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BramhasutraBhashyam — सूची
सूत्रसूची
| verse id | verse type | verse text |
|---|---|---|
| BS_C01_S01_V01 | sutra | ओम् ओम् अथातो ब्रह्मजिज्ञासा ओम् ॥ 01-01-01 ॥ |
| BS_C01_S01_V01 | sutra | ओम् ओम् अथातो ब्रह्मजिज्ञासा ओम् ॥ 01-01-01 ॥ |
| BS_C01_S01_V01 | sutra | ॐ ॐअथातो ब्रह्मजिज्ञासा ॐ ॥ 01-01 ॥ |
| BS_C01_S01_V01 | sutra | ॐ ॐअथातो ब्रह्मजिज्ञासा ॐ ॥ 01-01 ॥ |
| BS_C01_S01_V02 | sutra | ओं जन्माद्यस्य यतः ओम् ॥ 01-01-02 ॥ |
| BS_C01_S01_V02 | sutra | ओं जन्माद्यस्य यतः ओम् ॥ 01-01-02 ॥ |
| BS_C01_S01_V02 | sutra | ॐ जन्माद्यस्य यतः ॐ ॥ 02-02 ॥ |
| BS_C01_S01_V02 | sutra | ॐ जन्माद्यस्य यतः ॐ ॥ 02-02 ॥ |
| BS_C01_S01_V03 | sutra | ओं शास्त्रयोनित्वात् ओम् ॥ 01-01-03 ॥ |
| BS_C01_S01_V03 | sutra | ॐ शास्त्रयोनित्वात् ॐ ॥ 03-03 ॥ |
| BS_C01_S01_V03 | sutra | ॐ शास्त्रयोनित्वात् ॐ ॥ 03-03 ॥ |
| BS_C01_S01_V03 | sutra | ओं शास्त्रयोनित्वात् ओम् ॥ 01-01-03 ॥ |
| BS_C01_S01_V04 | sutra | ॐ तत्तु समन्वयात् ॐ ॥ 04-04 ॥ |
| BS_C01_S01_V04 | sutra | ओं तत्तु समन्वयात् ओम् ॥ 01-01-04 ॥ |
| BS_C01_S01_V04 | sutra | ॐ तत्तु समन्वयात् ॐ ॥ 04-04 ॥ |
| BS_C01_S01_V04 | sutra | ओं तत्तु समन्वयात् ओम् ॥ 01-01-04 ॥ |
| BS_C01_S01_V05 | sutra | ॐ ईक्षतेर्नाशब्दम् ॐ ॥ 05-05 ॥ |
| BS_C01_S01_V05 | sutra | ओम् ईक्षतेर्नाशब्दम् ओम् ॥ 01-01-05 ॥ |
| BS_C01_S01_V05 | sutra | ओम् ईक्षतेर्नाशब्दम् ओम् ॥ 01-01-05 ॥ |
| BS_C01_S01_V05 | sutra | ॐ ईक्षतेर्नाशब्दम् ॐ ॥ 05-05 ॥ |
| BS_C01_S01_V06 | sutra | ओं गौणश्चेन्नात्मशब्दात् ओम् ॥ 01-01-06 ॥ |
| BS_C01_S01_V06 | sutra | ओं गौणश्चेन्नात्मशब्दात् ओम् ॥ 01-01-06 ॥ |
| BS_C01_S01_V06 | sutra | ॐ गौणश्चेन्नात्मशब्दात् ॐ ॥ 06-06 ॥ |
| BS_C01_S01_V06 | sutra | ॐ गौणश्चेन्नात्मशब्दात् ॐ ॥ 06-06 ॥ |
| BS_C01_S01_V07 | sutra | ओं तन्निष्ठस्य मोक्षोपदेशात् ओम् ॥ 01-01-07 ॥ |
| BS_C01_S01_V07 | sutra | ॐ तन्निष्ठस्य मोक्षोपदेशात् ॐ ॥ 07-07 ॥ |
| BS_C01_S01_V07 | sutra | ओं तन्निष्ठस्य मोक्षोपदेशात् ओम् ॥ 01-01-07 ॥ |
| BS_C01_S01_V07 | sutra | ॐ तन्निष्ठस्य मोक्षोपदेशात् ॐ ॥ 07-07 ॥ |
| BS_C01_S01_V08 | sutra | ओं हेयत्वावचनाच्च ओम् ॥ 01-01-08 ॥ |
| BS_C01_S01_V08 | sutra | ॐ हेयत्वावचनाच्च ॐ ॥ 08-08 ॥ |
| BS_C01_S01_V08 | sutra | ओं हेयत्वावचनाच्च ओम् ॥ 01-01-08 ॥ |
| BS_C01_S01_V08 | sutra | ॐ हेयत्वावचनाच्च ॐ ॥ 08-08 ॥ |
| BS_C01_S01_V09 | sutra | ॐ स्वाप्ययात् ॐ ॥ 09-09 ॥ |
| BS_C01_S01_V09 | sutra | ओं स्वाप्ययात् ओम् ॥ 01-01-09 ॥ |
| BS_C01_S01_V09 | sutra | ॐ स्वाप्ययात् ॐ ॥ 09-09 ॥ |
| BS_C01_S01_V09 | sutra | ओं स्वाप्ययात् ओम् ॥ 01-01-09 ॥ |
| BS_C01_S01_V10 | sutra | ओं गतिसामान्यात् ओम् ॥ 01-01-10 ॥ |
| BS_C01_S01_V10 | sutra | ओं गतिसामान्यात् ओम् ॥ 01-01-10 ॥ |
| BS_C01_S01_V10 | sutra | ॐ गतिसामान्यात् ॐ ॥ 10-10 ॥ |
| BS_C01_S01_V10 | sutra | ॐ गतिसामान्यात् ॐ ॥ 10-10 ॥ |
| BS_C01_S01_V11 | sutra | ओं श्रुतत्वाच्च ओम् ॥ 01-01-11 ॥ |
| BS_C01_S01_V11 | sutra | ॐ श्रुतत्वाच्च ॐ ॥ 11-11 ॥ |
| BS_C01_S01_V11 | sutra | ॐ श्रुतत्वाच्च ॐ ॥ 11-11 ॥ |
| BS_C01_S01_V11 | sutra | ओं श्रुतत्वाच्च ओम् ॥ 01-01-11 ॥ |
| BS_C01_S01_V12 | sutra | ओम् आनन्दमयोऽभ्यासात् ओम् ॥ 01-01-12 ॥ |
| BS_C01_S01_V12 | sutra | ॐ आनन्दमयोऽभ्यासात् ॐ ॥ 12-12 ॥ |
| BS_C01_S01_V12 | sutra | ओम् आनन्दमयोऽभ्यासात् ओम् ॥ 01-01-12 ॥ |
| BS_C01_S01_V12 | sutra | ॐ आनन्दमयोऽभ्यासात् ॐ ॥ 12-12 ॥ |
| BS_C01_S01_V13 | sutra | ॐ विकारशब्दान्नेति चेन्न प्राचुर्यात् ॐ ॥ 13-13 ॥ |
| BS_C01_S01_V13 | sutra | ओं विकारशब्दान्नेति चेन्न प्राचुर्यात् ओम् ॥ 01-01-13 ॥ |
| BS_C01_S01_V13 | sutra | ओं विकारशब्दान्नेति चेन्न प्राचुर्यात् ओम् ॥ 01-01-13 ॥ |
| BS_C01_S01_V13 | sutra | ॐ विकारशब्दान्नेति चेन्न प्राचुर्यात् ॐ ॥ 13-13 ॥ |
| BS_C01_S01_V14 | sutra | ॐ तद्धेतुव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 14-14 ॥ |
| BS_C01_S01_V14 | sutra | ओं तद्धेतुव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-01-14 ॥ |
| BS_C01_S01_V14 | sutra | ओं तद्धेतुव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-01-14 ॥ |
| BS_C01_S01_V14 | sutra | ॐ तद्धेतुव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 14-14 ॥ |
| BS_C01_S01_V15 | sutra | ॐ मान्त्रवर्णिकमेव च गीयते ॐ ॥ 15-15 ॥ |
| BS_C01_S01_V15 | sutra | ओं मान्त्रवर्णिकमेव च गीयते ओम् ॥ 01-01-15 ॥ |
| BS_C01_S01_V15 | sutra | ॐ मान्त्रवर्णिकमेव च गीयते ॐ ॥ 15-15 ॥ |
| BS_C01_S01_V15 | sutra | ओं मान्त्रवर्णिकमेव च गीयते ओम् ॥ 01-01-15 ॥ |
| BS_C01_S01_V16 | sutra | ॐ नेतरोऽनुपपत्तेः ॐ ॥ 16-16 ॥ |
| BS_C01_S01_V16 | sutra | ओं नेतरोऽनुपपत्तेः ओम् ॥ 01-01-16 ॥ |
| BS_C01_S01_V16 | sutra | ॐ नेतरोऽनुपपत्तेः ॐ ॥ 16-16 ॥ |
| BS_C01_S01_V16 | sutra | ओं नेतरोऽनुपपत्तेः ओम् ॥ 01-01-16 ॥ |
| BS_C01_S01_V17 | sutra | ओं भेदव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-01-17 ॥ |
| BS_C01_S01_V17 | sutra | ओं भेदव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-01-17 ॥ |
