Tattvasankhyanam: Difference between revisions
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| verse_type = shloka | | verse_type = shloka | ||
| verse_line1 = स्वतन्त्रमस्वतन्त्रं च द्विविधं तत्त्वमिष्यते । | | verse_line1 = स्वतन्त्रमस्वतन्त्रं च द्विविधं तत्त्वमिष्यते । | ||
| verse_lines = स्वतन्त्रमस्वतन्त्रं च द्विविधं तत्त्वमिष्यते ।;स्वतन्त्रो भगवान् विष्णुः भावाभावौ द्विधेतरत् ॥1॥ | |||
| verse_line2 = स्वतन्त्रो भगवान् विष्णुः भावाभावौ द्विधेतरत् ॥1॥ | | verse_line2 = स्वतन्त्रो भगवान् विष्णुः भावाभावौ द्विधेतरत् ॥1॥ | ||
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| verse_type = shloka | | verse_type = shloka | ||
| verse_line1 = प्राक्प्रध्वंससदात्वेन त्रिविधोऽभाव इष्यते । | | verse_line1 = प्राक्प्रध्वंससदात्वेन त्रिविधोऽभाव इष्यते । | ||
| verse_lines = प्राक्प्रध्वंससदात्वेन त्रिविधोऽभाव इष्यते ।;चेतनाचेतनत्वेन भावोऽपि द्विविधो मतः ॥2॥ | |||
| verse_line2 = चेतनाचेतनत्वेन भावोऽपि द्विविधो मतः ॥2॥ | | verse_line2 = चेतनाचेतनत्वेन भावोऽपि द्विविधो मतः ॥2॥ | ||
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| verse_line1 = दुःखस्पृष्टं तदस्पृष्टमिति द्वेधैव चेतनम् । | | verse_line1 = दुःखस्पृष्टं तदस्पृष्टमिति द्वेधैव चेतनम् । | ||
| verse_lines = दुःखस्पृष्टं तदस्पृष्टमिति द्वेधैव चेतनम् ।;नित्यादुःखा रमाऽन्ये तु स्पृष्टदुःखास्समस्तशः ॥3॥ | |||
| verse_line2 = नित्यादुःखा रमाऽन्ये तु स्पृष्टदुःखास्समस्तशः ॥3॥ | | verse_line2 = नित्यादुःखा रमाऽन्ये तु स्पृष्टदुःखास्समस्तशः ॥3॥ | ||
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| verse_type = shloka | | verse_type = shloka | ||
| verse_line1 = स्पृष्टदुःखा विमुक्ताश्च दुःखसंस्था इति द्विधा । | | verse_line1 = स्पृष्टदुःखा विमुक्ताश्च दुःखसंस्था इति द्विधा । | ||
| verse_lines = स्पृष्टदुःखा विमुक्ताश्च दुःखसंस्था इति द्विधा ।;दुःखसंस्था मुक्तियोग्या अयोग्या इति च द्विधा ॥4॥ | |||
| verse_line2 = दुःखसंस्था मुक्तियोग्या अयोग्या इति च द्विधा ॥4॥ | | verse_line2 = दुःखसंस्था मुक्तियोग्या अयोग्या इति च द्विधा ॥4॥ | ||
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| verse_line1 = देवर्षिपितृपनरा इति मुक्तास्तु पञ्चधा । | | verse_line1 = देवर्षिपितृपनरा इति मुक्तास्तु पञ्चधा । | ||
| verse_lines = देवर्षिपितृपनरा इति मुक्तास्तु पञ्चधा ।;एवं विमुक्तियोग्याश्च तमोगाः सृतिसंस्थिताः ॥5॥ | |||
| verse_line2 = एवं विमुक्तियोग्याश्च तमोगाः सृतिसंस्थिताः ॥5॥ | | verse_line2 = एवं विमुक्तियोग्याश्च तमोगाः सृतिसंस्थिताः ॥5॥ | ||
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| verse_line1 = इति द्विधा मुक्त्ययोग्या दैत्यरक्षपिशाचकाः । | | verse_line1 = इति द्विधा मुक्त्ययोग्या दैत्यरक्षपिशाचकाः । | ||
