JSON:Rigbhashyam: Difference between revisions
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
||
| Line 63: | Line 63: | ||
"chapter": "RG_C01", | "chapter": "RG_C01", | ||
"verseType": "mantra", | "verseType": "mantra", | ||
"text": "स एव सर्वशब्दार्थः इत्याहोपनिषत् परा ।" | "text": "स एव सर्वशब्दार्थः इत्याहोपनिषत् परा ।\n‘ता वा एता ऋचः’ इति विशेषेणाप्यृगर्थताम् ॥ ५ ॥" | ||
}, | }, | ||
{ | { | ||
| Line 72: | Line 72: | ||
"chapter": "RG_C01", | "chapter": "RG_C01", | ||
"verseType": "mantra", | "verseType": "mantra", | ||
"text": "‘यो देवानाम्’ इति श्रुत्या देवनाम्नां विशेषतः । स्पष्टत्वात् तद्गतत्वेन" | "text": "‘यो देवानाम्’ इति श्रुत्या देवनाम्नां विशेषतः । स्पष्टत्वात् तद्गतत्वेन\nतत्राहाग्रेऽग्निनामकम् ॥ ६॥" | ||
}, | }, | ||
{ | { | ||
| Line 81: | Line 81: | ||
"chapter": "RG_C01", | "chapter": "RG_C01", | ||
"verseType": "mantra", | "verseType": "mantra", | ||
"text": "अग्रणीत्वं यदग्नित्वमित्यग्रे नाम तद्भवेत् ।" | "text": "अग्रणीत्वं यदग्नित्वमित्यग्रे नाम तद्भवेत् ।\nएवमेवाह भगवान्निरुक्तिं बादरायणः ॥ ७ ॥" | ||
}, | }, | ||
{ | { | ||
| Line 108: | Line 108: | ||
"chapter": "RG_C01", | "chapter": "RG_C01", | ||
"verseType": "mantra", | "verseType": "mantra", | ||
"text": "ओ३म् ॥ अग्निमीळेे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ॥ होतारं रत्नधातमम् ॥ १ ॥" | "text": "ओ३म् ॥ अग्निमीळेे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ॥ होतारं रत्नधातमम् ॥ १ ॥\nओ३म् ॥ अ॒ग्निमी॑ळे पु॒रोहि॑तं य॒ज्ञस्य॑ दे॒वमृ॒त्विज॑म् । होता॑रं रत्न॒धात॑मम् ॥ १ ॥" | ||
}, | }, | ||
{ | { | ||
| Line 162: | Line 162: | ||
"chapter": "RG_C01", | "chapter": "RG_C01", | ||
"verseType": "mantra", | "verseType": "mantra", | ||
"text": "अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत॥ स देवा एह वक्षति ॥ २ ॥" | "text": "अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत॥ स देवा एह वक्षति ॥ २ ॥\nअ॒ग्निः पूर्वे॑भि॒र्ऋषि॑भि॒रीड्यो॒ नूत॑नैरु॒त । स दे॒वाँ एह व॑क्षति ॥ २ ॥" | ||
}, | }, | ||
{ | { | ||