| BS_C01_S01_V17 | sutra | ॐ भेदव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 17-17 ॥ |
| BS_C01_S01_V17 | sutra | ॐ भेदव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 17-17 ॥ |
| BS_C01_S01_V18 | sutra | ॐ कामाच्च नानुमानापेक्षा ॐ ॥ 18-18 ॥ |
| BS_C01_S01_V18 | sutra | ॐ कामाच्च नानुमानापेक्षा ॐ ॥ 18-18 ॥ |
| BS_C01_S01_V18 | sutra | ओं कामाच्च नानुमानापेक्षा ओम् ॥ 18-18 ॥ |
| BS_C01_S01_V18 | sutra | ओं कामाच्च नानुमानापेक्षा ओम् ॥ 18-18 ॥ |
| BS_C01_S01_V19 | sutra | ॐ अस्मिन्नस्य च तद्योगं शास्ति ॐ ॥ 19-19 ॥ |
| BS_C01_S01_V19 | sutra | ॐ अस्मिन्नस्य च तद्योगं शास्ति ॐ ॥ 19-19 ॥ |
| BS_C01_S01_V19 | sutra | ओम् अस्मिन्नस्य च तद्योगं शास्ति ओम् ॥ 01-01-19 ॥ |
| BS_C01_S01_V19 | sutra | ओम् अस्मिन्नस्य च तद्योगं शास्ति ओम् ॥ 01-01-19 ॥ |
| BS_C01_S01_V20 | sutra | ॐ अन्तस्तद्धर्मोपदेशात् ॐ ॥ 20-20 ॥ |
| BS_C01_S01_V20 | sutra | ॐ अन्तस्तद्धर्मोपदेशात् ॐ ॥ 20-20 ॥ |
| BS_C01_S01_V20 | sutra | ओं अन्तस्तद्धर्मोपदेशात् ओम् ॥ 01-01-20 ॥ |
| BS_C01_S01_V20 | sutra | ओं अन्तस्तद्धर्मोपदेशात् ओम् ॥ 01-01-20 ॥ |
| BS_C01_S01_V21 | sutra | ओं भेदव्यपदेशाच्चान्यः ओम् ॥ 01-01-21 ॥ |
| BS_C01_S01_V21 | sutra | ॐ भेदव्यपदेशाच्चान्यः ॐ ॥ 21-21 ॥ |
| BS_C01_S01_V21 | sutra | ॐ भेदव्यपदेशाच्चान्यः ॐ ॥ 21-21 ॥ |
| BS_C01_S01_V21 | sutra | ओं भेदव्यपदेशाच्चान्यः ओम् ॥ 01-01-21 ॥ |
| BS_C01_S01_V22 | sutra | ओम् आकाशस्तल्लिङ्गात् ओम् ॥ 01-01-22 ॥ |
| BS_C01_S01_V22 | sutra | ॐ आकाशस्तल्लिङ्गात् ॐ ॥ 22-22 ॥ |
| BS_C01_S01_V22 | sutra | ओम् आकाशस्तल्लिङ्गात् ओम् ॥ 01-01-22 ॥ |
| BS_C01_S01_V22 | sutra | ॐ आकाशस्तल्लिङ्गात् ॐ ॥ 22-22 ॥ |
| BS_C01_S01_V23 | sutra | ओम् अत एव प्राणः ओम् ॥ 01-01-23 ॥ |
| BS_C01_S01_V23 | sutra | ॐ अत एव प्राणः ॐ ॥ 23-23 ॥ |
| BS_C01_S01_V23 | sutra | ओम् अत एव प्राणः ओम् ॥ 01-01-23 ॥ |
| BS_C01_S01_V23 | sutra | ॐ अत एव प्राणः ॐ ॥ 23-23 ॥ |
| BS_C01_S01_V24 | sutra | ओं ज्योतिश्चरणाभिधानात् ओम् ॥ 24-24 ॥ |
| BS_C01_S01_V24 | sutra | ओं ज्योतिश्चरणाभिधानात् ओम् ॥ 24-24 ॥ |
| BS_C01_S01_V24 | sutra | ॐ ज्योतिश्चरणाभिधानात् ॐ ॥ 24-24 ॥ |
| BS_C01_S01_V24 | sutra | ॐ ज्योतिश्चरणाभिधानात् ॐ ॥ 24-24 ॥ |
| BS_C01_S01_V25 | sutra | ओं छन्दोऽभिधानान्नेति चेन्न तथा चेतोऽर्पणनिगदात् तथा हि दर्शनम् ओं॥ 01-01-25 ॥ |
| BS_C01_S01_V25 | sutra | ॐ छन्दोऽभिधानान्नेति चेन्न तथा चेतोऽर्पणनिगदात् तथा हि दर्शनम् ॐ॥ 25-25 ॥ |
| BS_C01_S01_V25 | sutra | ॐ छन्दोऽभिधानान्नेति चेन्न तथा चेतोऽर्पणनिगदात् तथा हि दर्शनम् ॐ॥ 25-25 ॥ |
| BS_C01_S01_V25 | sutra | ओं छन्दोऽभिधानान्नेति चेन्न तथा चेतोऽर्पणनिगदात् तथा हि दर्शनम् ओं॥ 01-01-25 ॥ |
| BS_C01_S01_V26 | sutra | ओं भूतादिपादव्यपदेशोपपत्तेश्चैवम् ओम् ॥ 01-01-26 ॥ |
| BS_C01_S01_V26 | sutra | ॐ भूतादिपादव्यपदेशोपपत्तेश्चैवम् ॐ ॥ 26-26 ॥ |
| BS_C01_S01_V26 | sutra | ओं भूतादिपादव्यपदेशोपपत्तेश्चैवम् ओम् ॥ 01-01-26 ॥ |
| BS_C01_S01_V26 | sutra | ॐ भूतादिपादव्यपदेशोपपत्तेश्चैवम् ॐ ॥ 26-26 ॥ |
| BS_C01_S01_V27 | sutra | ॐ उपदेशभेदान्नेति चेन्नोभयस्मिन्नप्यविरोधात् ॐ ॥ 27-27॥ |
| BS_C01_S01_V27 | sutra | ओम् उपदेशभेदान्नेति चेन्नोभयस्मिन्नप्यविरोधात् ओम् ॥ 01-01-27॥ |
| BS_C01_S01_V27 | sutra | ॐ उपदेशभेदान्नेति चेन्नोभयस्मिन्नप्यविरोधात् ॐ ॥ 27-27॥ |
| BS_C01_S01_V27 | sutra | ओम् उपदेशभेदान्नेति चेन्नोभयस्मिन्नप्यविरोधात् ओम् ॥ 01-01-27॥ |
| BS_C01_S01_V28 | sutra | ॐ प्राणस्तथाऽनुगमात् ॐ ॥ 28-28 ॥ |
| BS_C01_S01_V28 | sutra | ॐ प्राणस्तथाऽनुगमात् ॐ ॥ 28-28 ॥ |
| BS_C01_S01_V28 | sutra | ओं प्राणस्तथाऽनुगमात् ओम् ॥ 01-01-28 ॥ |
| BS_C01_S01_V28 | sutra | ओं प्राणस्तथाऽनुगमात् ओम् ॥ 01-01-28 ॥ |
| BS_C01_S01_V29 | sutra | ओं न वक्तुरात्मोपदेशादिति चेदध्यात्मसम्बन्धभूमा ह्यस्मिन् ओम् ॥ 01-01-29 ॥ |
| BS_C01_S01_V29 | sutra | ॐ न वक्तुरात्मोपदेशादिति चेदध्यात्मसम्भन्धभूमा ह्यस्मिन् ॐ ॥ 29-29 ॥ |
| BS_C01_S01_V29 | sutra | ओं न वक्तुरात्मोपदेशादिति चेदध्यात्मसम्बन्धभूमा ह्यस्मिन् ओम् ॥ 01-01-29 ॥ |
| BS_C01_S01_V29 | sutra | ॐ न वक्तुरात्मोपदेशादिति चेदध्यात्मसम्भन्धभूमा ह्यस्मिन् ॐ ॥ 29-29 ॥ |
| BS_C01_S01_V30 | sutra | ॐ शास्त्रदृष्ट्यातूपदेशो वामदेववत् ॐ ॥ 30-30 ॥ |
| BS_C01_S01_V30 | sutra | ओं शास्त्रदृष्ट्यातूपदेशो वामदेववत् ओम् ॥ 01-01-30 ॥ |
| BS_C01_S01_V30 | sutra | ॐ शास्त्रदृष्ट्यातूपदेशो वामदेववत् ॐ ॥ 30-30 ॥ |
| BS_C01_S01_V30 | sutra | ओं शास्त्रदृष्ट्यातूपदेशो वामदेववत् ओम् ॥ 01-01-30 ॥ |
| BS_C01_S01_V31 | sutra | ओं जीवमुख्यप्राणलिङ्गान्नेति चेन्नोपासात्रैविध्यादाश्रितत्वादिह तद्योगात् ओम् ॥ 01-01-31 ॥ |
| BS_C01_S01_V31 | sutra | ॐ जीवमुख्यप्राणलिङ्गान्नेति चेन्नोपासात्रैविध्यादाश्रितत्वादिह तद्योगात् ॐ ॥ 31-31 ॥ |
| BS_C01_S01_V31 | sutra | ॐ जीवमुख्यप्राणलिङ्गान्नेति चेन्नोपासात्रैविध्यादाश्रितत्वादिह तद्योगात् ॐ ॥ 31-31 ॥ |
| BS_C01_S01_V31 | sutra | ओं जीवमुख्यप्राणलिङ्गान्नेति चेन्नोपासात्रैविध्यादाश्रितत्वादिह तद्योगात् ओम् ॥ 01-01-31 ॥ |
| BS_C01_S02_V01 | sutra | ॐ सर्वत्र प्रसिद्धोपदेशात् ॐ ॥ 01-32 ॥ |
| BS_C01_S02_V01 | sutra | ओं सर्वत्र प्रसिद्धोपदेशात् ओम् ॥ 01-02-01 ॥ |
