर्विशेषणम् । | ||
| verse_line2 = अनादिमध्यनिधनं नित्यं वाङ्मनसोः परम् ॥ ३४ ॥ | | verse_line2 = अनादिमध्यनिधनं नित्यं वाङ्मनसोः परम् ॥ ३४ ॥ | ||
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| Line 202: | Line 210: | ||
| verse_line1 = अमुनी भगवद्रूपे मया ते ह्यनुवर्णिते । | | verse_line1 = अमुनी भगवद्रूपे मया ते ह्यनुवर्णिते । | ||
| verse_line2 = उभे अपि न गृह्णन्ति मायासृष्टेऽविपश्चितः ॥ ३५ ॥ | | verse_line2 = उभे अपि न गृह्णन्ति मायासृष्टेऽविपश्चितः ॥ ३५ ॥ | ||
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| Line 220: | Line 229: | ||
| verse_line1 = स वाच्यवाचकतया भगवान्ब्रह्मरूपधृक् । | | verse_line1 = स वाच्यवाचकतया भगवान्ब्रह्मरूपधृक् । | ||
| verse_line2 = नामरूपक्रिया धत्ते सकर्माऽकर्मकः परः ॥ ३६ ॥ | | verse_line2 = नामरूपक्रिया धत्ते सकर्माऽकर्मकः परः ॥ ३६ ॥ | ||
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| Line 238: | Line 248: | ||
| verse_line1 = प्रजापतीन् मनून् देवानृषीन् पितृगणान् पृथक् । | | verse_line1 = प्रजापतीन् मनून् देवानृषीन् पितृगणान् पृथक् । | ||
| verse_line2 = सिद्धचारणगन्धर्वान् विद्याध्रासुरगुह्यकान् ॥ ३७ ॥ | | verse_line2 = सिद्धचारणगन्धर्वान् विद्याध्रासुरगुह्यकान् ॥ ३७ ॥ | ||
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| Line 256: | Line 267: | ||
| verse_line1 = सत्वं रजस्तम इति तिस्रः सुरनृनारकाः । | | verse_line1 = सत्वं रजस्तम इति तिस्रः सुरनृनारकाः । | ||
| verse_line2 = तत्राप्येकैकशो राजन् भिद्यन्ते गतयस्त्रिधा ॥ ४१ ॥ | | verse_line2 = तत्राप्येकैकशो राजन् भिद्यन्ते गतयस्त्रिधा ॥ ४१ ॥ | ||
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| Line 275: | Line 287: | ||
| verse_line2 = तदैवेदं जगद्धाता भगवान् धर्मरूपधृक् । | | verse_line2 = तदैवेदं जगद्धाता भगवान् धर्मरूपधृक् । | ||
| verse_line3 = पुष्णाति स्थापयन् विश्वं तिर्यङ्नरसुरात्मभिः ॥ ४२ ॥ | | verse_line3 = पुष्णाति स्थापयन् विश्वं तिर्यङ्नरसुरात्मभिः ॥ ४२ ॥ | ||
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| Line 293: | Line 306: | ||
| verse_line1 = ततः कालाग्निरुद्रात्मा यत्सृष्टमिदमात्मनः । | | verse_line1 = ततः कालाग्निरुद्रात्मा यत्सृष्टमिदमात्मनः । | ||
| verse_line2 = सन्नियच्छति तत्काले घनानीकमिवानिलः ॥ ४३ ॥ | | verse_line2 = सन्नियच्छति तत्काले घनानीकमिवानिलः ॥ ४३ ॥ | ||
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| Line 311: | Line 325: | ||
| verse_line1 = इत्थम्भावेन कथितो भगवान् भगवत्तमः । | | verse_line1 = इत्थम्भावेन कथितो भगवान् भगवत्तमः । | ||
| verse_line2 = नेत्थम्भावेन हि परं द्रष्टुमर्हन्ति सूरयः ॥ ४४ ॥ | | verse_line2 = नेत्थम्भावेन हि परं द्रष्टुमर्हन्ति सूरयः ॥ ४४ ॥ | ||
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| Line 329: | Line 344: | ||
| verse_line1 = न चास्य जन्मकर्माणि परस्य न विधीयते । | | verse_line1 = न चास्य जन्मकर्माणि परस्य न विधीयते । | ||
| verse_line2 = कर्तृत्वं प्रतिषेधार्थं माययाऽऽरोपितं हि तत् ॥ ४५ ॥ | | verse_line2 = कर्तृत्वं प्रतिषेधार्थं माययाऽऽरोपितं हि तत् ॥ ४५ ॥ | ||
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| Line 347: | Line 363: | ||
| verse_line1 = अयं तु ब्रह्मणः कल्पः सविकल्प उदाहृतः । | | verse_line1 = अयं तु ब्रह्मणः कल्पः सविकल्प उदाहृतः । | ||
| verse_line2 = विधिः साधारणो यत्र सर्गाः प्राकृतवैकृताः ॥ ४६ ॥ | | verse_line2 = विधिः साधारणो यत्र सर्गाः प्राकृतवैकृताः ॥ ४६ ॥ | ||
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