Bhagavatatatparyanirnaya/C2/S2: Difference between revisions
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| title = द्वितीयोऽध्यायः | | title = द्वितीयोऽध्यायः | ||
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| verse_id = BTN_C02_S02_V02 | | verse_id = BTN_C02_S02_V02 | ||
| Line 13: | Line 11: | ||
| verse_line1 = शब्दस्य हि ब्रह्मण एष पन्था यन्नामभिर्ध्यायति धीरपार्थैः । | | verse_line1 = शब्दस्य हि ब्रह्मण एष पन्था यन्नामभिर्ध्यायति धीरपार्थैः । | ||
| verse_line2 = परिभ्रमंस्तत्र न विन्दतेऽर्थान् मायामये वासनया शयानः ॥२॥ | | verse_line2 = परिभ्रमंस्तत्र न विन्दतेऽर्थान् मायामये वासनया शयानः ॥२॥ | ||
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| Line 31: | Line 30: | ||
| verse_line1 = अतः कविर्नामसु यावदर्थः स्यादप्रमत्तो व्यवसायबुद्धिः । | | verse_line1 = अतः कविर्नामसु यावदर्थः स्यादप्रमत्तो व्यवसायबुद्धिः । | ||
| verse_line2 = सिद्धेऽन्यथार्थे न यतेत तत्तत् परिश्रमं तत्र समीक्षमाणः ॥३॥ | | verse_line2 = सिद्धेऽन्यथार्थे न यतेत तत्तत् परिश्रमं तत्र समीक्षमाणः ॥३॥ | ||
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| Line 49: | Line 49: | ||
| verse_line1 = एवं स्वचित्ते स्वत एव सिद्ध आत्माप््रिायोऽर्थो भगवाननन्तः । | | verse_line1 = एवं स्वचित्ते स्वत एव सिद्ध आत्माप््रिायोऽर्थो भगवाननन्तः । | ||
| verse_line2 = तं निर्वृतो नियतार्थो भजेत संसारहेतूपरमश्च यत्र ॥ ६ ॥ | | verse_line2 = तं निर्वृतो नियतार्थो भजेत संसारहेतूपरमश्च यत्र ॥ ६ ॥ | ||
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| Line 67: | Line 68: | ||
| verse_line1 = स सर्वविद्हृद्यनुभूश्च सर्व आत्मा यथा सुप्तजनेक्षितैकः । | | verse_line1 = स सर्वविद्हृद्यनुभूश्च सर्व आत्मा यथा सुप्तजनेक्षितैकः । | ||
| verse_line2 = तं सत्यमानन्दनिधिं भजेत सर्वात्मनाऽतोऽन्यत आत्मघातः ॥ ७ ॥ | | verse_line2 = तं सत्यमानन्दनिधिं भजेत सर्वात्मनाऽतोऽन्यत आत्मघातः ॥ ७ ॥ | ||
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| Line 85: | Line 87: | ||
| verse_line1 = अदीनलीलाहसितेक्षणोल्लसद्भ्रूभङ्गसंसूचितभूर्यनुग्रहम् । | | verse_line1 = अदीनलीलाहसितेक्षणोल्लसद्भ्रूभङ्गसंसूचितभूर्यनुग्रहम् । | ||
| verse_line2 = ईक्षेत चिन्तामयमेनमीश्वरं यावन्मनो धारणयाऽवतिष्ठते ॥ १३ ॥ | | verse_line2 = ईक्षेत चिन्तामयमेनमीश्वरं यावन्मनो धारणयाऽवतिष्ठते ॥ १३ ॥ | ||
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| Line 103: | Line 106: | ||
| verse_line1 = यावन्न जायेत परावरेऽस्मिन् विश्वेश्वरे द्रष्टरि भक्तियोगः । | | verse_line1 = यावन्न जायेत परावरेऽस्मिन् विश्वेश्वरे द्रष्टरि भक्तियोगः । | ||
| verse_line2 = तावत्स्थवीयः पुरुषस्य रूपं क्रियावसाने प्रयतः स्मरेत ॥ १५ ॥ | | verse_line2 = तावत्स्थवीयः पुरुषस्य रूपं क्रियावसाने प्रयतः स्मरेत ॥ १५ ॥ | ||
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| Line 123: | Line 127: | ||
| verse_line3 = काले च देशे च मनो न सज्जेत् | | verse_line3 = काले च देशे च मनो न सज्जेत् | ||
| verse_line4 = प्राणान्नियच्छेन्मनसा जितासुः ॥ १६ ॥ | | verse_line4 = प्राणान्नियच्छेन्मनसा जितासुः ॥ १६ ॥ | ||