| BS_C01_S02_V01 | sutra | ॐ सर्वत्र प्रसिद्धोपदेशात् ॐ ॥ 01-32 ॥ |
| BS_C01_S02_V01 | sutra | ओं सर्वत्र प्रसिद्धोपदेशात् ओम् ॥ 01-02-01 ॥ |
| BS_C01_S02_V02 | sutra | ॐ विवक्षितगुणोपपत्तेश्च ॐ ॥ 02-33 ॥ |
| BS_C01_S02_V02 | sutra | ओं विवक्षितगुणोपपत्तेश्च ओम् ॥ 01-02-02 ॥ |
| BS_C01_S02_V02 | sutra | ओं विवक्षितगुणोपपत्तेश्च ओम् ॥ 01-02-02 ॥ |
| BS_C01_S02_V02 | sutra | ॐ विवक्षितगुणोपपत्तेश्च ॐ ॥ 02-33 ॥ |
| BS_C01_S02_V03 | sutra | ओम् अनुपपत्तेस्तुन शारीरः ओम् ॥ 01-02-03 ॥ |
| BS_C01_S02_V03 | sutra | ॐ अनुपपत्तेस्तुन शारीरः ॐ ॥ 03-34 ॥ |
| BS_C01_S02_V03 | sutra | ओम् अनुपपत्तेस्तुन शारीरः ओम् ॥ 01-02-03 ॥ |
| BS_C01_S02_V03 | sutra | ॐ अनुपपत्तेस्तुन शारीरः ॐ ॥ 03-34 ॥ |
| BS_C01_S02_V04 | sutra | ओं कर्मकर्तृव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-02-04 ॥ |
| BS_C01_S02_V04 | sutra | ओं कर्मकर्तृव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-02-04 ॥ |
| BS_C01_S02_V04 | sutra | ॐ कर्मकर्तृव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 04-35 ॥ |
| BS_C01_S02_V04 | sutra | ॐ कर्मकर्तृव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 04-35 ॥ |
| BS_C01_S02_V05 | sutra | ॐ शब्दविशेषात् ॐ ॥ 05-36 ॥ |
| BS_C01_S02_V05 | sutra | ओं शब्दविशेषात् ओम् ॥ 05-36 ॥ |
| BS_C01_S02_V05 | sutra | ओं शब्दविशेषात् ओम् ॥ 05-36 ॥ |
| BS_C01_S02_V05 | sutra | ॐ शब्दविशेषात् ॐ ॥ 05-36 ॥ |
| BS_C01_S02_V06 | sutra | ओं स्मृतेश्च ओम् ॥ 01-02-06 ॥ |
| BS_C01_S02_V06 | sutra | ओं स्मृतेश्च ओम् ॥ 01-02-06 ॥ |
| BS_C01_S02_V06 | sutra | ॐ स्मृतेश्च ॐ ॥ 06-37 ॥ |
| BS_C01_S02_V06 | sutra | ॐ स्मृतेश्च ॐ ॥ 06-37 ॥ |
| BS_C01_S02_V07 | sutra | ॐ अर्भकौकस्त्वात् तद्व्यपदेशाच्च नेति चेन्न निचाय्यत्वादेवं व्योमवच्च ॐ ॥07-38 ॥ |
| BS_C01_S02_V07 | sutra | ॐ अर्भकौकस्त्वात् तद्व्यपदेशाच्च नेति चेन्न निचाय्यत्वादेवं व्योमवच्च ॐ ॥07-38 ॥ |
| BS_C01_S02_V07 | sutra | ओम् अर्भकौकस्त्वात् तद्व्यपदेशाच्च नेति चेन्न निचाय्यत्वादेवं व्योमवच्च ओम् ॥01-02-07 ॥ |
| BS_C01_S02_V07 | sutra | ओम् अर्भकौकस्त्वात् तद्व्यपदेशाच्च नेति चेन्न निचाय्यत्वादेवं व्योमवच्च ओम् ॥01-02-07 ॥ |
| BS_C01_S02_V08 | sutra | ॐ सम्भोगप्राप्तिरिति चेन्न वैशेष्यात् ॐ ॥ 08-39 ॥ |
| BS_C01_S02_V08 | sutra | ॐ सम्भोगप्राप्तिरिति चेन्न वैशेष्यात् ॐ ॥ 08-39 ॥ |
| BS_C01_S02_V08 | sutra | ओं सम्भोगप्राप्तिरिति चेन्न वैशेष्यात् ओम् ॥ 08-39 ॥ |
| BS_C01_S02_V08 | sutra | ओं सम्भोगप्राप्तिरिति चेन्न वैशेष्यात् ओम् ॥ 08-39 ॥ |
| BS_C01_S02_V09 | sutra | ओम् अत्ताचराचरग्रहणात् ओम् ॥ 09-40 ॥ |
| BS_C01_S02_V09 | sutra | ॐ अत्ताचराचरग्रहणात् ॐ ॥ 09-40 ॥ |
| BS_C01_S02_V09 | sutra | ओम् अत्ताचराचरग्रहणात् ओम् ॥ 09-40 ॥ |
| BS_C01_S02_V09 | sutra | ॐ अत्ताचराचरग्रहणात् ॐ ॥ 09-40 ॥ |
| BS_C01_S02_V10 | sutra | ओं प्रकरणाच्च ओम् ॥ 01-02-10 ॥ |
| BS_C01_S02_V10 | sutra | ओं प्रकरणाच्च ओम् ॥ 01-02-10 ॥ |
| BS_C01_S02_V10 | sutra | ॐ प्रकरणाच्च ॐ ॥ 10-41 ॥ |
| BS_C01_S02_V10 | sutra | ॐ प्रकरणाच्च ॐ ॥ 10-41 ॥ |
| BS_C01_S02_V11 | sutra | ओं गुहां प्रविष्टावात्मानौ हि तद्दर्शनात् ओम् ॥ 01-02-11 ॥ |
| BS_C01_S02_V11 | sutra | ॐ गुहां प्रविष्टावात्मानौ हि तद्दर्शनात् ॐ ॥ 11-42 ॥ |
| BS_C01_S02_V11 | sutra | ॐ गुहां प्रविष्टावात्मानौ हि तद्दर्शनात् ॐ ॥ 11-42 ॥ |
| BS_C01_S02_V11 | sutra | ओं गुहां प्रविष्टावात्मानौ हि तद्दर्शनात् ओम् ॥ 01-02-11 ॥ |
| BS_C01_S02_V12 | sutra | ओं विशेषणाच्च ओम् ॥ 01-02-12 ॥ |
| BS_C01_S02_V12 | sutra | ओं विशेषणाच्च ओम् ॥ 01-02-12 ॥ |
| BS_C01_S02_V12 | sutra | ॐ विशेषणाच्च ॐ ॥ 12-43 ॥ |
| BS_C01_S02_V12 | sutra | ॐ विशेषणाच्च ॐ ॥ 12-43 ॥ |
| BS_C01_S02_V13 | sutra | ॐ अन्तर उपपत्तेः ॐ ॥ 13-44 ॥ |
| BS_C01_S02_V13 | sutra | ओम् अन्तर उपपत्तेः ओम् ॥ 01-02-13 ॥ |
| BS_C01_S02_V13 | sutra | ओम् अन्तर उपपत्तेः ओम् ॥ 01-02-13 ॥ |
| BS_C01_S02_V13 | sutra | ॐ अन्तर उपपत्तेः ॐ ॥ 13-44 ॥ |
| BS_C01_S02_V14 | sutra | ओं स्थानादिव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-02-14 ॥ |
| BS_C01_S02_V14 | sutra | ॐ स्थानादिव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 14-45 ॥ |
| BS_C01_S02_V14 | sutra | ॐ स्थानादिव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 14-45 ॥ |
| BS_C01_S02_V14 | sutra | ओं स्थानादिव्यपदेशाच्च ओम् ॥ 01-02-14 ॥ |
| BS_C01_S02_V15 | sutra | ॐ सुखविशिष्टाभिधानादेव च ॐ ॥ 15-46 ॥ |
| BS_C01_S02_V15 | sutra | ॐ सुखविशिष्टाभिधानादेव च ॐ ॥ 15-46 ॥ |
| BS_C01_S02_V15 | sutra | ओं सुखविशिष्टाभिधानादेव च ओम् ॥ 01-02-15 ॥ |
| BS_C01_S02_V15 | sutra | ओं सुखविशिष्टाभिधानादेव च ओम् ॥ 01-02-15 ॥ |
| BS_C01_S02_V16 | sutra | ओं श्रुतोपनिषत्कगत्यभिधानाच्च ओम् ॥ 01-02-16 ॥ |
| BS_C01_S02_V16 | sutra | ॐ श्रुतोपनिषत्कगत्यभिधानाच्च ॐ ॥ 16-47 ॥ |
| BS_C01_S02_V16 | sutra | ओं श्रुतोपनिषत्कगत्यभिधानाच्च ओम् ॥ 01-02-16 ॥ |
| BS_C01_S02_V16 | sutra | ॐ श्रुतोपनिषत्कगत्यभिधानाच्च ॐ ॥ 16-47 ॥ |
| BS_C01_S02_V17 | sutra | ओम् अनवस्थितेरसम्भवाच्च नेतरः ओम् ॥ 01-02-17॥ |
| BS_C01_S02_V17 | sutra | ओम् अनवस्थितेरसम्भवाच्च नेतरः ओम् ॥ 01-02-17॥ |
