Bhagavatatatparyanirnaya/C1/S3: Difference between revisions
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| title = तृतीयोऽध्यायः | | title = तृतीयोऽध्यायः | ||
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| Line 14: | Line 12: | ||
| verse_line2 = जगृहे पौरुषं रूपं भगवान् महदादिभिः । | | verse_line2 = जगृहे पौरुषं रूपं भगवान् महदादिभिः । | ||
| verse_line3 = सम्भूतं षोडशकलमादौ लोकसिसृक्षया ॥ १ ॥ | | verse_line3 = सम्भूतं षोडशकलमादौ लोकसिसृक्षया ॥ १ ॥ | ||
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| Line 32: | Line 31: | ||
| verse_line1 = यस्यावयवसंस्थानैः कल्पितो लोकविस्तरः । | | verse_line1 = यस्यावयवसंस्थानैः कल्पितो लोकविस्तरः । | ||
| verse_line2 = तद्वै भगवतो रूपं विशुद्धं सत्त्वमूर्जितम् ॥ ३ ॥ | | verse_line2 = तद्वै भगवतो रूपं विशुद्धं सत्त्वमूर्जितम् ॥ ३ ॥ | ||
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| verse_line1 = एतन्नानावताराणां निधानं बीजमव्ययम् । | | verse_line1 = एतन्नानावताराणां निधानं बीजमव्ययम् । | ||
| verse_line2 = यस्यांशांशेन सृज्यन्ते देवतिर्यङ्नरादयः ॥ ५ ॥ | | verse_line2 = यस्यांशांशेन सृज्यन्ते देवतिर्यङ्नरादयः ॥ ५ ॥ | ||
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| Line 68: | Line 69: | ||
| verse_line1 = स एव प्रथमं देवः कौमारं सर्गमास्थितः । | | verse_line1 = स एव प्रथमं देवः कौमारं सर्गमास्थितः । | ||
| verse_line2 = चचार दुश्चरं ब्रह्मा ब्रह्मचर्यमखण्डितम् ॥ ६ ॥ | | verse_line2 = चचार दुश्चरं ब्रह्मा ब्रह्मचर्यमखण्डितम् ॥ ६ ॥ | ||
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| Line 86: | Line 88: | ||
| verse_line1 = तृतीयमृषिसर्गं वै देवर्षित्वमुपेत्य सः । | | verse_line1 = तृतीयमृषिसर्गं वै देवर्षित्वमुपेत्य सः । | ||
| verse_line2 = तन्त्रं सात्वतमाचष्ट नैष्कर्म्यं कर्मणां यतः ॥ ८ ॥ | | verse_line2 = तन्त्रं सात्वतमाचष्ट नैष्कर्म्यं कर्मणां यतः ॥ ८ ॥ | ||
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| Line 104: | Line 107: | ||
| verse_line1 = तुर्यं धर्मकलासर्गे नरनारायणावृषी । | | verse_line1 = तुर्यं धर्मकलासर्गे नरनारायणावृषी । | ||
| verse_line2 = भूत्वाऽऽत्मोपशमोपेतमकरोद्दुश्चरं तमः ॥ ९ ॥ | | verse_line2 = भूत्वाऽऽत्मोपशमोपेतमकरोद्दुश्चरं तमः ॥ ९ ॥ | ||
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| Line 122: | Line 126: | ||
| verse_line1 = पञ्चमः कपिलो नाम सिद्धेशः कालविप्लुतम् । | | verse_line1 = पञ्चमः कपिलो नाम सिद्धेशः कालविप्लुतम् । | ||
| verse_line2 = प्रोवाचाऽऽसुरये साङ्ख्यं तत्त्वग्रामविनिर्णयम् ॥ १० ॥ | | verse_line2 = प्रोवाचाऽऽसुरये साङ्ख्यं तत्त्वग्रामविनिर्णयम् ॥ १० ॥ | ||
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| Line 140: | Line 145: | ||
| verse_line1 = षष्ठमत्रेरपत्यत्वं वृतः प्राप्तोऽनसूयया । | | verse_line1 = षष्ठमत्रेरपत्यत्वं वृतः प्राप्तोऽनसूयया । | ||
| verse_line2 = आन्वीक्षिकीमलर्काय प्रह्लादादिभ्य ऊचिवान् ॥ ११ ॥ | | verse_line2 = आन्वीक्षिकीमलर्काय प्रह्लादादिभ्य ऊचिवान् ॥ ११ ॥ | ||
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| Line 158: | Line 164: | ||
| verse_line1 = ऋषिभिर्याचितो भेजे नवमं पार्थिवं वपुः । | | verse_line1 = ऋषिभिर्याचितो भेजे नवमं पार्थिवं वपुः । | ||
| verse_line2 = दुग्धवानोेषधीर्विप्रास्तेनायं च उशत्तमः ॥ १४ ॥ | | verse_line2 = दुग्धवानोेषधीर्विप्रास्तेनायं च उशत्तमः ॥ १४ ॥ | ||
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| Line 176: | Line 183: | ||
| verse_line1 = ततः सप्तदशे जातः सत्यवत्यां पराशरात् । | | verse_line1 = ततः सप्तदशे जातः सत्यवत्यां पराशरात् । | ||
| verse_line2 = चक्रे वेदतरोः शाखा दृष्ट्वा पुंसोऽल्पमेधसः ॥ २१ ॥ | | verse_line2 = चक्रे वेदतरोः शाखा दृष्ट्वा पुंसोऽल्पमेधसः ॥ २१ ॥ | ||
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| Line 194: | Line 202: | ||
| verse_line1 = एकोनविंशे विंशतिमे वृष्णिषु प्राप्य जन्मनी । | | verse_line1 = एकोनविंशे विंशतिमे वृष्णिषु प्राप्य जन्मनी । | ||