| verse_lines = इति द्विधा मुक्त्ययोग्या दैत्यरक्षपिशाचकाः ।;मर्त्याधमाश्चतुर्धैव तमोयोग्याः प्रकीर्तिताः ॥6॥ | |||
| verse_line2 = मर्त्याधमाश्चतुर्धैव तमोयोग्याः प्रकीर्तिताः ॥6॥ | | verse_line2 = मर्त्याधमाश्चतुर्धैव तमोयोग्याः प्रकीर्तिताः ॥6॥ | ||
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| verse_line1 = ते च प्राप्तान्धतमसः सृतिसंस्था इति द्विधा । | | verse_line1 = ते च प्राप्तान्धतमसः सृतिसंस्था इति द्विधा । | ||
| verse_lines = ते च प्राप्तान्धतमसः सृतिसंस्था इति द्विधा ।;नित्यानित्यविभागेन त्रिधैवाचेतनं मतम् ॥7॥ | |||
| verse_line2 = नित्यानित्यविभागेन त्रिधैवाचेतनं मतम् ॥7॥ | | verse_line2 = नित्यानित्यविभागेन त्रिधैवाचेतनं मतम् ॥7॥ | ||
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| verse_line1 = नित्या वेदाः पुराणाद्याः कालः प्रकृतिरेव च । | | verse_line1 = नित्या वेदाः पुराणाद्याः कालः प्रकृतिरेव च । | ||
| verse_lines = नित्या वेदाः पुराणाद्याः कालः प्रकृतिरेव च ।;नित्यानित्यं त्रिधा प्रोक्तमनित्यं द्विविधं स्मृतम् ॥8॥ | |||
| verse_line2 = नित्यानित्यं त्रिधा प्रोक्तमनित्यं द्विविधं स्मृतम् ॥8॥ | | verse_line2 = नित्यानित्यं त्रिधा प्रोक्तमनित्यं द्विविधं स्मृतम् ॥8॥ | ||
}} | }} | ||
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| verse_line1 = असंसृष्टं च संसृष्टमसंसृष्टं महानहम् । | | verse_line1 = असंसृष्टं च संसृष्टमसंसृष्टं महानहम् । | ||
| verse_lines = असंसृष्टं च संसृष्टमसंसृष्टं महानहम् ।;बुद्धिर्मनःखानि दश मात्रा भूतानि पञ्च च ॥9॥ | |||
| verse_line2 = बुद्धिर्मनःखानि दश मात्रा भूतानि पञ्च च ॥9॥ | | verse_line2 = बुद्धिर्मनःखानि दश मात्रा भूतानि पञ्च च ॥9॥ | ||
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| verse_line1 = संसृष्टमण्डं तद्गं च समस्तं सम्प्रकीर्तितम् । | | verse_line1 = संसृष्टमण्डं तद्गं च समस्तं सम्प्रकीर्तितम् । | ||
| verse_lines = संसृष्टमण्डं तद्गं च समस्तं सम्प्रकीर्तितम् ।;सृष्टिः स्थितिः संहृतिश्च नियमोऽज्ञानबोधने ॥10॥ | |||
| verse_line2 = सृष्टिः स्थितिः संहृतिश्च नियमोऽज्ञानबोधने ॥10॥ | | verse_line2 = सृष्टिः स्थितिः संहृतिश्च नियमोऽज्ञानबोधने ॥10॥ | ||
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| verse_type = shloka | | verse_type = shloka | ||
| verse_line1 = बन्धो मोक्षः सुखं दुःखमावृत्तिर्ज्योतिरेव च । | | verse_line1 = बन्धो मोक्षः सुखं दुःखमावृत्तिर्ज्योतिरेव च । | ||
| verse_lines = बन्धो मोक्षः सुखं दुःखमावृत्तिर्ज्योतिरेव च ।;विष्णुनास्य समस्तस्य समासव्यासयोगतः ॥11॥ | |||
| verse_line2 = विष्णुनास्य समस्तस्य समासव्यासयोगतः ॥11॥ | | verse_line2 = विष्णुनास्य समस्तस्य समासव्यासयोगतः ॥11॥ | ||
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