| BS_C01_S02_V17 | sutra | ॐ अनवस्थितेरसम्भवाच्च नेतरः ॐ ॥ 17-48 ॥ |
| BS_C01_S02_V17 | sutra | ॐ अनवस्थितेरसम्भवाच्च नेतरः ॐ ॥ 17-48 ॥ |
| BS_C01_S02_V18 | sutra | ॐ अन्तर्याम्यधिदैवादिषु तद्धर्मव्यपदेशात् ॐ ॥ 18-49 ॥ |
| BS_C01_S02_V18 | sutra | ओम् अन्तर्याम्यधिदैवादिषु तद्धर्मव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-02-18 ॥ |
| BS_C01_S02_V18 | sutra | ॐ अन्तर्याम्यधिदैवादिषु तद्धर्मव्यपदेशात् ॐ ॥ 18-49 ॥ |
| BS_C01_S02_V18 | sutra | ओम् अन्तर्याम्यधिदैवादिषु तद्धर्मव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-02-18 ॥ |
| BS_C01_S02_V19 | sutra | ॐ न च स्मार्तमतद्धर्माभिलापात् ॐ ॥ 19-50 ॥ |
| BS_C01_S02_V19 | sutra | ॐ न च स्मार्तमतद्धर्माभिलापात् ॐ ॥ 19-50 ॥ |
| BS_C01_S02_V19 | sutra | ओं न च स्मार्तमतद्धर्माभिलापात् ओम् ॥ 01-02-19 ॥ |
| BS_C01_S02_V19 | sutra | ओं न च स्मार्तमतद्धर्माभिलापात् ओम् ॥ 01-02-19 ॥ |
| BS_C01_S02_V20 | sutra | ॐ शारीरश्चोभयेऽपि हि भेदेनैनमधीयते ॐ ॥ 20-51 ॥ |
| BS_C01_S02_V20 | sutra | ॐ शारीरश्चोभयेऽपि हि भेदेनैनमधीयते ॐ ॥ 20-51 ॥ |
| BS_C01_S02_V20 | sutra | ओं शारीरश्चोभयेऽपि हि भेदेनैनमधीयते ओम् ॥ 01-02-20 ॥ |
| BS_C01_S02_V20 | sutra | ओं शारीरश्चोभयेऽपि हि भेदेनैनमधीयते ओम् ॥ 01-02-20 ॥ |
| BS_C01_S02_V21 | sutra | ॐ अदृश्यत्वादिगुणको धर्मोक्तेः ॐ ॥ 21-52 ॥ |
| BS_C01_S02_V21 | sutra | ओम् अदृश्यत्वादिगुणको धर्मोक्तेः ओम् ॥ 01-02-21 ॥ |
| BS_C01_S02_V21 | sutra | ओम् अदृश्यत्वादिगुणको धर्मोक्तेः ओम् ॥ 01-02-21 ॥ |
| BS_C01_S02_V21 | sutra | ॐ अदृश्यत्वादिगुणको धर्मोक्तेः ॐ ॥ 21-52 ॥ |
| BS_C01_S02_V22 | sutra | ओं विशेषणभेदव्यपदेशाभ्यां नेतरौ ओम् ॥ 01-02-22 ॥ |
| BS_C01_S02_V22 | sutra | ॐ विशेषणभेदव्यपदेशाभ्यां नेतरौ ॐ ॥ 22-53 ॥ |
| BS_C01_S02_V22 | sutra | ओं विशेषणभेदव्यपदेशाभ्यां नेतरौ ओम् ॥ 01-02-22 ॥ |
| BS_C01_S02_V22 | sutra | ॐ विशेषणभेदव्यपदेशाभ्यां नेतरौ ॐ ॥ 22-53 ॥ |
| BS_C01_S02_V23 | sutra | ओं रूपोपन्यासाच्च ओम् ॥ 01-02-23 ॥ |
| BS_C01_S02_V23 | sutra | ॐ रूपोपन्यासाच्च ॐ ॥ 23 ॥ |
| BS_C01_S02_V23 | sutra | ॐ रूपोपन्यासाच्च ॐ ॥ 23 ॥ |
| BS_C01_S02_V23 | sutra | ओं रूपोपन्यासाच्च ओम् ॥ 01-02-23 ॥ |
| BS_C01_S02_V24 | sutra | ॐ वैश्वानरः साधारणशब्दविशेषात् ॐ ॥ 24-55॥ |
| BS_C01_S02_V24 | sutra | ओं वैश्वानरः साधारणशब्दविशेषात् ओम् ॥ 01-02-24॥ |
| BS_C01_S02_V24 | sutra | ॐ वैश्वानरः साधारणशब्दविशेषात् ॐ ॥ 24-55॥ |
| BS_C01_S02_V24 | sutra | ओं वैश्वानरः साधारणशब्दविशेषात् ओम् ॥ 01-02-24॥ |
| BS_C01_S02_V25 | sutra | ॐ स्मर्यमाणमनुमानं स्यादिति ॐ ॥25-56॥ |
| BS_C01_S02_V25 | sutra | ओं स्मर्यमाणमनुमानं स्यादिति ओम् ॥01-02-25॥ |
| BS_C01_S02_V25 | sutra | ॐ स्मर्यमाणमनुमानं स्यादिति ॐ ॥25-56॥ |
| BS_C01_S02_V25 | sutra | ओं स्मर्यमाणमनुमानं स्यादिति ओम् ॥01-02-25॥ |
| BS_C01_S02_V26 | sutra | ॐ शब्दादिभ्योऽन्तः प्रतिष्ठानान्नेति चेन्न तथा दृष्ट्युपदेशादसम्भवात् पुरुषविधमपि चैनमधीयते ॐ ॥ 26-57 ॥ |
| BS_C01_S02_V26 | sutra | ओं शब्दादिभ्योऽन्तः प्रतिष्ठानान्नेति चेन्न तथा दृष्ट्युपदेशादसम्भवात् पुरुषविधमपि चैनमधीयते ओम् ॥ 26-57 ॥ |
| BS_C01_S02_V26 | sutra | ॐ शब्दादिभ्योऽन्तः प्रतिष्ठानान्नेति चेन्न तथा दृष्ट्युपदेशादसम्भवात् पुरुषविधमपि चैनमधीयते ॐ ॥ 26-57 ॥ |
| BS_C01_S02_V26 | sutra | ओं शब्दादिभ्योऽन्तः प्रतिष्ठानान्नेति चेन्न तथा दृष्ट्युपदेशादसम्भवात् पुरुषविधमपि चैनमधीयते ओम् ॥ 26-57 ॥ |
| BS_C01_S02_V27 | sutra | ओम् अत एव न देवता भूतं च ओम् ॥ 01-02-27॥ |
| BS_C01_S02_V27 | sutra | ॐ अत एव न देवता भूतं च ॐ ॥ 27-58॥ |
| BS_C01_S02_V27 | sutra | ओम् अत एव न देवता भूतं च ओम् ॥ 01-02-27॥ |
| BS_C01_S02_V27 | sutra | ॐ अत एव न देवता भूतं च ॐ ॥ 27-58॥ |
| BS_C01_S02_V28 | sutra | ओं साक्षादप्यविरोधं जैमिनिः ओम् ॥ 01-02-28 ॥ |
| BS_C01_S02_V28 | sutra | ओं साक्षादप्यविरोधं जैमिनिः ओम् ॥ 01-02-28 ॥ |
| BS_C01_S02_V28 | sutra | ॐ साक्षादप्यविरोधं जैमिनिः ॐ ॥ 28-59 ॥ |
| BS_C01_S02_V28 | sutra | ॐ साक्षादप्यविरोधं जैमिनिः ॐ ॥ 28-59 ॥ |
| BS_C01_S02_V29 | sutra | ओम् अभिव्यक्तेरित्याश्मरथ्यः ओम् ॥ 01-02-29 ॥ |
| BS_C01_S02_V29 | sutra | ओम् अभिव्यक्तेरित्याश्मरथ्यः ओम् ॥ 01-02-29 ॥ |
| BS_C01_S02_V29 | sutra | ॐ अभिव्यक्तेरित्याश्मरथ्यः ॐ ॥ 29-60 ॥ |
| BS_C01_S02_V29 | sutra | ॐ अभिव्यक्तेरित्याश्मरथ्यः ॐ ॥ 29-60 ॥ |
| BS_C01_S02_V30 | sutra | ओम् अनुस्मृतेर्बादरिः ओम् ॥ 01-02-30 ॥ |
| BS_C01_S02_V30 | sutra | ॐ अनुस्मृतेर्बादरिः ॐ ॥ 30-61 ॥ |
| BS_C01_S02_V30 | sutra | ॐ अनुस्मृतेर्बादरिः ॐ ॥ 30-61 ॥ |
| BS_C01_S02_V30 | sutra | ओम् अनुस्मृतेर्बादरिः ओम् ॥ 01-02-30 ॥ |
| BS_C01_S02_V31 | sutra | ओं सम्पत्तेरिति जैमिनिस्तथा हि दर्शयति ओम् ॥ 01-02-31 ॥ |
| BS_C01_S02_V31 | sutra | ओं सम्पत्तेरिति जैमिनिस्तथा हि दर्शयति ओम् ॥ 01-02-31 ॥ |
| BS_C01_S02_V31 | sutra | ॐ सम्पत्तेरिति जैमिनिस्तथा हि दर्शयति ॐ ॥ 31-62 ॥ |
| BS_C01_S02_V31 | sutra | ॐ सम्पत्तेरिति जैमिनिस्तथा हि दर्शयति ॐ ॥ 31-62 ॥ |
| BS_C01_S02_V32 | sutra | ॐ आमनन्ति चैनमस्मिन् ॐ ॥ 32-63 ॥ |
| BS_C01_S02_V32 | sutra | ओम् आमनन्ति चैनमस्मिन् ओम् ॥ 01-02-32 ॥ |
