Bhagavatatatparyanirnaya/C10/S38: Difference between revisions
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| title = अष्टत्रिंशोऽध्यायः | | title = अष्टत्रिंशोऽध्यायः | ||
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| verse_line1 = भूस्तोयमग्निः पवनः खमादि- र्महानजादिर्मन इन्द्रियाणि । सर्वेन्द्रियार्था विबुधाश्च सर्वे ये हेतवस्ते जगतोऽङ्गभूताः ॥ ३ ॥ | | verse_line1 = भूस्तोयमग्निः पवनः खमादि- र्महानजादिर्मन इन्द्रियाणि । सर्वेन्द्रियार्था विबुधाश्च सर्वे ये हेतवस्ते जगतोऽङ्गभूताः ॥ ३ ॥ | ||
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| verse_line1 = नैते स्वरूपं विदुरात्मनस्ते अजादयोऽन्यात्मतया गृहीताः । अजोऽनुबद्धः स गुणैरजाया गुणात् परं वेद न ते स्वरूपम् ॥ ४ ॥ | | verse_line1 = नैते स्वरूपं विदुरात्मनस्ते अजादयोऽन्यात्मतया गृहीताः । अजोऽनुबद्धः स गुणैरजाया गुणात् परं वेद न ते स्वरूपम् ॥ ४ ॥ | ||
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| verse_line1 = त्वां योगिनो यजन्त्यद्धा महापुरुषमीश्वरम् । | | verse_line1 = त्वां योगिनो यजन्त्यद्धा महापुरुषमीश्वरम् । | ||
| verse_line2 = साध्यात्मं साधिभूतं च साधिदैवं च साधवः ॥ ५ ॥ | | verse_line2 = साध्यात्मं साधिभूतं च साधिदैवं च साधवः ॥ ५ ॥ | ||
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| verse_line1 = त्रय्या च विद्यया केचित् त्वां वै वैतानिका द्विजाः । | | verse_line1 = त्रय्या च विद्यया केचित् त्वां वै वैतानिका द्विजाः । | ||
| verse_line2 = यजन्ते विततैर्यज्ञैर्नानारूपामराख्यया ॥ ६ ॥ | | verse_line2 = यजन्ते विततैर्यज्ञैर्नानारूपामराख्यया ॥ ६ ॥ | ||
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| verse_line1 = तुभ्यं नमस्तेऽस्त्वविषक्तदृष्टये सर्वात्मने सर्वधियां च साक्षिणे । गुणप्रवाहोऽयमविद्ययाऽसकृत् प्रवर्तते देवनृतिर्यगात्मसु ॥ १३ ॥ | | verse_line1 = तुभ्यं नमस्तेऽस्त्वविषक्तदृष्टये सर्वात्मने सर्वधियां च साक्षिणे । गुणप्रवाहोऽयमविद्ययाऽसकृत् प्रवर्तते देवनृतिर्यगात्मसु ॥ १३ ॥ | ||
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| verse_line1 = त्वय्यव्ययात्मन् पुरुषे प्रकल्पिता लोकाः सपाला बहुजीवसङ्कुलाः । यथा जले सञ्जिहते जलौकसोऽ- प्युदुम्बरे वा मशका मनोमये ॥ १६ ॥ | | verse_line1 = त्वय्यव्ययात्मन् पुरुषे प्रकल्पिता लोकाः सपाला बहुजीवसङ्कुलाः । यथा जले सञ्जिहते जलौकसोऽ- प्युदुम्बरे वा मशका मनोमये ॥ १६ ॥ | ||
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| verse_line1 = यानि यानीह रूपाणि क्रीडनार्थं विभर्षि हि । | | verse_line1 = यानि यानीह रूपाणि क्रीडनार्थं विभर्षि हि । | ||
| verse_line2 = तैरामृष्टशुचो लोका मुदा गायन्ति ते यशः ॥ १७ ॥ | | verse_line2 = तैरामृष्टशुचो लोका मुदा गायन्ति ते यशः ॥ १७ ॥ | ||
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| verse_line1 = नमस्ते वासुदेवाय नमः सङ्कर्षणाय च । | | verse_line1 = नमस्ते वासुदेवाय नमः सङ्कर्षणाय च । | ||
| verse_line2 = प्रद्युम्नायानिरुद्धाय सात्वतां पतये नमः ॥ २२ ॥ | | verse_line2 = प्रद्युम्नायानिरुद्धाय सात्वतां पतये नमः ॥ २२ ॥ | ||
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