Bruhadaranyaka/C5/S2: Difference between revisions

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| verse_line1  = त्रयाः प्राजापत्याः प्रजापतौ पितरि ब्रह्मचर्यमूषुर्देवा मनुष्या असुरा उषित्वा ब्रह्मचर्यं, देवा ऊचुर्ब्रवीतु नो भवानिति तेभ्यो हैतदक्षरमुवाच द इति व्यज्ञासिष्ठा३ इति व्यज्ञासिष्मेति होचुर्दाम्यतेति न आत्थेत्योमिति होवाच व्यज्ञासिष्टेति ॥ १ ॥
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| verse_line1  = अथ हैनं मनुष्या ऊचुर्ब्रवीतु नो भवानिति तेभ्यो हैतदेवाक्षरमुवाच द इति व्यज्ञासिष्टा३ इति व्यज्ञासिष्मेति होचुर्दत्तेति न आत्थेत्योमिति होवाच व्यज्ञासिष्टेति ॥ २ ॥
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{{AuthorNote| text = ॥ इति  बृहदारण्यकोपनिषदि सप्तमाध्याये  द्वितीयं ब्राह्मणम् ॥}}
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{{AuthorNote| text = ॥  इति बृहद्भाष्ये द्वितीयं ब्राह्मणम् ॥ २ ॥}}
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