| BS_C01_S02_V32 | sutra | ॐ आमनन्ति चैनमस्मिन् ॐ ॥ 32-63 ॥ |
| BS_C01_S02_V32 | sutra | ओम् आमनन्ति चैनमस्मिन् ओम् ॥ 01-02-32 ॥ |
| BS_C01_S03_V01 | sutra | ॐ द्युभ्वाद्यायतनं स्वशब्दात् ॐ ॥ 01-64 ॥ |
| BS_C01_S03_V01 | sutra | ओं द्युभ्वाद्यायतनं स्वशब्दात् ओम् ॥ 01-03-01 ॥ |
| BS_C01_S03_V01 | sutra | ॐ द्युभ्वाद्यायतनं स्वशब्दात् ॐ ॥ 01-64 ॥ |
| BS_C01_S03_V01 | sutra | ओं द्युभ्वाद्यायतनं स्वशब्दात् ओम् ॥ 01-03-01 ॥ |
| BS_C01_S03_V02 | sutra | ॐ मुक्तोपसृप्यव्यपदेशात् ॐ ॥ 02-65 ॥ |
| BS_C01_S03_V02 | sutra | ओं मुक्तोपसृप्यव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-03-02 ॥ |
| BS_C01_S03_V02 | sutra | ॐ मुक्तोपसृप्यव्यपदेशात् ॐ ॥ 02-65 ॥ |
| BS_C01_S03_V02 | sutra | ओं मुक्तोपसृप्यव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-03-02 ॥ |
| BS_C01_S03_V03 | sutra | ॐ नानुमानमतच्छब्दात् ॐ ॥ 03-66 ॥ |
| BS_C01_S03_V03 | sutra | ॐ नानुमानमतच्छब्दात् ॐ ॥ 03-66 ॥ |
| BS_C01_S03_V03 | sutra | ओं नानुमानमतच्छब्दात् ओम् ॥ 01-03-03-66 ॥ |
| BS_C01_S03_V03 | sutra | ओं नानुमानमतच्छब्दात् ओम् ॥ 01-03-03-66 ॥ |
| BS_C01_S03_V04 | sutra | ॐ प्राणभृच्च ॐ ॥ 04-67 ॥ |
| BS_C01_S03_V04 | sutra | ओं प्राणभृच्च ओम् ॥ 01-03-04 ॥ |
| BS_C01_S03_V04 | sutra | ॐ प्राणभृच्च ॐ ॥ 04-67 ॥ |
| BS_C01_S03_V04 | sutra | ओं प्राणभृच्च ओम् ॥ 01-03-04 ॥ |
| BS_C01_S03_V05 | sutra | ओं भेदव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-03-05 ॥ |
| BS_C01_S03_V05 | sutra | ॐ भेदव्यपदेशात् ॐ ॥ 05-68 ॥ |
| BS_C01_S03_V05 | sutra | ओं भेदव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-03-05 ॥ |
| BS_C01_S03_V05 | sutra | ॐ भेदव्यपदेशात् ॐ ॥ 05-68 ॥ |
| BS_C01_S03_V06 | sutra | (69)ओं प्रकरणात् ओम् ॥ 01-03-06 ॥ |
| BS_C01_S03_V06 | sutra | ॐ प्रकरणात् ॐ ॥ 06-69 ॥ |
| BS_C01_S03_V06 | sutra | ॐ प्रकरणात् ॐ ॥ 06-69 ॥ |
| BS_C01_S03_V06 | sutra | (69)ओं प्रकरणात् ओम् ॥ 01-03-06 ॥ |
| BS_C01_S03_V07 | sutra | (70)ओं स्थित्यदनाभ्यां च ओम् ॥ 01-03-07 ॥ |
| BS_C01_S03_V07 | sutra | (70)ओं स्थित्यदनाभ्यां च ओम् ॥ 01-03-07 ॥ |
| BS_C01_S03_V07 | sutra | ॐ स्थित्यदनाभ्यां च ॐ ॥ 07-70 ॥ |
| BS_C01_S03_V07 | sutra | ॐ स्थित्यदनाभ्यां च ॐ ॥ 07-70 ॥ |
| BS_C01_S03_V08 | sutra | (71)ओं भूमा सम्प्रसादादध्युपदेशात् ओम् ॥ 01-03-08 ॥ |
| BS_C01_S03_V08 | sutra | ॐ भूमा सम्प्रसादादध्युपदेशात् ॐ ॥ 08-71 ॥ |
| BS_C01_S03_V08 | sutra | ॐ भूमा सम्प्रसादादध्युपदेशात् ॐ ॥ 08-71 ॥ |
| BS_C01_S03_V08 | sutra | (71)ओं भूमा सम्प्रसादादध्युपदेशात् ओम् ॥ 01-03-08 ॥ |
| BS_C01_S03_V09 | sutra | ॐ धर्मोपपत्तेश्च ॐ ॥ 09-72 ॥ |
| BS_C01_S03_V09 | sutra | ॐ धर्मोपपत्तेश्च ॐ ॥ 09-72 ॥ |
| BS_C01_S03_V09 | sutra | (72)ओं धर्मोपपत्तेश्च ओम् ॥ 01-03-09 ॥ |
| BS_C01_S03_V09 | sutra | (72)ओं धर्मोपपत्तेश्च ओम् ॥ 01-03-09 ॥ |
| BS_C01_S03_V10 | sutra | ॐ अक्षरमम्बरान्तधृतेः ॐ ॥ 10-73 ॥ |
| BS_C01_S03_V10 | sutra | ॐ अक्षरमम्बरान्तधृतेः ॐ ॥ 10-73 ॥ |
| BS_C01_S03_V10 | sutra | (73)ओम् अक्षरमम्बरान्तधृतेः ओम् ॥ 01-03-10॥ |
| BS_C01_S03_V10 | sutra | (73)ओम् अक्षरमम्बरान्तधृतेः ओम् ॥ 01-03-10॥ |
| BS_C01_S03_V11 | sutra | ॐ सा च प्रशासनात् ॐ ॥ 11-74 ॥ |
| BS_C01_S03_V11 | sutra | ॐ सा च प्रशासनात् ॐ ॥ 11-74 ॥ |
| BS_C01_S03_V11 | sutra | (74)ओं सा च प्रशासनात् ओम् ॥ 01-03-11 ॥ |
| BS_C01_S03_V11 | sutra | (74)ओं सा च प्रशासनात् ओम् ॥ 01-03-11 ॥ |
| BS_C01_S03_V12 | sutra | ॐ अन्यभावव्यावृत्तेश्च ॐ ॥ 12-75 ॥ |
| BS_C01_S03_V12 | sutra | (75)ओम् अन्यभावव्यावृत्तेश्च ओम् ॥ 01-03-12 ॥ |
| BS_C01_S03_V12 | sutra | (75)ओम् अन्यभावव्यावृत्तेश्च ओम् ॥ 01-03-12 ॥ |
| BS_C01_S03_V12 | sutra | ॐ अन्यभावव्यावृत्तेश्च ॐ ॥ 12-75 ॥ |
| BS_C01_S03_V13 | sutra | (76)ओम् ईक्षतिकर्मव्यपदेशात् सः ओम् ॥ 01-03-13 ॥ |
| BS_C01_S03_V13 | sutra | ॐ ईक्षतिकर्मव्यपदेशात् सः ॐ ॥ 13-76 ॥ |
| BS_C01_S03_V13 | sutra | (76)ओम् ईक्षतिकर्मव्यपदेशात् सः ओम् ॥ 01-03-13 ॥ |
| BS_C01_S03_V13 | sutra | ॐ ईक्षतिकर्मव्यपदेशात् सः ॐ ॥ 13-76 ॥ |
| BS_C01_S03_V14 | sutra | ॐ दहर उत्तरेभ्यः ॐ ॥ 14-77 ॥ |
| BS_C01_S03_V14 | sutra | (77)ओं दहर उत्तरेभ्यः ओम् ॥ 01-03-14 ॥ |
| BS_C01_S03_V14 | sutra | (77)ओं दहर उत्तरेभ्यः ओम् ॥ 01-03-14 ॥ |
| BS_C01_S03_V14 | sutra | ॐ दहर उत्तरेभ्यः ॐ ॥ 14-77 ॥ |
| BS_C01_S03_V15 | sutra | (78)ओं गतिशब्दाभ्यां तथा हि दृष्टं लिङ्गं च ओम् ॥ 01-03-15 ॥ |
| BS_C01_S03_V15 | sutra | ॐ गतिशब्दाभ्यां तथा हि दृष्टं लिङ्गं च ॐ ॥ 15-78 ॥ |
| BS_C01_S03_V15 | sutra | ॐ गतिशब्दाभ्यां तथा हि दृष्टं लिङ्गं च ॐ ॥ 15-78 ॥ |
| BS_C01_S03_V15 | sutra | (78)ओं गतिशब्दाभ्यां तथा हि दृष्टं लिङ्गं च ओम् ॥ 01-03-15 ॥ |
| BS_C01_S03_V16 | sutra | (79)ओं धृतेश्च महिम्नोऽस्यास्मिन्नुपलब्धेः ओम् ॥ 16 ॥ |
| BS_C01_S03_V16 | sutra | (79)ओं धृतेश्च महिम्नोऽस्यास्मिन्नुपलब्धेः ओम् ॥ 16 ॥ |
| BS_C01_S03_V16 | sutra | ॐ धृतेश्च महिम्नोऽस्यास्मिन्नुपलब्धेः ॐ ॥ 16-79 ॥ |
| BS_C01_S03_V16 | sutra | ॐ धृतेश्च महिम्नोऽस्यास्मिन्नुपलब्धेः ॐ ॥ 16-79 ॥ |
| BS_C01_S03_V17 | sutra | ॐ प्रसिद्धेश्च ॐ ॥ 17-80 ॥ |
| BS_C01_S03_V17 | sutra | ॐ प्रसिद्धेश्च ॐ ॥ 17-80 ॥ |