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| Line 143: | Line 148: | ||
| verse_line3 = आत्मानमात्मन्यवरुध्य धीरो | | verse_line3 = आत्मानमात्मन्यवरुध्य धीरो | ||
| verse_line4 = लब्धोपशान्तिर्विरमेत कृत्यात् ॥ १७ ॥ | | verse_line4 = लब्धोपशान्तिर्विरमेत कृत्यात् ॥ १७ ॥ | ||
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| Line 163: | Line 169: | ||
| verse_line3 = न यत्र सत्वं न रजस्तमश्च | | verse_line3 = न यत्र सत्वं न रजस्तमश्च | ||
| verse_line4 = न वै विकारो न महान् प्रधानम् ॥ १८ ॥ | | verse_line4 = न वै विकारो न महान् प्रधानम् ॥ १८ ॥ | ||
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| Line 194: | Line 201: | ||
| verse_line3 = स्थित्वा मुहूर्तार्धमकुण्ठदृष्टि- | | verse_line3 = स्थित्वा मुहूर्तार्धमकुण्ठदृष्टि- | ||
| verse_line4 = र्निर्भिद्य मूर्धन्विसृजेत्परं गतः ॥ २२ ॥ | | verse_line4 = र्निर्भिद्य मूर्धन्विसृजेत्परं गतः ॥ २२ ॥ | ||
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| Line 221: | Line 229: | ||
| verse_line1 = योगेश्वराणां गतिमामनन्ति बहिस्त्रिलोक्याः पवनान्तरात्मा । | | verse_line1 = योगेश्वराणां गतिमामनन्ति बहिस्त्रिलोक्याः पवनान्तरात्मा । | ||
| verse_line2 = न कर्मभिस्तां गतिमाप्नुवन्ति विद्यातपोयोगसमाधिभाजाम् ॥ २४ ॥ | | verse_line2 = न कर्मभिस्तां गतिमाप्नुवन्ति विद्यातपोयोगसमाधिभाजाम् ॥ २४ ॥ | ||
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| Line 241: | Line 250: | ||
| verse_line3 = विधूतकल्कोऽथ हरेरुदस्तात् | | verse_line3 = विधूतकल्कोऽथ हरेरुदस्तात् | ||
| verse_line4 = प्रयाति चक्रं नृप शैंशुमारम् ॥ २५ ॥ | | verse_line4 = प्रयाति चक्रं नृप शैंशुमारम् ॥ २५ ॥ | ||
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| Line 259: | Line 269: | ||
| verse_line1 = योऽन्तः पचति भूतानां यस्तपत्यण्डमध्यगः । | | verse_line1 = योऽन्तः पचति भूतानां यस्तपत्यण्डमध्यगः । | ||
| verse_line2 = सोऽग्निर्वैश्वानरो मार्गो देवानां पितृणां मुनेः ॥ २६ ॥ | | verse_line2 = सोऽग्निर्वैश्वानरो मार्गो देवानां पितृणां मुनेः ॥ २६ ॥ | ||
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| Line 277: | Line 288: | ||
| verse_line1 = देवयानं पिङ्गलाभिरहान्येति शतायुषा । | | verse_line1 = देवयानं पिङ्गलाभिरहान्येति शतायुषा । | ||
| verse_line2 = रात्रीरिडाभिः पितृणां विषुवत्तां सुषुम्नया ॥ २७ ॥ | | verse_line2 = रात्रीरिडाभिः पितृणां विषुवत्तां सुषुम्नया ॥ २७ ॥ | ||
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| Line 295: | Line 307: | ||
| verse_line1 = तद्विश्वनाभिं त्वभिपद्य विष्णोरणीयसा विरजेनात्मनैकम् । | | verse_line1 = तद्विश्वनाभिं त्वभिपद्य विष्णोरणीयसा विरजेनात्मनैकम् । | ||
| verse_line2 = नमस्कृतं ब्रह्मविदामुपैति कल्पायुषो यद्विबुधा रमन्ते ॥२८ ॥ | | verse_line2 = नमस्कृतं ब्रह्मविदामुपैति कल्पायुषो यद्विबुधा रमन्ते ॥२८ ॥ | ||
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| Line 313: | Line 326: | ||
| verse_line1 = न यत्र शोको न जरा न मृत्युर्नाधिर्न चोद्वेग ऋते कुतश्चित् । | | verse_line1 = न यत्र शोको न जरा न मृत्युर्नाधिर्न चोद्वेग ऋते कुतश्चित् । | ||
