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| <div class="gr-doc-title gr-ullekha-title">ब्रह्मसूत्रभाष्यम्-उल्लेखाः</div> | | <div class="gr-doc-title gr-ullekha-title">ब्रह्मसूत्रभाष्यम्-उल्लेखाः</div> |
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| == Mahopanishad ==
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S02_V26_B4|‘स य एतमेवमात्मानं विश्वं हरिमारादरमुपास्ते तस्य सर्वेषु लोकेषु सर्वेषु भूतेषु स……]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C04_S01_V19_B4|‘ब्रह्मणां शतकालात् तु पूर्वमारब्दसङ्क्षयः । नियमेन भवेन्नात्र कार्या काचिद्विचा……]] |
| <ol class="gr-ullekha-list">
| | # [[Brahmasutra#BS_C03_S03_V13_B2|‘नैव सर्वगुणाः सर्वैरुपास्या मुक्तिभेदतः । विरिञ्चस्यैव यन्मुक्तावानन्दस्य सुपूर……]] |
| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C01_S02_V26_B4" data-hl="‘स य एतमेवमात्मानं विश्वं हरिमारादरमुपास्ते तस्य सर्वेषु लोकेषु सर्वेषु भूतेषु सर्वेषु देवेषु सर्वषुवेदेषु कामचारो भवति’">[[Brahmasutra#BS_C01_S02_V26_B4|'‘स य एतमेवमात्मानं विश्वं हरिमारादरमुपास्ते तस्य सर्वेषु लोक......']]</span></li>
| | # [[Brahmasutra#BS_C03_S03_V15_B2|‘ज्ञानार्थमथ ध्यानार्थं गुणानां समुदीरणा । ज्ञातव्याश्चैव ध्यातव्या गुणाः सर्वेऽ……]] |
| </ol>
| | # [[Brahmasutra#BS_C03_S03_V03_B1|‘स्वाध्यायोऽध्येतव्यः’(तै.आ.२.१५)]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C02_S03_V30_B2|‘नित्यः परो नित्यो जीवोऽनित्यास्तस्य धातवः । अत उत्पद्यते च म्रियते च विमुच्यते……]] |
| == NarayanaTantra ==
| | # [[Brahmasutra#BS_C02_S03_V32_B1|‘नित्यानन्दो नित्यज्ञानो नित्यबलः परमात्मा नैवमसुरा एवमनेवं च मनुष्याः’]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C04_S02_V17_B8|‘हृदिस्थेनैव हरिणा तस्यैवानुग्रहेण तु । उत्क्रान्तिर्ब्रह्मरन्ध्रेण तमोवोपासतो भ……]] |
| <ol class="gr-ullekha-list">
| | # [[Brahmasutra#BS_C04_S02_V22_B7|‘गत्यनुस्मरणाद् ब्रह्म चन्द्रं वा गच्छति ध्रुवम् । अननुस्मरतः काले स्मरणं प्राप्……]] |
| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C04_S01_V19_B4" data-hl="‘ब्रह्मणां शतकालात् तु पूर्वमारब्दसङ्क्षयः ।<br/>नियमेन भवेन्नात्र कार्या काचिद्विचारणा’">[[Brahmasutra#BS_C04_S01_V19_B4|'‘ब्रह्मणां शतकालात् तु पूर्वमारब्दसङ्क्षयः ।<br/>नियमेन भवेन......']]</span></li>
| | # [[Brahmasutra#BS_C04_S01_V14_B2|‘यथाऽश्लेषो विनाशश्च मुक्तस्य तु विकर्मणः । एवं सुकर्मणश्चापि पततस्तमसि ध्रुवम्’]] |
| </ol>
| | # [[Brahmasutra#BS_C03_S04_V27_B6|‘यस्य ज्ञानं तस्य मोक्ष इति नात्र विचारणा । तस्य शान्त्यादयोऽङ्गानि तस्मात् तेषा……]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C01_S02_V05_B2|‘एष उ एव ब्रह्मैष उ एवात्मैष उ एव सवितैष उ एवेन्द्र एष उ एव हरिर्हरति परः परानन्……]] |
| == Parasamhitayam ==
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V01_B22|‘यो देवानां नामधा एक एव तं सम्प्रश्नं भुवना यन्त्यन्या’(ऋ.सं.१०.८२.३)]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V01_B23|‘अजस्य नाभावध्येकमर्पितं यस्मिन् विश्वानि भुवनानि तस्थुः’(ऋ.सं.१०.८२.६)]] |
| <ol class="gr-ullekha-list">
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V01_B26|‘परो दिवा पर एना पृथिव्या’(ऋ.सं.१०.८२.५)]] |
| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C03_S03_V13_B2" data-hl="‘नैव सर्वगुणाः सर्वैरुपास्या मुक्तिभेदतः ।<br/>विरिञ्चस्यैव यन्मुक्तावानन्दस्य सुपूर्णता’">[[Brahmasutra#BS_C03_S03_V13_B2|'‘नैव सर्वगुणाः सर्वैरुपास्या मुक्तिभेदतः ।<br/>विरिञ्चस्यैव......']]</span></li>
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V01_B27|‘यं कामये तं तमुग्रं कृणोमि तं ब्रह्माणं तमृषिं तं सुमेधाम्’(ऋ.सं.१०.१२५.५)]] |
| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C03_S03_V15_B2" data-hl="‘ज्ञानार्थमथ ध्यानार्थं गुणानां समुदीरणा ।<br/>ज्ञातव्याश्चैव ध्यातव्या गुणाः सर्वेऽप्यतो हरेः ॥<br/>नान्यत् प्रयोजनं ज्">[[Brahmasutra#BS_C03_S03_V15_B2|'‘ज्ञानार्थमथ ध्यानार्थं गुणानां समुदीरणा ।<br/>ज्ञातव्याश्चै......']]</span></li>
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V01_B27|‘मम योनिरप्स्वन्तः समुद्रे’(ऋ.सं.१०.१२५.७)]] |
| </ol>
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V02_B4|‘य उ त्रिधातु पृथिवीमुत द्यामेको दाधार भुवनानि विश्वा ।’(ऋ.सं.१.१५४.४)]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V02_B5|‘चतुर्भिस्साकं नवतिं च नामभिश्चक्रं न वृत्तिं व्यतीरँवीविपत् ।’(ऋ.सं.१.१५५.६)]] |
| == Taittiriyaaranyaka ==
| | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V02_B6|‘परो मात्रया तन्वा वृधान न ते महित्वमन्वश्नुवन्ति ।’(ऋ.सं.७.९९.१)]] |
| | | # [[Brahmasutra#BS_C01_S01_V02_B7|‘न ते विष्णो जायमानो न जातो देव महिम्नः |
| <ol class="gr-ullekha-list">
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C03_S03_V03_B1" data-hl="‘स्वाध्यायोऽध्येतव्यः’(तै.आ.२.१५)">[[Brahmasutra#BS_C03_S03_V03_B1|'‘स्वाध्यायोऽध्येतव्यः’(तै.आ.२.१५)']]</span></li>
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| == अग्निवेश्यशाखा ==
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C02_S03_V30_B2" data-hl="‘नित्यः परो नित्यो जीवोऽनित्यास्तस्य धातवः ।<br/>अत उत्पद्यते च म्रियते च विमुच्यते च’">[[Brahmasutra#BS_C02_S03_V30_B2|'‘नित्यः परो नित्यो जीवोऽनित्यास्तस्य धातवः ।<br/>अत उत्पद्यत......']]</span></li>
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| == अग्निवेश्यश्रुतिः ==
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C02_S03_V32_B1" data-hl="‘नित्यानन्दो नित्यज्ञानो नित्यबलः परमात्मा नैवमसुरा एवमनेवं च मनुष्याः’">[[Brahmasutra#BS_C02_S03_V32_B1|'‘नित्यानन्दो नित्यज्ञानो नित्यबलः परमात्मा नैवमसुरा एवमनेवं......']]</span></li>
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| == अध्यात्मश्रुतिः ==
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C04_S02_V17_B8" data-hl="‘हृदिस्थेनैव हरिणा तस्यैवानुग्रहेण तु ।<br/>उत्क्रान्तिर्ब्रह्मरन्ध्रेण तमोवोपासतो भवेत्’">[[Brahmasutra#BS_C04_S02_V17_B8|'‘हृदिस्थेनैव हरिणा तस्यैवानुग्रहेण तु ।<br/>उत्क्रान्तिर्ब्र......']]</span></li>
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C04_S02_V22_B7" data-hl="‘गत्यनुस्मरणाद् ब्रह्म चन्द्रं वा गच्छति ध्रुवम् ।<br/>अननुस्मरतः काले स्मरणं प्राप्य वैगतिः’">[[Brahmasutra#BS_C04_S02_V22_B7|'‘गत्यनुस्मरणाद् ब्रह्म चन्द्रं वा गच्छति ध्रुवम् ।<br/>अननुस......']]</span></li>
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| == आग्नेयपुराणम् ==
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C04_S01_V14_B2" data-hl="‘यथाऽश्लेषो विनाशश्च मुक्तस्य तु विकर्मणः ।<br/>एवं सुकर्मणश्चापि पततस्तमसि ध्रुवम्’">[[Brahmasutra#BS_C04_S01_V14_B2|'‘यथाऽश्लेषो विनाशश्च मुक्तस्य तु विकर्मणः ।<br/>एवं सुकर्मणश......']]</span></li>
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| == आग्नेयम् ==
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| <li><span class="gr-ullekha-ref-link" data-anchor="BS_C03_S04_V27_B6" data-hl="‘यस्य ज्ञानं तस्य मोक्ष इति नात्र विचारणा ।<br/>तस्य शान्त्यादयोऽङ्गानि तस्मात् तेषामनिष्ठितिः ॥<br/>अवश्यकरणीया स्यादन्">[[Brahmasutra#BS_C03_S04_V27_B6|'‘यस्य ज्ञानं तस्य मोक्ष इति नात्र विचारणा ।<br/>तस्य शान्त्य......']]</span></li>
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