| BS_C01_S03_V17 | sutra | (80)ओं प्रसिद्धेश्च ओम् ॥ 01-03-17 ॥ |
| BS_C01_S03_V17 | sutra | (80)ओं प्रसिद्धेश्च ओम् ॥ 01-03-17 ॥ |
| BS_C01_S03_V18 | sutra | (81)ओम् इतरपरामर्शात् स इति चेन्नासम्भवात् ओम् ॥ 01-03-18 ॥ |
| BS_C01_S03_V18 | sutra | ॐ इतरपरामर्शात् स इति चेन्नासम्भवात् ॐ ॥ 18-81 ॥ |
| BS_C01_S03_V18 | sutra | ॐ इतरपरामर्शात् स इति चेन्नासम्भवात् ॐ ॥ 18-81 ॥ |
| BS_C01_S03_V18 | sutra | (81)ओम् इतरपरामर्शात् स इति चेन्नासम्भवात् ओम् ॥ 01-03-18 ॥ |
| BS_C01_S03_V19 | sutra | (82)ओम् उत्तराच्चेदाविर्भूतस्वरूपस्तु ओम् ॥ 01-03-19 ॥ |
| BS_C01_S03_V19 | sutra | (82)ओम् उत्तराच्चेदाविर्भूतस्वरूपस्तु ओम् ॥ 01-03-19 ॥ |
| BS_C01_S03_V19 | sutra | ॐ उत्तराच्चेदाविर्भूतस्वरूपस्तु ॐ ॥ 19-82 ॥ |
| BS_C01_S03_V19 | sutra | ॐ उत्तराच्चेदाविर्भूतस्वरूपस्तु ॐ ॥ 19-82 ॥ |
| BS_C01_S03_V20 | sutra | ॐ अन्यार्थश्च परामर्शः ॐ ॥ 20-83 ॥ |
| BS_C01_S03_V20 | sutra | (83)ओम् अन्यार्थश्च परामर्शः ओम् ॥ 01-03-20 ॥ |
| BS_C01_S03_V20 | sutra | (83)ओम् अन्यार्थश्च परामर्शः ओम् ॥ 01-03-20 ॥ |
| BS_C01_S03_V20 | sutra | ॐ अन्यार्थश्च परामर्शः ॐ ॥ 20-83 ॥ |
| BS_C01_S03_V21 | sutra | ॐ अल्पश्रुतेरिति चेत् तदुक्तम् ॐ ॥ 21-84 ॥ |
| BS_C01_S03_V21 | sutra | (84)ओम् अल्पश्रुतेरिति चेत् तदुक्तम् ओम् ॥ 01-03-21॥ |
| BS_C01_S03_V21 | sutra | ॐ अल्पश्रुतेरिति चेत् तदुक्तम् ॐ ॥ 21-84 ॥ |
| BS_C01_S03_V21 | sutra | (84)ओम् अल्पश्रुतेरिति चेत् तदुक्तम् ओम् ॥ 01-03-21॥ |
| BS_C01_S03_V22 | sutra | (85)ओम् अनुकृतेस्तस्य च ओम् ॥ 01-03-22 ॥ |
| BS_C01_S03_V22 | sutra | (85)ओम् अनुकृतेस्तस्य च ओम् ॥ 01-03-22 ॥ |
| BS_C01_S03_V22 | sutra | ॐ अनुकृतेस्तस्य च ॐ ॥ 22-85 ॥ |
| BS_C01_S03_V22 | sutra | ॐ अनुकृतेस्तस्य च ॐ ॥ 22-85 ॥ |
| BS_C01_S03_V23 | sutra | (86)ओम् अपि स्मर्यते ओम् ॥ 01-03-23 ॥ |
| BS_C01_S03_V23 | sutra | ॐ आपि स्मर्यते ॐ ॥ 23-86 ॥ |
| BS_C01_S03_V23 | sutra | ॐ आपि स्मर्यते ॐ ॥ 23-86 ॥ |
| BS_C01_S03_V23 | sutra | (86)ओम् अपि स्मर्यते ओम् ॥ 01-03-23 ॥ |
| BS_C01_S03_V24 | sutra | (87)ओं शब्दादेव प्रमितः ओम् ॥ 01-03-24 ॥ |
| BS_C01_S03_V24 | sutra | ॐ शब्दादेव प्रमितः ॐ ॥ 24-87 ॥ |
| BS_C01_S03_V24 | sutra | ॐ शब्दादेव प्रमितः ॐ ॥ 24-87 ॥ |
| BS_C01_S03_V24 | sutra | (87)ओं शब्दादेव प्रमितः ओम् ॥ 01-03-24 ॥ |
| BS_C01_S03_V25 | sutra | (88)ओं हृद्यपेक्षया तु मनुष्याधिकारत्वात् ओम् ॥ 01-03-25 ॥ |
| BS_C01_S03_V25 | sutra | ॐ हृद्यपेक्षया तु मनुष्याधिकारत्वात् ॐ ॥ 25-88 ॥ |
| BS_C01_S03_V25 | sutra | ॐ हृद्यपेक्षया तु मनुष्याधिकारत्वात् ॐ ॥ 25-88 ॥ |
| BS_C01_S03_V25 | sutra | (88)ओं हृद्यपेक्षया तु मनुष्याधिकारत्वात् ओम् ॥ 01-03-25 ॥ |
| BS_C01_S03_V26 | sutra | (89)ओं तदुपर्यपि बादरायणः सम्भवात् ओम् ॥ 01-03-26 ॥ |
| BS_C01_S03_V26 | sutra | ॐ तदुपर्यपि बादरायणः सम्भवात् ॐ ॥ 26-89 ॥ |
| BS_C01_S03_V26 | sutra | (89)ओं तदुपर्यपि बादरायणः सम्भवात् ओम् ॥ 01-03-26 ॥ |
| BS_C01_S03_V26 | sutra | ॐ तदुपर्यपि बादरायणः सम्भवात् ॐ ॥ 26-89 ॥ |
| BS_C01_S03_V27 | sutra | ॐ विरोधः कर्मणेति चेन्नानेकप्रतिपत्तेर्दर्शनात् ॐ॥ 27-90 ॥ |
| BS_C01_S03_V27 | sutra | ॐ विरोधः कर्मणेति चेन्नानेकप्रतिपत्तेर्दर्शनात् ॐ॥ 27-90 ॥ |
| BS_C01_S03_V27 | sutra | (90)ओं विरोधः कर्मणीति चेन्नानेकप्रतिपत्तेर्दर्शनात् ओं॥ 01-03-27 ॥ |
| BS_C01_S03_V27 | sutra | (90)ओं विरोधः कर्मणीति चेन्नानेकप्रतिपत्तेर्दर्शनात् ओं॥ 01-03-27 ॥ |
| BS_C01_S03_V28 | sutra | ॐ शब्द इति चेन्नातः प्रभवात् प्रत्यक्षानुमानाभ्याम् ॐ ॥ 28-91 ॥ |
| BS_C01_S03_V28 | sutra | (91)ओं शब्द इति चेन्नातः प्रभवात् प्रत्यक्षानुमानाभ्याम् ओम् ॥ 01-03-28 ॥ |
| BS_C01_S03_V28 | sutra | ॐ शब्द इति चेन्नातः प्रभवात् प्रत्यक्षानुमानाभ्याम् ॐ ॥ 28-91 ॥ |
| BS_C01_S03_V28 | sutra | (91)ओं शब्द इति चेन्नातः प्रभवात् प्रत्यक्षानुमानाभ्याम् ओम् ॥ 01-03-28 ॥ |
| BS_C01_S03_V29 | sutra | ॐ अत एव च नित्यत्वम् ॐ ॥ 29-92 ॥ |
| BS_C01_S03_V29 | sutra | (92)ओं अत एव च नित्यत्वम् ओम् ॥ 01-03-29 ॥ |
| BS_C01_S03_V29 | sutra | (92)ओं अत एव च नित्यत्वम् ओम् ॥ 01-03-29 ॥ |
| BS_C01_S03_V29 | sutra | ॐ अत एव च नित्यत्वम् ॐ ॥ 29-92 ॥ |
| BS_C01_S03_V30 | sutra | (93)ओं समाननामरूपत्वाच्चावृत्तावप्यविरोधो दर्शनात् स्मृतेश्च ओम् ॥ 01-03-30 ॥ |
| BS_C01_S03_V30 | sutra | ॐ समाननामरूपत्वाच्चावृत्तावप्यविरोधो दर्शनात् स्मृतेश्च ॐ ॥ 30-93 ॥ |
| BS_C01_S03_V30 | sutra | (93)ओं समाननामरूपत्वाच्चावृत्तावप्यविरोधो दर्शनात् स्मृतेश्च ओम् ॥ 01-03-30 ॥ |
| BS_C01_S03_V30 | sutra | ॐ समाननामरूपत्वाच्चावृत्तावप्यविरोधो दर्शनात् स्मृतेश्च ॐ ॥ 30-93 ॥ |
| BS_C01_S03_V31 | sutra | ॐ मध्वादिष्वसम्भवादनधिकारं जैमिनिः ॐ ॥ 31-94॥ |
| BS_C01_S03_V31 | sutra | (94)ओं मध्वादिष्वसम्भवादनधिकारं जैमिनिः ओम् ॥ 01-03-31॥ |
| BS_C01_S03_V31 | sutra | (94)ओं मध्वादिष्वसम्भवादनधिकारं जैमिनिः ओम् ॥ 01-03-31॥ |
| BS_C01_S03_V31 | sutra | ॐ मध्वादिष्वसम्भवादनधिकारं जैमिनिः ॐ ॥ 31-94॥ |
| BS_C01_S03_V32 | sutra | ॐ ज्योतिषि भावाच्च ॐ ॥ 32-95॥ |
| BS_C01_S03_V32 | sutra | (95)ओं ज्योतिषि भावाच्च ओम् ॥ 01-03-32॥ |