| verse_line2 = यश्चित्ततोदः क्रिययाऽनिदंविदां दुरन्तदुःखप्रभवानुदर्शनात् ॥ ३० ॥ | | verse_line2 = यश्चित्ततोदः क्रिययाऽनिदंविदां दुरन्तदुःखप्रभवानुदर्शनात् ॥ ३० ॥ | ||
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| Line 333: | Line 347: | ||
| verse_line3 = ज्योतिर्मयो वायुमुपेत्य काले | | verse_line3 = ज्योतिर्मयो वायुमुपेत्य काले | ||
| verse_line4 = वाय्वात्मना खं बृहदात्मलिङ्गम् ॥ ३१ ॥ | | verse_line4 = वाय्वात्मना खं बृहदात्मलिङ्गम् ॥ ३१ ॥ | ||
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| Line 353: | Line 368: | ||
| verse_line3 = श्रोत्रेण चोपेत्य नभोगुणं तत् | | verse_line3 = श्रोत्रेण चोपेत्य नभोगुणं तत् | ||
| verse_line4 = प्रायेण नावृत्तिमुपैति योगी ॥ ३२ ॥ | | verse_line4 = प्रायेण नावृत्तिमुपैति योगी ॥ ३२ ॥ | ||
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| Line 373: | Line 389: | ||
| verse_line3 = मनोमयं देवमयं विकार्यं | | verse_line3 = मनोमयं देवमयं विकार्यं | ||
| verse_line4 = संसाद्य मत्या सह तेन याति ॥ ३३ ॥ | | verse_line4 = संसाद्य मत्या सह तेन याति ॥ ३३ ॥ | ||
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}} | }} | ||
| Line 401: | Line 418: | ||
| verse_line2 = एते सृती ते नृप वेदगीते त्वयाऽभिपृष्टेऽथ सनातने च । | | verse_line2 = एते सृती ते नृप वेदगीते त्वयाऽभिपृष्टेऽथ सनातने च । | ||
| verse_line3 = ये द्वे पुरा ब्रह्मण आह पृष्टः आराधितो भगवान् वासुदेवः ॥३५॥ | | verse_line3 = ये द्वे पुरा ब्रह्मण आह पृष्टः आराधितो भगवान् वासुदेवः ॥३५॥ | ||
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| Line 419: | Line 437: | ||
| verse_line1 = न ह्यतोऽन्यः शिवः पन्थाः विश्रुतः संसृताविह । | | verse_line1 = न ह्यतोऽन्यः शिवः पन्थाः विश्रुतः संसृताविह । | ||
| verse_line2 = वासुदेवे भगवति भक्तियोगो यतो भवेत् ॥ ३६ ॥ | | verse_line2 = वासुदेवे भगवति भक्तियोगो यतो भवेत् ॥ ३६ ॥ | ||
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| Line 437: | Line 456: | ||
| verse_line1 = भगवान् ब्रह्म कार्त्स्न्येन त्रिरन्वीक्ष्य मनीषया । | | verse_line1 = भगवान् ब्रह्म कार्त्स्न्येन त्रिरन्वीक्ष्य मनीषया । | ||
| verse_line2 = तद्धि ह्यपश्यत्कूटस्थे रतिरात्मन् यतो भवेत् ॥ ३७ ॥ | | verse_line2 = तद्धि ह्यपश्यत्कूटस्थे रतिरात्मन् यतो भवेत् ॥ ३७ ॥ | ||
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| Line 455: | Line 475: | ||
| verse_line1 = भगवान्सर्वभूतेषु लक्षितश्चात्मना हरिः । | | verse_line1 = भगवान्सर्वभूतेषु लक्षितश्चात्मना हरिः । | ||
| verse_line2 = दृश्यैर्बुध्यादिभिर्द्रष्टा लक्षणैरनुमापकैः ॥ ३८ ॥ | | verse_line2 = दृश्यैर्बुध्यादिभिर्द्रष्टा लक्षणैरनुमापकैः ॥ ३८ ॥ | ||
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| Line 473: | Line 494: | ||
| verse_line1 = तस्मात्सर्वात्मना राजन्हरिः सर्वत्र सर्वदा । | | verse_line1 = तस्मात्सर्वात्मना राजन्हरिः सर्वत्र सर्वदा । | ||
| verse_line2 = श्रोतव्यः कीर्तितव्यश्च स्मर्तव्यो भगवान्नृणाम् ॥ ३९ ॥ | | verse_line2 = श्रोतव्यः कीर्तितव्यश्च स्मर्तव्यो भगवान्नृणाम् ॥ ३९ ॥ | ||
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