| verse_line2 = रामकृष्णाविति भुवो भगवानहरद्भरम् ॥ २३ ॥ | | verse_line2 = रामकृष्णाविति भुवो भगवानहरद्भरम् ॥ २३ ॥ | ||
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| Line 212: | Line 221: | ||
| verse_line1 = ततः कलौ सम्प्रवृत्ते सम्मोहाय सुरद्विषाम् । | | verse_line1 = ततः कलौ सम्प्रवृत्ते सम्मोहाय सुरद्विषाम् । | ||
| verse_line2 = बुद्धो नाम्ना जिनसुतः कीकटेषु भविष्यति ॥ २४ ॥ | | verse_line2 = बुद्धो नाम्ना जिनसुतः कीकटेषु भविष्यति ॥ २४ ॥ | ||
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| Line 230: | Line 240: | ||
| verse_line1 = अवतारा ह्यसङ्ख्येया हरेः सत्वनिधेर्द्विजाः । | | verse_line1 = अवतारा ह्यसङ्ख्येया हरेः सत्वनिधेर्द्विजाः । | ||
| verse_line2 = यथा विदासिनः कुल्याः सरसः स्युः सहस्रशः ॥ २६ ॥ | | verse_line2 = यथा विदासिनः कुल्याः सरसः स्युः सहस्रशः ॥ २६ ॥ | ||
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| Line 248: | Line 259: | ||
| verse_line1 = एते स्वांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम् । | | verse_line1 = एते स्वांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम् । | ||
| verse_line2 = इन्द्रारिव्याकुलं लोकं मृडयन्ति युगे युगे ॥ २८ ॥ | | verse_line2 = इन्द्रारिव्याकुलं लोकं मृडयन्ति युगे युगे ॥ २८ ॥ | ||
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| Line 266: | Line 278: | ||
| verse_line1 = एतद्रूपं भगवतो ह्यरूपस्य चिदात्मनः । | | verse_line1 = एतद्रूपं भगवतो ह्यरूपस्य चिदात्मनः । | ||
| verse_line2 = मायागुणैर्विरचितं महदादिभिरात्मनि ॥ ३० ॥ | | verse_line2 = मायागुणैर्विरचितं महदादिभिरात्मनि ॥ ३० ॥ | ||
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| Line 284: | Line 297: | ||
| verse_line1 = यथा नभसि मेघौघा रेणुर्वा पार्थिवोऽनिले । | | verse_line1 = यथा नभसि मेघौघा रेणुर्वा पार्थिवोऽनिले । | ||
| verse_line2 = एवं द्रष्टरि दृश्यत्वमारोपितमबुद्धिभिः ॥ ३१ ॥ | | verse_line2 = एवं द्रष्टरि दृश्यत्वमारोपितमबुद्धिभिः ॥ ३१ ॥ | ||
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| Line 302: | Line 316: | ||
| verse_line1 = अतः परं यदव्यक्तमव्यूढगुणबृंहितम् । | | verse_line1 = अतः परं यदव्यक्तमव्यूढगुणबृंहितम् । | ||
| verse_line2 = अदृष्टाश्रुतवस्तुत्वात् स जीवो यः पुनर्भवः ॥ ३२ ॥ | | verse_line2 = अदृष्टाश्रुतवस्तुत्वात् स जीवो यः पुनर्भवः ॥ ३२ ॥ | ||
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| Line 320: | Line 335: | ||
| verse_line1 = यत्रेमे सदसद्रूपे प्रतिषिद्धे स्वसंविदा । | | verse_line1 = यत्रेमे सदसद्रूपे प्रतिषिद्धे स्वसंविदा । | ||
| verse_line2 = अविद्ययाऽऽत्मनि कृते इति तद्ब्रह्मदर्शनम् ॥ ३३ ॥ | | verse_line2 = अविद्ययाऽऽत्मनि कृते इति तद्ब्रह्मदर्शनम् ॥ ३३ ॥ | ||
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| Line 338: | Line 354: | ||
| verse_line1 = यद्येषोपरता देवी माया वैशारदी मतिः । | | verse_line1 = यद्येषोपरता देवी माया वैशारदी मतिः । | ||
| verse_line2 = सम्पन्न एवेति विदुर्महिमि्न स्वे महीयते ॥ ३४ ॥ | | verse_line2 = सम्पन्न एवेति विदुर्महिमि्न स्वे महीयते ॥ ३४ ॥ | ||
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| Line 355: | Line 372: | ||
| verse_type = shloka | | verse_type = shloka | ||
| verse_line1 = एवं जन्मानि कर्माणि ह्यकर्तुरजनस्य च । वर्णयन्ति स्म कवयो वेदगुह्यानि हृत्पतेः ॥ ३५ ॥ | | verse_line1 = एवं जन्मानि कर्माणि ह्यकर्तुरजनस्य च । वर्णयन्ति स्म कवयो वेदगुह्यानि हृत्पतेः ॥ ३५ ॥ | ||
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| Line 373: | Line 391: | ||
| verse_line1 = इदं भागवतं नाम पुराणं ब्रह्मसम्मितम् । | | verse_line1 = इदं भागवतं नाम पुराणं ब्रह्मसम्मितम् । | ||
| verse_line2 = उत्तमश्लोकचरितं चकार भगवानृषिः ॥ ४० ॥ | | verse_line2 = उत्तमश्लोकचरितं चकार भगवानृषिः ॥ ४० ॥ | ||
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