| BS_C01_S03_V32 | sutra | (95)ओं ज्योतिषि भावाच्च ओम् ॥ 01-03-32॥ |
| BS_C01_S03_V32 | sutra | ॐ ज्योतिषि भावाच्च ॐ ॥ 32-95॥ |
| BS_C01_S03_V33 | sutra | ॐ भावं तु बादरायणोऽस्ति हि ॐ ॥33-96॥ |
| BS_C01_S03_V33 | sutra | (96)ओं भावं तु बादरायणोऽस्ति हि ओम् ॥01-03-33॥ |
| BS_C01_S03_V33 | sutra | (96)ओं भावं तु बादरायणोऽस्ति हि ओम् ॥01-03-33॥ |
| BS_C01_S03_V33 | sutra | ॐ भावं तु बादरायणोऽस्ति हि ॐ ॥33-96॥ |
| BS_C01_S03_V34 | sutra | (97)ओं शुगस्य तदनादरश्रवणात् तदाऽऽद्रवणात् सूच्यते हि ओम् ॥01-03-34॥ |
| BS_C01_S03_V34 | sutra | ॐ शुगस्य तदनादरश्रवणात् तदाऽऽद्रवणात् सूच्यते हि ॐ ॥34-97॥ |
| BS_C01_S03_V34 | sutra | ॐ शुगस्य तदनादरश्रवणात् तदाऽऽद्रवणात् सूच्यते हि ॐ ॥34-97॥ |
| BS_C01_S03_V34 | sutra | (97)ओं शुगस्य तदनादरश्रवणात् तदाऽऽद्रवणात् सूच्यते हि ओम् ॥01-03-34॥ |
| BS_C01_S03_V35 | sutra | (98)ओं क्षत्रियत्वावगतेश्चोत्तरत्र चैत्ररथेन लिङ्गात् ओम् ॥ 01-03-35 ॥ |
| BS_C01_S03_V35 | sutra | ॐ क्षत्रियत्वावगतेश्चोत्तरत्र चैत्ररथेन लिङ्गात् ॐ ॥ 35-98 ॥ |
| BS_C01_S03_V35 | sutra | ॐ क्षत्रियत्वावगतेश्चोत्तरत्र चैत्ररथेन लिङ्गात् ॐ ॥ 35-98 ॥ |
| BS_C01_S03_V35 | sutra | (98)ओं क्षत्रियत्वावगतेश्चोत्तरत्र चैत्ररथेन लिङ्गात् ओम् ॥ 01-03-35 ॥ |
| BS_C01_S03_V36 | sutra | (99)ओं संस्कारपरामर्शात् तदभावाभिलापाच्च ओम् ॥ 01-03-36 ॥ |
| BS_C01_S03_V36 | sutra | ॐ संस्कारपरामर्शात् तदभावाभिलापाच्च ॐ ॥ 36-99 ॥ |
| BS_C01_S03_V36 | sutra | ॐ संस्कारपरामर्शात् तदभावाभिलापाच्च ॐ ॥ 36-99 ॥ |
| BS_C01_S03_V36 | sutra | (99)ओं संस्कारपरामर्शात् तदभावाभिलापाच्च ओम् ॥ 01-03-36 ॥ |
| BS_C01_S03_V37 | sutra | (100)ओं तदभावनिर्धारणे च प्रवृत्तेः ओम् ॥ 01-03-37 ॥ |
| BS_C01_S03_V37 | sutra | ॐ तदभावनिर्धारणे च प्रवृत्तेः ॐ ॥ 37-100 ॥ |
| BS_C01_S03_V37 | sutra | (100)ओं तदभावनिर्धारणे च प्रवृत्तेः ओम् ॥ 01-03-37 ॥ |
| BS_C01_S03_V37 | sutra | ॐ तदभावनिर्धारणे च प्रवृत्तेः ॐ ॥ 37-100 ॥ |
| BS_C01_S03_V38 | sutra | (101)ओं श्रवणाध्ययनार्थप्रतिषेधात् स्मृतेश्च ओम् ॥ 01-03-38 ॥ |
| BS_C01_S03_V38 | sutra | ॐ श्रवणाध्ययनार्थप्रतिषेधात् स्मृतेश्च ॐ ॥ 38-101 ॥ |
| BS_C01_S03_V38 | sutra | ॐ श्रवणाध्ययनार्थप्रतिषेधात् स्मृतेश्च ॐ ॥ 38-101 ॥ |
| BS_C01_S03_V38 | sutra | (101)ओं श्रवणाध्ययनार्थप्रतिषेधात् स्मृतेश्च ओम् ॥ 01-03-38 ॥ |
| BS_C01_S03_V39 | sutra | (102)ओं कम्पनात् ओम् ॥ 01-03-39 ॥ |
| BS_C01_S03_V39 | sutra | ॐ कम्पनात् ॐ ॥ 39-102 ॥ |
| BS_C01_S03_V39 | sutra | (102)ओं कम्पनात् ओम् ॥ 01-03-39 ॥ |
| BS_C01_S03_V39 | sutra | ॐ कम्पनात् ॐ ॥ 39-102 ॥ |
| BS_C01_S03_V40 | sutra | ॐ ज्योतिर्दर्शनात् ॐ ॥ 40-103 ॥ |
| BS_C01_S03_V40 | sutra | (103)ओं ज्योतिर्दर्शनात् ओम् ॥ 01-03-40 ॥ |
| BS_C01_S03_V40 | sutra | ॐ ज्योतिर्दर्शनात् ॐ ॥ 40-103 ॥ |
| BS_C01_S03_V40 | sutra | (103)ओं ज्योतिर्दर्शनात् ओम् ॥ 01-03-40 ॥ |
| BS_C01_S03_V41 | sutra | (104)ओम् आकाशोऽर्थान्तरत्वादिव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-03-41 ॥ |
| BS_C01_S03_V41 | sutra | ॐ आकाशोऽर्थान्तरत्वादिव्यपदेशात् ॐ ॥ 41-104 ॥ |
| BS_C01_S03_V41 | sutra | ॐ आकाशोऽर्थान्तरत्वादिव्यपदेशात् ॐ ॥ 41-104 ॥ |
| BS_C01_S03_V41 | sutra | (104)ओम् आकाशोऽर्थान्तरत्वादिव्यपदेशात् ओम् ॥ 01-03-41 ॥ |
| BS_C01_S03_V42 | sutra | (105)ओं सुषुप्त्युत्क्रान्त्योर्भेदेन ओम् ॥ 01-03-42 ॥ |
| BS_C01_S03_V42 | sutra | (105)ओं सुषुप्त्युत्क्रान्त्योर्भेदेन ओम् ॥ 01-03-42 ॥ |
| BS_C01_S03_V42 | sutra | ॐ सुषुप्त्युत्क्रान्त्योर्भेदेन ॐ ॥ 42-105 ॥ |
| BS_C01_S03_V42 | sutra | ॐ सुषुप्त्युत्क्रान्त्योर्भेदेन ॐ ॥ 42-105 ॥ |
| BS_C01_S03_V43 | sutra | ॐ पत्यादिशब्देभ्यः ॐ ॥ 43-106 ॥ |
| BS_C01_S03_V43 | sutra | (106)ओं पत्यादिशब्देभ्यः ओम् ॥ 01-03-43 ॥ |
| BS_C01_S03_V43 | sutra | ॐ पत्यादिशब्देभ्यः ॐ ॥ 43-106 ॥ |
| BS_C01_S03_V43 | sutra | (106)ओं पत्यादिशब्देभ्यः ओम् ॥ 01-03-43 ॥ |
| BS_C01_S04_V01 | sutra | (107)ओम् आनुमानिकमप्येकेषामिति चेन्न शरीररूपकविन्यस्तगृहीतेर्दर्शयति च ओम् ॥ 01-04-01 ॥ |
| BS_C01_S04_V01 | sutra | ॐ आनुमानिकमप्येकेषामिति चेन्न शरीररूपकविन्यस्तगृहीतेर्दशर्यति च ॐ ॥ 01-107 ॥ |
| BS_C01_S04_V01 | sutra | (107)ओम् आनुमानिकमप्येकेषामिति चेन्न शरीररूपकविन्यस्तगृहीतेर्दर्शयति च ओम् ॥ 01-04-01 ॥ |
| BS_C01_S04_V01 | sutra | ॐ आनुमानिकमप्येकेषामिति चेन्न शरीररूपकविन्यस्तगृहीतेर्दशर्यति च ॐ ॥ 01-107 ॥ |
| BS_C01_S04_V02 | sutra | (108)ओं सूक्ष्मं तु तदर्हत्वात् ओम् ॥ 01-04-02 ॥ |
| BS_C01_S04_V02 | sutra | (108)ओं सूक्ष्मं तु तदर्हत्वात् ओम् ॥ 01-04-02 ॥ |
| BS_C01_S04_V02 | sutra | ॐ सूक्ष्मं तु तदर्हत्वात् ॐ ॥ 02-108 ॥ |
| BS_C01_S04_V02 | sutra | ॐ सूक्ष्मं तु तदर्हत्वात् ॐ ॥ 02-108 ॥ |
| BS_C01_S04_V03 | sutra | (109)ओं तदधीनत्वादर्थवत् ओम् ॥ 01-04-03 ॥ |
| BS_C01_S04_V03 | sutra | ॐ तदधीनत्वादर्थवत् ॐ ॥ 03-109 ॥ |
| BS_C01_S04_V03 | sutra | (109)ओं तदधीनत्वादर्थवत् ओम् ॥ 01-04-03 ॥ |
| BS_C01_S04_V03 | sutra | ॐ तदधीनत्वादर्थवत् ॐ ॥ 03-109 ॥ |
| BS_C01_S04_V04 | sutra | ॐ ज्ञेयत्वावचनाच्च ॐ ॥ 04-110 ॥ |
| BS_C01_S04_V04 | sutra | (110)ओं ज्ञेयत्वावचनाच्च ओम् ॥ 01-04-04 ॥ |
