Kathalakshanam/Data: Difference between revisions
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| verse_text = नरसिंहमखिलाज्ञानतिमिराशिशिरद्युतिम् | | verse_text = नरसिंहमखिलाज्ञानतिमिराशिशिरद्युतिम् ।¦सम्प्रणम्य प्रवक्ष्यामि कथालक्षणमञ्जसा ॥1॥ | ||
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| verse_text = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा | | verse_text = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा ।¦तत्त्वनिर्णयमुद्दिश्य केवलं गुरुशिष्ययोः ॥2॥ | ||
| verse_lines = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा ।¦तत्त्वनिर्णयमुद्दिश्य केवलं गुरुशिष्ययोः ॥2॥ | | verse_lines = वादो जल्पो वितण्डेति त्रिविधा विदुषां कथा ।¦तत्त्वनिर्णयमुद्दिश्य केवलं गुरुशिष्ययोः ॥2॥ | ||
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| verse_text = कथाऽन्येषामपि सतां वादो वा समितेः शुभा | | verse_text = कथाऽन्येषामपि सतां वादो वा समितेः शुभा ।¦ख्यात्याद्यर्थं स्पर्धया वा सतां जल्प इतीर्यते ॥3॥ | ||
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| verse_text = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् | | verse_text = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् ।¦स्वयं वा प्राश्निकैर्वादे चिन्तयेत् तत्त्वनिर्णयम् ॥4॥ | ||
| verse_lines = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् ।¦स्वयं वा प्राश्निकैर्वादे चिन्तयेत् तत्त्वनिर्णयम् ॥4॥ | | verse_lines = वितण्डा तु सतामन्यैस्तत्त्वमेषु निगूहितम् ।¦स्वयं वा प्राश्निकैर्वादे चिन्तयेत् तत्त्वनिर्णयम् ॥4॥ | ||
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| verse_text = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः | | verse_text = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः ।¦प्राश्निका इति सम्प्रोक्ता विषमा एक एव वा ॥5॥ | ||
| verse_lines = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः ।¦प्राश्निका इति सम्प्रोक्ता विषमा एक एव वा ॥5॥ | | verse_lines = रागद्वेषविहीनास्तु सर्वविद्याविशारदाः ।¦प्राश्निका इति सम्प्रोक्ता विषमा एक एव वा ॥5॥ | ||
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| verse_text = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः | | verse_text = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।¦एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥ | ||
| verse_lines = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।¦एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥ | | verse_lines = अशेषसंशयच्छेत्ता निःसंशय उदारधीः ।¦एकश्चेत् प्राश्निको ज्ञेयः सर्वदोषविवर्जितः ॥6॥ | ||
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| verse_text = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा | | verse_text = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।¦विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥ | ||
| verse_lines = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।¦विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥ | | verse_lines = एको वा बहवो वा स्युर्विष्णुभक्तिपरास्सदा ।¦विष्णुभक्तिर्हि सर्वेषां सद्गुणानां स्वलक्षणम् ॥7॥ | ||
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| verse_text = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये | | verse_text = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।¦नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।¦अन्यार्थ एवागमस्य वक्तव्यः प्रतिवादिना ॥8॥ | ||
| verse_lines = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।¦नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।¦अन्यार्थ एवागमस्य वक्तव्यः प्रतिवादिना ॥8॥ | | verse_lines = पृष्टेनागम एवादौ वक्तव्यः साध्यसिद्धये ।¦नैषा तर्केणापनेया मतिरित्याह हि श्रुतिः ।¦अन्यार्थ एवागमस्य वक्तव्यः प्रतिवादिना ॥8॥ | ||
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