| BS_C01_S04_V04 | sutra | ॐ ज्ञेयत्वावचनाच्च ॐ ॥ 04-110 ॥ |
| BS_C01_S04_V04 | sutra | (110)ओं ज्ञेयत्वावचनाच्च ओम् ॥ 01-04-04 ॥ |
| BS_C01_S04_V05 | sutra | (111)ओं वदतीती चेन्न प्राज्ञो हि ओम् ॥ 01-04-05 ॥ |
| BS_C01_S04_V05 | sutra | (111)ओं वदतीती चेन्न प्राज्ञो हि ओम् ॥ 01-04-05 ॥ |
| BS_C01_S04_V05 | sutra | ॐ वदतीती चेन्न प्राज्ञो हि ॐ ॥ 05-111 ॥ |
| BS_C01_S04_V05 | sutra | ॐ वदतीती चेन्न प्राज्ञो हि ॐ ॥ 05-111 ॥ |
| BS_C01_S04_V06 | sutra | ॐ प्रकरणात् ॐ ॥ 06-112 ॥ |
| BS_C01_S04_V06 | sutra | (112)ओं प्रकरणात् ओम् ॥ 01-04-06 ॥ |
| BS_C01_S04_V06 | sutra | (112)ओं प्रकरणात् ओम् ॥ 01-04-06 ॥ |
| BS_C01_S04_V06 | sutra | ॐ प्रकरणात् ॐ ॥ 06-112 ॥ |
| BS_C01_S04_V07 | sutra | ॐ त्रयाणामेव चैवमुपन्यासः प्रश्नश्च ॐ ॥ 07-113 ॥ |
| BS_C01_S04_V07 | sutra | (113)ओं त्रयाणामेव चैवमुपन्यासः प्रश्नश्च ओम् ॥ 01-04-07 ॥ |
| BS_C01_S04_V07 | sutra | (113)ओं त्रयाणामेव चैवमुपन्यासः प्रश्नश्च ओम् ॥ 01-04-07 ॥ |
| BS_C01_S04_V07 | sutra | ॐ त्रयाणामेव चैवमुपन्यासः प्रश्नश्च ॐ ॥ 07-113 ॥ |
| BS_C01_S04_V08 | sutra | (114)ओं महद्वच्च ओम् ॥ 01-04-08 ॥ |
| BS_C01_S04_V08 | sutra | ॐ महद्वच्च ॐ ॥ 08-114 ॥ |
| BS_C01_S04_V08 | sutra | (114)ओं महद्वच्च ओम् ॥ 01-04-08 ॥ |
| BS_C01_S04_V08 | sutra | ॐ महद्वच्च ॐ ॥ 08-114 ॥ |
| BS_C01_S04_V09 | sutra | ॐ चमसवदविशेषात् ॐ ॥ 09-115 ॥ |
| BS_C01_S04_V09 | sutra | ॐ चमसवदविशेषात् ॐ ॥ 09-115 ॥ |
| BS_C01_S04_V09 | sutra | (115)ओं चमसवदविशेषात् ओम् ॥ 01-04-09 ॥ |
| BS_C01_S04_V09 | sutra | (115)ओं चमसवदविशेषात् ओम् ॥ 01-04-09 ॥ |
| BS_C01_S04_V10 | sutra | ॐ ज्योतिरुपक्रमात् तु तथा ह्यधीयत एके ॐ॥ 10-116 ॥ |
| BS_C01_S04_V10 | sutra | (116)ओं ज्योतिरुपक्रमात्तु तथा ह्यधीयत एके ओं॥ 01-04-10 ॥ |
| BS_C01_S04_V10 | sutra | ॐ ज्योतिरुपक्रमात् तु तथा ह्यधीयत एके ॐ॥ 10-116 ॥ |
| BS_C01_S04_V10 | sutra | (116)ओं ज्योतिरुपक्रमात्तु तथा ह्यधीयत एके ओं॥ 01-04-10 ॥ |
| BS_C01_S04_V11 | sutra | ॐ कल्पनोपदेशाच्च मध्वादिवदविरोधः ॐ ॥ 11-117 ॥ |
| BS_C01_S04_V11 | sutra | (117)ओं कल्पनोपदेशाच्च मध्वादिवदविरोधः ओम् ॥ 01-04-11 ॥ |
| BS_C01_S04_V11 | sutra | (117)ओं कल्पनोपदेशाच्च मध्वादिवदविरोधः ओम् ॥ 01-04-11 ॥ |
| BS_C01_S04_V11 | sutra | ॐ कल्पनोपदेशाच्च मध्वादिवदविरोधः ॐ ॥ 11-117 ॥ |
| BS_C01_S04_V12 | sutra | ॐ न सङ्ख्योपसङ्ग्रहादपि नानाभावादतिरेकाच्च ॐ॥ 12-118 ॥ |
| BS_C01_S04_V12 | sutra | ॐ न सङ्ख्योपसङ्ग्रहादपि नानाभावादतिरेकाच्च ॐ॥ 12-118 ॥ |
| BS_C01_S04_V12 | sutra | (118)ओं न सङ्ख्योपसङ्ग्रहादपि नानाभावादतिरेकाच्च ओं॥ 01-01-12 ॥ |
| BS_C01_S04_V12 | sutra | (118)ओं न सङ्ख्योपसङ्ग्रहादपि नानाभावादतिरेकाच्च ओं॥ 01-01-12 ॥ |
| BS_C01_S04_V13 | sutra | (119)ओं प्राणादयो वाक्यशेषात् ओम् ॥ 01-04-13 ॥ |
| BS_C01_S04_V13 | sutra | ॐ प्राणादयो वाक्यशेषात् ॐ ॥ 13-119 ॥ |
| BS_C01_S04_V13 | sutra | ॐ प्राणादयो वाक्यशेषात् ॐ ॥ 13-119 ॥ |
| BS_C01_S04_V13 | sutra | (119)ओं प्राणादयो वाक्यशेषात् ओम् ॥ 01-04-13 ॥ |
| BS_C01_S04_V14 | sutra | (120)ओं ज्योतिषैकेषामसत्यन्ने ओम् ॥ 01-04-14 ॥ |
| BS_C01_S04_V14 | sutra | (120)ओं ज्योतिषैकेषामसत्यन्ने ओम् ॥ 01-04-14 ॥ |
| BS_C01_S04_V14 | sutra | ॐ ज्योतिषैकेषामसत्यन्ने ॐ ॥ 14-120 ॥ |
| BS_C01_S04_V14 | sutra | ॐ ज्योतिषैकेषामसत्यन्ने ॐ ॥ 14-120 ॥ |
| BS_C01_S04_V15 | sutra | ॐ कारणत्वेन चाकाशादिषु यथाव्यपदिष्टोक्तेः ॐ ॥ 15-121 ॥ |
| BS_C01_S04_V15 | sutra | (121)ओं कारणत्वेन चाकाशादिषु यथाव्यपदिष्टोक्तेः ओम् ॥ 01-04-15 ॥ |
| BS_C01_S04_V15 | sutra | ॐ कारणत्वेन चाकाशादिषु यथाव्यपदिष्टोक्तेः ॐ ॥ 15-121 ॥ |
| BS_C01_S04_V15 | sutra | (121)ओं कारणत्वेन चाकाशादिषु यथाव्यपदिष्टोक्तेः ओम् ॥ 01-04-15 ॥ |
| BS_C01_S04_V16 | sutra | (122)ओं समाकर्षात् ओम् ॥ 01-04-16 ॥ |
| BS_C01_S04_V16 | sutra | ॐ समाकर्षात् ॐ ॥ 16-122 ॥ |
| BS_C01_S04_V16 | sutra | (122)ओं समाकर्षात् ओम् ॥ 01-04-16 ॥ |
| BS_C01_S04_V16 | sutra | ॐ समाकर्षात् ॐ ॥ 16-122 ॥ |
| BS_C01_S04_V17 | sutra | (123)ओं जगद्वाचित्वात् ओम् ॥ 01-04-17 ॥ |
| BS_C01_S04_V17 | sutra | ॐ जगद्वाचित्वात् ॐ ॥ 17-123 ॥ |
| BS_C01_S04_V17 | sutra | (123)ओं जगद्वाचित्वात् ओम् ॥ 01-04-17 ॥ |
| BS_C01_S04_V17 | sutra | ॐ जगद्वाचित्वात् ॐ ॥ 17-123 ॥ |
| BS_C01_S04_V18 | sutra | ॐ जीवमुख्यप्राणलिङ्गादिति चेत् तद्व्याख्यातम् ॐ ॥ 18-124 ॥ |
| BS_C01_S04_V18 | sutra | ओं जीवमुख्यप्राणलिङ्गादिति चेत् तद्व्याख्यातम् ओम् ॥ 18-124 ॥ |
| BS_C01_S04_V18 | sutra | ॐ जीवमुख्यप्राणलिङ्गादिति चेत् तद्व्याख्यातम् ॐ ॥ 18-124 ॥ |
| BS_C01_S04_V18 | sutra | ओं जीवमुख्यप्राणलिङ्गादिति चेत् तद्व्याख्यातम् ओम् ॥ 18-124 ॥ |
| BS_C01_S04_V19 | sutra | ॐ अन्यार्थं तु जैमिनिः प्रश्नव्याख्यानाभ्यामपि चैवमेके ॐ ॥ 19-125 ॥ |
| BS_C01_S04_V19 | sutra | (125)ओं अन्यार्थं तु जैमिनिः प्रश्नव्याख्यानाभ्यामपि चैवमेके ओम् ॥ 01-04-19 ॥ |
| BS_C01_S04_V19 | sutra | (125)ओं अन्यार्थं तु जैमिनिः प्रश्नव्याख्यानाभ्यामपि चैवमेके ओम् ॥ 01-04-19 ॥ |
| BS_C01_S04_V19 | sutra | ॐ अन्यार्थं तु जैमिनिः प्रश्नव्याख्यानाभ्यामपि चैवमेके ॐ ॥ 19-125 ॥ |
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